{"_id":"629baffe65a2fe40824f9fb1","slug":"despite-measuring-the-path-of-the-accountant-the-soil-is-not-allowed-to-be-poured-grnoida-news-noi6524255109","type":"story","status":"publish","title_hn":"लेखपाल के रास्ता नापने के बावजूद नहीं डालने दे रहे मिट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लेखपाल के रास्ता नापने के बावजूद नहीं डालने दे रहे मिट्टी
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। दादरी तहसील के शादीपुर छिडौली गांव में लेखपाल ने रास्ता नापकर प्रधान के सामने निशानदेही कर दी। बाद में रास्ते पर मनरेगा योजना के तहत मिट्टी डाल रहे श्रमिकों को काम नहीं करने दिया गया, जिस किसान के खेत से रास्ता निकाला गया है, वह और उसके परिजन इसका विरोध कर रहे हैं। इसके चलते दो दिन से बिना काम के श्रमिक लौट रहे हैं। श्रमिकों ने प्रशासन से विवाद को निपटाने की मांग की है।
दादरी तहसील के शादीपुर छिडौली गांव में तीन सौ मीटर के रास्ते का निर्माण होना है। रास्ते को कुछ लोगों ने कब्जा करके अपने खेत में मिला रखा है। तीन दिन पहले लेखपाल ने प्रधान की मौजूदगी में रास्ते की नपाई करके उसके निशान लगा दिए थे। इस रास्ते पर मिट्टी डालने के लिए करीब पचास से अधिक श्रमिकों को सात दिन का काम दिया गया है। उन्हें मनरेगा के तहत 213 रुपये मजदूरी मिलती है। दो दिन काम करने के बाद तीसरे दिन जब श्रमिक मौके पर पहुंचे तो खेत के मालिक किसान ने काम रोक दिया। किसान का कहना है कि रास्ता उसकी जमीन में नापा गया है।
उधर, दो दिन से काम बंद होने पर मनरेगा के करीब पचास श्रमिकों को घर लौटना पड़ रहा है। काम नहीं होने से उनको मजदूरी भी नहीं मिल रही है। श्रमिकों ने बताया कि काम रोकने की शिकायत ग्राम प्रधान समेत ब्लॉक के अधिकारियों से की गई है लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी समस्या को निपटाने के लिए तैयार नहीं है। मामले की शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन से भी की है। उनका कहना है कि विवाद को निपटाकर काम शुरू करा दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
दादरी तहसील के शादीपुर छिडौली गांव में तीन सौ मीटर के रास्ते का निर्माण होना है। रास्ते को कुछ लोगों ने कब्जा करके अपने खेत में मिला रखा है। तीन दिन पहले लेखपाल ने प्रधान की मौजूदगी में रास्ते की नपाई करके उसके निशान लगा दिए थे। इस रास्ते पर मिट्टी डालने के लिए करीब पचास से अधिक श्रमिकों को सात दिन का काम दिया गया है। उन्हें मनरेगा के तहत 213 रुपये मजदूरी मिलती है। दो दिन काम करने के बाद तीसरे दिन जब श्रमिक मौके पर पहुंचे तो खेत के मालिक किसान ने काम रोक दिया। किसान का कहना है कि रास्ता उसकी जमीन में नापा गया है।
विज्ञापन
उधर, दो दिन से काम बंद होने पर मनरेगा के करीब पचास श्रमिकों को घर लौटना पड़ रहा है। काम नहीं होने से उनको मजदूरी भी नहीं मिल रही है। श्रमिकों ने बताया कि काम रोकने की शिकायत ग्राम प्रधान समेत ब्लॉक के अधिकारियों से की गई है लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी समस्या को निपटाने के लिए तैयार नहीं है। मामले की शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन से भी की है। उनका कहना है कि विवाद को निपटाकर काम शुरू करा दिया जाए।
विज्ञापन