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Noida News: किशोरी की गला दबाकर हत्या के आरोपी को उम्रकैद
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(अदालत से)
- सत्र न्यायालय ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया
- एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जुर्माना जमा नहीं करने पर होगा एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। भंगेल में 15 वर्षीय किशोरी की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने आरोपी अलाउद्दीन निवासी वैशाली बिहार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पुलिस में दर्ज तहरीर के अनुसार अलाउद्दीन भंगेल के एक मकान में रहता था। उसी मकान में वादी भी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ किरायेदार था। 26 मई 2014 को वादी की पुत्री लापता हो गई थी। शाम को घर लौटने पर वादी की पत्नी ने बताया कि अलाउद्दीन ऊपर के कमरे से नीचे उतरकर आया और वादी की पुत्री के बारे में पूछे जाने पर बहाना बनाकर तेजी से बाहर चला गया। इसके बाद जब परिवार वालों ने ऊपर जाकर देखा तो अलाउद्दीन के छोटे भाई निजाम ने कमरे का ताला तोड़ा, जिसके अंदर वादी की पुत्री का शव दीवार के सहारे पड़ा मिला। इस सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
अदालत ने पाया कि शव अलाउद्दीन के ही कमरे से बरामद हुआ था। यह सिद्ध करने का दायित्व स्वयं आरोपी पर था कि शव उसके कमरे में कैसे पहुंचा लेकिन वह इस बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। सुनवाई के दौरान अभियोजन से एडीजीसी नितिन त्यागी ने अदालत को बताया कि आरोपी ने मासूम बच्ची की हत्या अपने ही निवास स्थल पर की। आरोपी ने दावा किया कि मृतका किसी इस्माइल नामक युवक से प्रेम करती थी और उसने आत्महत्या से पूर्व एक पत्र लिखा था। हालांकि फोरेंसिक जांच में यह पत्र मृतका की लिखावट से मेल खाता पाया गया, परंतु अदालत ने कहा कि पत्र की विषयवस्तु में कहीं आत्महत्या के इरादे का उल्लेख नहीं है और चूंकि मेडिकल साक्ष्य स्पष्ट रूप से गला दबाकर हत्या की पुष्टि करते हैं, इसलिए इस पत्र से आरोपी को कोई राहत नहीं मिलती। इसे देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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- सत्र न्यायालय ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया
- एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जुर्माना जमा नहीं करने पर होगा एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। भंगेल में 15 वर्षीय किशोरी की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने आरोपी अलाउद्दीन निवासी वैशाली बिहार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पुलिस में दर्ज तहरीर के अनुसार अलाउद्दीन भंगेल के एक मकान में रहता था। उसी मकान में वादी भी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ किरायेदार था। 26 मई 2014 को वादी की पुत्री लापता हो गई थी। शाम को घर लौटने पर वादी की पत्नी ने बताया कि अलाउद्दीन ऊपर के कमरे से नीचे उतरकर आया और वादी की पुत्री के बारे में पूछे जाने पर बहाना बनाकर तेजी से बाहर चला गया। इसके बाद जब परिवार वालों ने ऊपर जाकर देखा तो अलाउद्दीन के छोटे भाई निजाम ने कमरे का ताला तोड़ा, जिसके अंदर वादी की पुत्री का शव दीवार के सहारे पड़ा मिला। इस सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
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अदालत ने पाया कि शव अलाउद्दीन के ही कमरे से बरामद हुआ था। यह सिद्ध करने का दायित्व स्वयं आरोपी पर था कि शव उसके कमरे में कैसे पहुंचा लेकिन वह इस बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। सुनवाई के दौरान अभियोजन से एडीजीसी नितिन त्यागी ने अदालत को बताया कि आरोपी ने मासूम बच्ची की हत्या अपने ही निवास स्थल पर की। आरोपी ने दावा किया कि मृतका किसी इस्माइल नामक युवक से प्रेम करती थी और उसने आत्महत्या से पूर्व एक पत्र लिखा था। हालांकि फोरेंसिक जांच में यह पत्र मृतका की लिखावट से मेल खाता पाया गया, परंतु अदालत ने कहा कि पत्र की विषयवस्तु में कहीं आत्महत्या के इरादे का उल्लेख नहीं है और चूंकि मेडिकल साक्ष्य स्पष्ट रूप से गला दबाकर हत्या की पुष्टि करते हैं, इसलिए इस पत्र से आरोपी को कोई राहत नहीं मिलती। इसे देखते हुए न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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