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Noida News: फर्जी पते पर आधार कार्ड बनवाकर खुलवाएं बैंक खातों में आती थी ठगी की रकम
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फोटो
-बिसरख कोतवाली पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार, 20 फीसदी कमीशन पर चलता था खेल
-बिसरख कोतवाली पुलिस ने पासबुक, चेकबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड बरामद किया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने और दूसरे लोगों के आधार कार्ड व पैन कार्ड से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे और उन्हें ठगी करने वाले मुख्य गिरोह तक पहुंचाते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हाथरस निवासी प्रेम (21), आतिश (20) और कुणाल (19) के रूप में हुई। फिलहाल वह गाजियाबाद के लालकुआं क्षेत्र में रह रहे थे।
आरोपियों के पास 29 पासबुक, 23 चेकबुक, दो डेबिट कार्ड, 14 आधार कार्ड, आठ पैन कार्ड, छह वीआई सिम कवर और दो जियो सिम के कवर, घटना में इस्तेमाल तीन मोबाइल, 530 रुपये नकद बरामद हुए है। आरोपी अधूरे और बदले हुए पते वाले आधार कार्ड के सहारे बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम इधर से उधर करते थे। इन्हीं खातों में देश के अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों से ठगा गया पैसा मंगवाया जाता था। आरोपियों के खिलाफ 30 से अधिक शिकायत देश के कई राज्यों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायतें दर्ज हैं। खातों में 1 करोड़ रुपये से अधिक की ट्रांजेक्शन मिली है। आरोपी एक साल से अधिक समय से ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली की भविष्य इंडिया टावर के बराबर निर्माणाधीन बिल्डिंग में तीन युवक बैठे हैं। वह बैंक खातों में आए रुपयों को आपस में बांटने की बातचीत कर रहे हैं। हाथ में बैंक से जुड़ी किताबें लिए हिसाब लगा रहे हैं। इसके बाद पुलिसकर्मी बिल्डिंग में एक अर्धनिर्मित कमरे के पास छिपकर पहुंचे। उन्होंने तीनों को दबोच लिया। आरोपियों ने बताया कि वह अलग-अलग मोबाइल नंबर और पहचान पत्रों से बैंकों में खाते खुलवाते हैं। इन्हीं खातों में लोगों से साइबर ठगी का पैसा मंगवाया जाता था। उस दिन वह अपने साथी अरुण कुमार निवासी हाथरस और नावेद से कमीशन लेने आए थे और उन्हीं का इंतजार कर रहे थे।
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आधार में अधूरे पते का खेल : एडीसीपी सेंट्रल नोएडा स्वतंत्र सिंह का कहना है कि आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए आधार कार्ड पर अधूरा पता दर्ज कराते थे। खाता खुलने के बाद वह पता दोबारा बदलवा देते थे। जिससे शिकायत होने पर पुलिस उन तक न पहुंच सके। कई कार्ड पर हाथरस के साथ अन्य जनपदों के अधूरे पते भी दर्ज कराए गए थे। खातों में पैसा आने के बाद वह उसे नकद या इंटरनेट बैंकिंग से निकालते थे। अपना हिस्सा रखकर बाकी रकम अरुण और नावेद को दे देते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वह केवल अरुण और नावेद को जानते हैं। एसीपी सेंट्रल नोएडा कमलेश कांत का कहना है कि जांच में सामने आया कि खाते उपलब्ध कराने वाले प्रेम, कुणाल और आतिश को मुख्य आरोपी अरुण और नावेद की ओर से खातों में आई रकम का 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।
शिकायत होते ही बदल लेते थे खाता : कोतवाली प्रभारी रंजीत सिंह का कहना है कि पुलिस के अनुसार गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। बैंक खातों में पंजीकृत मोबाइल नंबरों को आरोपी नष्ट कर देते थे। जिससे कोई ट्रैक न कर सके। जब किसी शिकायत के चलते खाता फ्रीज हो जाता था, तो वे नए बैंक खाते खुलवा लेते थे। इस तरह ठगी की कड़ी बिना रुके चलती रहती थी। गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की हैं। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेजा गया है। जांच अधिकारी निशांत मलिक ने बताया कि मुख्य आरोपी अरुण और नावेद और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पता चला है कि अरुण भी उसी गांव का रहना वाला है जहां के गिरफ्तार हुए तीन युवक है।
एनसीआरपी पोर्टल पर मिलीं शिकायतें :
पुलिस ने क्राइम किट के लैपटॉप से एनसीआरपी पोर्टल पर बरामद खातों की जांच की। उन खातों के खिलाफ कैनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, एसबीआई, यूको बैंक, एक्सिस बैंक, फेडरल बैंक, पीएनबी, इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बैंकों से जुड़ी शिकायतें दर्ज मिलीं।
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-बिसरख कोतवाली पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार, 20 फीसदी कमीशन पर चलता था खेल
-बिसरख कोतवाली पुलिस ने पासबुक, चेकबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड बरामद किया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसरख कोतवाली पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने और दूसरे लोगों के आधार कार्ड व पैन कार्ड से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे और उन्हें ठगी करने वाले मुख्य गिरोह तक पहुंचाते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हाथरस निवासी प्रेम (21), आतिश (20) और कुणाल (19) के रूप में हुई। फिलहाल वह गाजियाबाद के लालकुआं क्षेत्र में रह रहे थे।
आरोपियों के पास 29 पासबुक, 23 चेकबुक, दो डेबिट कार्ड, 14 आधार कार्ड, आठ पैन कार्ड, छह वीआई सिम कवर और दो जियो सिम के कवर, घटना में इस्तेमाल तीन मोबाइल, 530 रुपये नकद बरामद हुए है। आरोपी अधूरे और बदले हुए पते वाले आधार कार्ड के सहारे बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम इधर से उधर करते थे। इन्हीं खातों में देश के अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों से ठगा गया पैसा मंगवाया जाता था। आरोपियों के खिलाफ 30 से अधिक शिकायत देश के कई राज्यों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायतें दर्ज हैं। खातों में 1 करोड़ रुपये से अधिक की ट्रांजेक्शन मिली है। आरोपी एक साल से अधिक समय से ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे।
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पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली की भविष्य इंडिया टावर के बराबर निर्माणाधीन बिल्डिंग में तीन युवक बैठे हैं। वह बैंक खातों में आए रुपयों को आपस में बांटने की बातचीत कर रहे हैं। हाथ में बैंक से जुड़ी किताबें लिए हिसाब लगा रहे हैं। इसके बाद पुलिसकर्मी बिल्डिंग में एक अर्धनिर्मित कमरे के पास छिपकर पहुंचे। उन्होंने तीनों को दबोच लिया। आरोपियों ने बताया कि वह अलग-अलग मोबाइल नंबर और पहचान पत्रों से बैंकों में खाते खुलवाते हैं। इन्हीं खातों में लोगों से साइबर ठगी का पैसा मंगवाया जाता था। उस दिन वह अपने साथी अरुण कुमार निवासी हाथरस और नावेद से कमीशन लेने आए थे और उन्हीं का इंतजार कर रहे थे।
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आधार में अधूरे पते का खेल : एडीसीपी सेंट्रल नोएडा स्वतंत्र सिंह का कहना है कि आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए आधार कार्ड पर अधूरा पता दर्ज कराते थे। खाता खुलने के बाद वह पता दोबारा बदलवा देते थे। जिससे शिकायत होने पर पुलिस उन तक न पहुंच सके। कई कार्ड पर हाथरस के साथ अन्य जनपदों के अधूरे पते भी दर्ज कराए गए थे। खातों में पैसा आने के बाद वह उसे नकद या इंटरनेट बैंकिंग से निकालते थे। अपना हिस्सा रखकर बाकी रकम अरुण और नावेद को दे देते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वह केवल अरुण और नावेद को जानते हैं। एसीपी सेंट्रल नोएडा कमलेश कांत का कहना है कि जांच में सामने आया कि खाते उपलब्ध कराने वाले प्रेम, कुणाल और आतिश को मुख्य आरोपी अरुण और नावेद की ओर से खातों में आई रकम का 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।
शिकायत होते ही बदल लेते थे खाता : कोतवाली प्रभारी रंजीत सिंह का कहना है कि पुलिस के अनुसार गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। बैंक खातों में पंजीकृत मोबाइल नंबरों को आरोपी नष्ट कर देते थे। जिससे कोई ट्रैक न कर सके। जब किसी शिकायत के चलते खाता फ्रीज हो जाता था, तो वे नए बैंक खाते खुलवा लेते थे। इस तरह ठगी की कड़ी बिना रुके चलती रहती थी। गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की हैं। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेजा गया है। जांच अधिकारी निशांत मलिक ने बताया कि मुख्य आरोपी अरुण और नावेद और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पता चला है कि अरुण भी उसी गांव का रहना वाला है जहां के गिरफ्तार हुए तीन युवक है।
एनसीआरपी पोर्टल पर मिलीं शिकायतें :
पुलिस ने क्राइम किट के लैपटॉप से एनसीआरपी पोर्टल पर बरामद खातों की जांच की। उन खातों के खिलाफ कैनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, एसबीआई, यूको बैंक, एक्सिस बैंक, फेडरल बैंक, पीएनबी, इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बैंकों से जुड़ी शिकायतें दर्ज मिलीं।