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Noida News: सेक्टर 9 सहित अन्य सेक्टरों में दुकानों को वाणिज्यिक दर्जा देने की मांग
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- औद्योगिक और आवासीय सेक्टरों की जरूरतों को पूरी करने वाले व्यापारी चल रहे हाशिए पर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर के सेक्टर-9 सहित सेक्टर-5, 6, 7, 8 और 10 में छोटे औद्योगिक भूखंडों पर चल रही वाणिज्यिक दुकानों को लेकर कारोबारी परेशान हैं। इन भूखंडों पर दशकों से दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इन्हें वाणिज्यिक दर्जा नहीं मिला है। इससे कारोबारियों को हर समय नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई का डर सताता रहता है। अब कारोबारी प्राधिकरण से इन दुकानों को वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे बिना भय के अपना कारोबार चला सकें।
दरअसल, सेक्टर-9 के कारोबारी बताते हैं कि इन क्षेत्रों में छोटे-छोटे भूखंडों पर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, और अन्य प्रकार की दुकानें लंबे समय से चल रही हैं। ये दुकानें स्थानीय निवासियों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ रोजगार भी प्रदान करती हैं। सेक्टर-18 के बाद सेक्टर-9 शहर का सबसे बड़ा मार्केट जहां, जरूरत का हर सामान आसानी से मिल जाता है। यहां के सेक्टरों में भूखंडों का मूल रूप से औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटन हुआ था, जिसके कारण प्राधिकरण समय-समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देता रहता है। करीब डेढ़-दो साल पहले भी नोएडा प्राधिकरण ने भूखंड के उचित उपयोग न करने व वाणिज्यिक गतिविधि संचालित करने पर कई फैक्ट्री को सील कर दिया था। व्यापारियों के कड़े विरोध के बाद इस कार्रवाई को रोका गया। कारोबारियों का कहना है कि यदि इन दुकानों को वाणिज्यिक दर्जा मिल जाए तो वे कानूनी रूप से अपना व्यवसाय संचालित कर सकेंगे।
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बॉक्स :
व्यापारियों के कोट :
हर माह करोड़ों रुपये का राजस्व टैक्स के रूप में प्रदेश सरकार के खाते में जमा कराने वाले व्यापारियों की तनिक भी चिंता प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों को नहीं है। शहर के बसे हुए कई दशक बीत जाने के बाद भी यहां के निवासियाें की जरूरतों को पूरी करने वाले व्यापारी आज भी डर के साये में कारोबार कर रहे हैं।
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-सुशील सिंघल, अध्यक्ष गौतमबुद्ध नगर स्टॉकिस्ट एसोसिएशन।
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स्थानीय कारोबारी संगठनों ने इस मुद्दे को कई बार प्राधिकरण के समक्ष उठाया है। उनका तर्क है कि इन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं और ये स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वाणिज्यिक दर्जा देने से न केवल कारोबारियों को राहत मिलेगी, बल्कि प्राधिकरण को भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा।
- नरेश कुच्छल, चेयरमैन यूपी उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।
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प्राधिकरण ने शहर के साथ औद्योगिक सेक्टर को भी विकसित किया है। लेकिन यहां के निवासियों के जरूरतों को पूरा करने के लिए थोक अनाज, किराना, सब्जी मंडी आदि की स्थापना करना भूल गया। जिसके कारण व्यापारियों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। व्यापारियों की मांग है कि उन्हें भी उचित स्थान दिया जाए।
- विकास जैन, प्रदेश अध्यक्ष यूपी युवा व्यापार मंडल।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर के सेक्टर-9 सहित सेक्टर-5, 6, 7, 8 और 10 में छोटे औद्योगिक भूखंडों पर चल रही वाणिज्यिक दुकानों को लेकर कारोबारी परेशान हैं। इन भूखंडों पर दशकों से दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण इन्हें वाणिज्यिक दर्जा नहीं मिला है। इससे कारोबारियों को हर समय नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई का डर सताता रहता है। अब कारोबारी प्राधिकरण से इन दुकानों को वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे बिना भय के अपना कारोबार चला सकें।
दरअसल, सेक्टर-9 के कारोबारी बताते हैं कि इन क्षेत्रों में छोटे-छोटे भूखंडों पर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, और अन्य प्रकार की दुकानें लंबे समय से चल रही हैं। ये दुकानें स्थानीय निवासियों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ रोजगार भी प्रदान करती हैं। सेक्टर-18 के बाद सेक्टर-9 शहर का सबसे बड़ा मार्केट जहां, जरूरत का हर सामान आसानी से मिल जाता है। यहां के सेक्टरों में भूखंडों का मूल रूप से औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटन हुआ था, जिसके कारण प्राधिकरण समय-समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देता रहता है। करीब डेढ़-दो साल पहले भी नोएडा प्राधिकरण ने भूखंड के उचित उपयोग न करने व वाणिज्यिक गतिविधि संचालित करने पर कई फैक्ट्री को सील कर दिया था। व्यापारियों के कड़े विरोध के बाद इस कार्रवाई को रोका गया। कारोबारियों का कहना है कि यदि इन दुकानों को वाणिज्यिक दर्जा मिल जाए तो वे कानूनी रूप से अपना व्यवसाय संचालित कर सकेंगे।
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व्यापारियों के कोट :
हर माह करोड़ों रुपये का राजस्व टैक्स के रूप में प्रदेश सरकार के खाते में जमा कराने वाले व्यापारियों की तनिक भी चिंता प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों को नहीं है। शहर के बसे हुए कई दशक बीत जाने के बाद भी यहां के निवासियाें की जरूरतों को पूरी करने वाले व्यापारी आज भी डर के साये में कारोबार कर रहे हैं।
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-सुशील सिंघल, अध्यक्ष गौतमबुद्ध नगर स्टॉकिस्ट एसोसिएशन।
स्थानीय कारोबारी संगठनों ने इस मुद्दे को कई बार प्राधिकरण के समक्ष उठाया है। उनका तर्क है कि इन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं और ये स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वाणिज्यिक दर्जा देने से न केवल कारोबारियों को राहत मिलेगी, बल्कि प्राधिकरण को भी नियमित राजस्व प्राप्त होगा।
- नरेश कुच्छल, चेयरमैन यूपी उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।
प्राधिकरण ने शहर के साथ औद्योगिक सेक्टर को भी विकसित किया है। लेकिन यहां के निवासियों के जरूरतों को पूरा करने के लिए थोक अनाज, किराना, सब्जी मंडी आदि की स्थापना करना भूल गया। जिसके कारण व्यापारियों पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। व्यापारियों की मांग है कि उन्हें भी उचित स्थान दिया जाए।
- विकास जैन, प्रदेश अध्यक्ष यूपी युवा व्यापार मंडल।
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