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पॉश अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की मांग खारिज
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पॉश अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या संपत्ति के संपन्न मालिक अनपढ़, गरीब या दलित वर्ग से हैं क्योंकि उन्होंने सैनिक फार्म, महेंद्रू एन्क्लेव और अनंत राम डेयरी जैसी अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने की मांग की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका को समृद्ध अनधिकृत कालोनियों के निवासियों के इशारे पर दायर याचिका को प्रेरित मुकदमा करार दिया। अदालत ने कहा कि छूटी हुई अनधिकृत कालोनियों के निवासी जब भी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, नियम और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
अदालत ने अनधिकृत कालोनियों को कानूनी या नियमित कालोनियों में बदलने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए ये आदेश पारित किया।
केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि अनधिकृत समृद्ध कालोनियों में रहने वाले लोग अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों के साथ समानता की दलील नहीं दे सकते हैं।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने दलील दी कि अधिकृत लोगों ने जानबूझकर संपन्न लोगों द्वारा बनाई गई अनधिकृत कालोनियों के लोगों को बाहर रखा है। याचिका में कहा गया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को 1731 के बजाय सभी 1797 अनधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण के लिए पंजीकरण स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका को समृद्ध अनधिकृत कालोनियों के निवासियों के इशारे पर दायर याचिका को प्रेरित मुकदमा करार दिया। अदालत ने कहा कि छूटी हुई अनधिकृत कालोनियों के निवासी जब भी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, नियम और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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अदालत ने अनधिकृत कालोनियों को कानूनी या नियमित कालोनियों में बदलने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए ये आदेश पारित किया।
केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि अनधिकृत समृद्ध कालोनियों में रहने वाले लोग अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों के साथ समानता की दलील नहीं दे सकते हैं।
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याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने दलील दी कि अधिकृत लोगों ने जानबूझकर संपन्न लोगों द्वारा बनाई गई अनधिकृत कालोनियों के लोगों को बाहर रखा है। याचिका में कहा गया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को 1731 के बजाय सभी 1797 अनधिकृत कालोनियों के नियमितीकरण के लिए पंजीकरण स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की है।