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देहात में डेंगू-बुखार का कहर, लखनऊ से बढ़ी निगरानी
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नोएडा। देहात क्षेत्र में डेंगू-बुखार का कहर बढ़ रहा है। जेवर के थोरा गांव में एक के बाद एक चार मौतों का मामला शासन तक पहुंचने पर स्वास्थ्य महानिदेशालय हरकत में आ गया है। लखनऊ में बैठे अफसरों ने जिले में निगरानी बढ़ा दी है। वहीं, बुधवार को जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम थोरा गांव पहुंची। गांव में सर्वे से घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की पहचान की जा रही है।
जिला स्वास्थ्य विभाग डेंगू के सबसे ज्यादा मामले शहरी क्षेत्र के होने का दावा कर रहा था, लेकिन अक्तूबर में बिगड़े हालात ने देहात में बढ़ रही मच्छरजनित बीमारियों के प्रकोप का खुलासा किया है। थोरा गांव में 25 अक्तूबर तक चार मौत के बाद ग्रामीणों ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया। स्थानीय प्रशासन के अलावा शासन स्तर तक मामला पहुंचने के बाद बुधवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय ने जिले के हालात पर रिपोर्ट तलब की है।
वहीं, जेवर क्षेत्र के विधायक भी बुधवार को स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे। लखनऊ से मिले दिशानिर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीम को थोरा गांव भेजा। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि गांव के घर-घर में जाकर टीम बुखार के मरीजों की तलाश करेगी। मरीजों की डेंगू-मलेरिया जांच कराई जाएगी। फिलहाल, जेवर में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है, लेकिन एंटीजन जांच में पुष्टि होने पर मरीजों के नमूने जिला अस्पताल की केंद्रीय लैब भेजे जाएंगे। गांव में जलभराव वाले स्थानों पर एंटी लार्वा गतिविधियां शुरू की गई हैं।
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‘लैब में जांच नहीं तो कैसे मान लें डेंगू से मौत’
जिले में अब तक डेंगू से केवल एक मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है, जबकि डेंगू संदिग्ध कई मरीजों की मौत की खबरें आ चुकी हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मरीजों के नमूनों की केंद्रीय लैब में जांच ही नहीं हुई, उनकी डेंगू से मौत कैसे मानी जा सकती है। अब तक सेक्टर-12 निवासी 14 वर्षीय किशोर की डेंगू से मौत का मामला सामने आया है।
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जिला स्वास्थ्य विभाग डेंगू के सबसे ज्यादा मामले शहरी क्षेत्र के होने का दावा कर रहा था, लेकिन अक्तूबर में बिगड़े हालात ने देहात में बढ़ रही मच्छरजनित बीमारियों के प्रकोप का खुलासा किया है। थोरा गांव में 25 अक्तूबर तक चार मौत के बाद ग्रामीणों ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया। स्थानीय प्रशासन के अलावा शासन स्तर तक मामला पहुंचने के बाद बुधवार को स्वास्थ्य महानिदेशालय ने जिले के हालात पर रिपोर्ट तलब की है।
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वहीं, जेवर क्षेत्र के विधायक भी बुधवार को स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे। लखनऊ से मिले दिशानिर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीम को थोरा गांव भेजा। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि गांव के घर-घर में जाकर टीम बुखार के मरीजों की तलाश करेगी। मरीजों की डेंगू-मलेरिया जांच कराई जाएगी। फिलहाल, जेवर में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है, लेकिन एंटीजन जांच में पुष्टि होने पर मरीजों के नमूने जिला अस्पताल की केंद्रीय लैब भेजे जाएंगे। गांव में जलभराव वाले स्थानों पर एंटी लार्वा गतिविधियां शुरू की गई हैं।
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‘लैब में जांच नहीं तो कैसे मान लें डेंगू से मौत’
जिले में अब तक डेंगू से केवल एक मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है, जबकि डेंगू संदिग्ध कई मरीजों की मौत की खबरें आ चुकी हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मरीजों के नमूनों की केंद्रीय लैब में जांच ही नहीं हुई, उनकी डेंगू से मौत कैसे मानी जा सकती है। अब तक सेक्टर-12 निवासी 14 वर्षीय किशोर की डेंगू से मौत का मामला सामने आया है।