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नोएडा : इंश्योरेंस कंपनियों के नाम पर 1000 लोगों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा,नौ गिरफ्तार
Fri, 07 Jan 2022 06:16 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jan 2022 06:16 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
इंश्योरेंस कंपनियों के नाम पर प्रलोभन देकर लोगों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का लखनऊ एसटीएफ ने खुलासा किया है। एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को नोएडा सेक्टर-65 के सी-104 में चल रहे कॉल सेंटर से सरगना समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने 1000 लोगों से अब तक 50 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी की है।
एसटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में विजय नगर निवासी मोनू वर्मा, लोनी निवासी राहुल वर्मा, इंदिरापुरम निवासी विवेक बागची, बागपत निवासी अनुज कुमार, सोनीपत निवासी सचिन कुमार, भाटिया मोड़ गाजियाबाद निवासी गणेश शर्मा, मथुरा निवासी रवि कुमार, संभल निवासी जाकिर और भोपुरा गाजियाबाद निवासी हेमेश कुमार शामिल हैं। पूछताछ में सरगना मोनू ने बताया कि यहां काम करने वाले अधिकतर आरोपी इंश्योरेंस कंपनियों में नौकरी करते थे। आरोपियों ने वर्ष 2018 में कॉल सेंटर खोल लिया और इंश्योरेंस कंपनियों के डाटा लेकर फर्जी दस्तावेज आदि बनाकर लोगों से टेलीफोन पर संपर्क करने लगे। पॉलिसी धारकों से यह आरोपी बात कर बीमा में बोनस देने और बंद पॉलिसी को लाभकारी रूप से दोबारा शुरू करने जैसे लालच देते थे।
जब पॉलिसी धारक इनके झांसे में आ जाते थे तो आरोपी अलग-अलग बैंक खातों में रुपये जमा करा लेते थे। आरोपी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस समेत अन्य संस्थानों की फर्जी आईडी बनाकर व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों को भेजकर विश्वास दिलाते थे कि यह लोग पंजीकृत हैं।
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एनसीआर से लेकर पंजाब-हरियाणा तक फैला जाल
आरोपियों का जाल दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों तक फैला हुआ है और अब तक 50 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी 1000 से अधिक लोगों से कर चुके हैं। इनमें सिरसा हरियाणा के राधे राम गोदारा से तीन करोड़, पंजाब के सतीश जैन से लगभग चार करोड़, कानपुर के मानसिंह से एक करोड़ रुपये की ठगी प्रमुख है। गिरोह के पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाया जा रहा है और हर खातों की जांच की जा रही है।
फॉरेंसिक ऑडिट से मिलेगी और जानकारी
आरोपियों के पास से बरामद डाटा का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा। यह डाटा इन लोगों को कहां से प्राप्त हुआ है इसकी जानकारी भी प्राप्त की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने हैकिंग या किसी कर्मचारी के माध्यम से यह डाटा कंपनियों से प्राप्त किया है। साथ ही, यह भी पता किया जा रहा है कि फर्जी बैंक खाते कैसे खोले गए।
यह हुई बरामदगी
21 मोबाइल, लैपटॉप, प्रिंटर, 18 एटीएम व दो सिम कार्ड, 20 रजिस्टर, 131 विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों के ग्राहकों का डाटा, 27 फर्जी दस्तावेज, तीन आधार, तीन पैन कार्ड, ऑडी सहित दो कारें, 36 हजार रुपये।
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एसटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में विजय नगर निवासी मोनू वर्मा, लोनी निवासी राहुल वर्मा, इंदिरापुरम निवासी विवेक बागची, बागपत निवासी अनुज कुमार, सोनीपत निवासी सचिन कुमार, भाटिया मोड़ गाजियाबाद निवासी गणेश शर्मा, मथुरा निवासी रवि कुमार, संभल निवासी जाकिर और भोपुरा गाजियाबाद निवासी हेमेश कुमार शामिल हैं। पूछताछ में सरगना मोनू ने बताया कि यहां काम करने वाले अधिकतर आरोपी इंश्योरेंस कंपनियों में नौकरी करते थे। आरोपियों ने वर्ष 2018 में कॉल सेंटर खोल लिया और इंश्योरेंस कंपनियों के डाटा लेकर फर्जी दस्तावेज आदि बनाकर लोगों से टेलीफोन पर संपर्क करने लगे। पॉलिसी धारकों से यह आरोपी बात कर बीमा में बोनस देने और बंद पॉलिसी को लाभकारी रूप से दोबारा शुरू करने जैसे लालच देते थे।
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जब पॉलिसी धारक इनके झांसे में आ जाते थे तो आरोपी अलग-अलग बैंक खातों में रुपये जमा करा लेते थे। आरोपी मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस समेत अन्य संस्थानों की फर्जी आईडी बनाकर व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों को भेजकर विश्वास दिलाते थे कि यह लोग पंजीकृत हैं।
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आरोपियों का जाल दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों तक फैला हुआ है और अब तक 50 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी 1000 से अधिक लोगों से कर चुके हैं। इनमें सिरसा हरियाणा के राधे राम गोदारा से तीन करोड़, पंजाब के सतीश जैन से लगभग चार करोड़, कानपुर के मानसिंह से एक करोड़ रुपये की ठगी प्रमुख है। गिरोह के पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाया जा रहा है और हर खातों की जांच की जा रही है।
फॉरेंसिक ऑडिट से मिलेगी और जानकारी
आरोपियों के पास से बरामद डाटा का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा। यह डाटा इन लोगों को कहां से प्राप्त हुआ है इसकी जानकारी भी प्राप्त की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने हैकिंग या किसी कर्मचारी के माध्यम से यह डाटा कंपनियों से प्राप्त किया है। साथ ही, यह भी पता किया जा रहा है कि फर्जी बैंक खाते कैसे खोले गए।
यह हुई बरामदगी
21 मोबाइल, लैपटॉप, प्रिंटर, 18 एटीएम व दो सिम कार्ड, 20 रजिस्टर, 131 विभिन्न इंश्योरेंस कंपनियों के ग्राहकों का डाटा, 27 फर्जी दस्तावेज, तीन आधार, तीन पैन कार्ड, ऑडी सहित दो कारें, 36 हजार रुपये।