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Noida News: गवाहों के पलटने से सड़क हादसे का आरोपी बरी
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(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। थाना ईकोटेक-3 क्षेत्र में वर्ष 2016 में हुए एक सड़क हादसे के मामले में अदालत ने आरोपी रविंद्र निवासी तुलसी विहार दादरी को दोषमुक्त कर दिया। मामला 16 मार्च 2016 को दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड में कार्यरत राजपाल (50) निवासी बुलंदशहर 10 जनवरी 2016 को रात्रि ड्यूटी के बाद साइकिल से घर लौट रहे थे। कच्ची सड़क पर एक बोलेरो गाड़ी ने राजपाल की साइकिल को टक्कर मार दी। साथी कर्मचारियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया जहां उनकी मौत हो गई। काेर्ट में सुनवाई के दौरान प्रमुख गवाह सुनील कुमार और रामबीर सिंह ने घटना की जानकारी होने से पूरी तरह इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। हालांकि बाद में न्यायालय द्वारा पूछे जाने पर दोनों गवाहों ने अलग-अलग व विरोधाभासी बयान दिए।
एक गवाह ने यह भी कहा कि कंपनी के एचआर मैनेजर ने मुआवजा दिलाने के लिए बोलेरो चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था, जबकि वास्तव में उस चालक ने कोई दुर्घटना नहीं की थी। तीसरा गवाह वादी अनीश कुमार सिंह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था और जिरह के लिए भी उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने संदेह का लाभ देकर आरोपी को बरी कर दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। थाना ईकोटेक-3 क्षेत्र में वर्ष 2016 में हुए एक सड़क हादसे के मामले में अदालत ने आरोपी रविंद्र निवासी तुलसी विहार दादरी को दोषमुक्त कर दिया। मामला 16 मार्च 2016 को दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार मिंडा कॉरपोरेशन लिमिटेड में कार्यरत राजपाल (50) निवासी बुलंदशहर 10 जनवरी 2016 को रात्रि ड्यूटी के बाद साइकिल से घर लौट रहे थे। कच्ची सड़क पर एक बोलेरो गाड़ी ने राजपाल की साइकिल को टक्कर मार दी। साथी कर्मचारियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया जहां उनकी मौत हो गई। काेर्ट में सुनवाई के दौरान प्रमुख गवाह सुनील कुमार और रामबीर सिंह ने घटना की जानकारी होने से पूरी तरह इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। हालांकि बाद में न्यायालय द्वारा पूछे जाने पर दोनों गवाहों ने अलग-अलग व विरोधाभासी बयान दिए।
एक गवाह ने यह भी कहा कि कंपनी के एचआर मैनेजर ने मुआवजा दिलाने के लिए बोलेरो चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था, जबकि वास्तव में उस चालक ने कोई दुर्घटना नहीं की थी। तीसरा गवाह वादी अनीश कुमार सिंह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था और जिरह के लिए भी उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने संदेह का लाभ देकर आरोपी को बरी कर दिया।
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