Twin Tower: ट्विन टावर गिराने के बाद तीन माह तक दर्द देता रहेगा मलबा, तेजी से चल रही तैयारियां
एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई योजना में बताया गया है कि ट्विन टावर को गिराने के बाद मलबा जमा होगा। इसमें चार हजार टन सरिया होगा जिसे एडिफिस इस्तेमाल करेगी, जबकि 56 हजार टन मलबे का निस्तारण करना होगा।
विस्तार
सुपरटेक के ट्विन टावर को गिराने के लिए अंतिम दौर की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। 28 अगस्त को ब्लास्ट के बाद ट्विन टावर करीब 60 हजार टन मलबे में तब्दील हो जाएंगे, जो अगले तीन माह तक लोगों को सरदर्द बना रहेगा। इस मलबे को हटाना चुनौती भरा होगा। इस दौरान धूल उड़ने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई योजना में बताया गया है कि ट्विन टावर को गिराने के बाद मलबा जमा होगा। इसमें चार हजार टन सरिया होगा जिसे एडिफिस इस्तेमाल करेगी, जबकि 56 हजार टन मलबे का निस्तारण करना होगा। इस मलबे को यहां से तीन डंपिंग साइट पर ले जाया जाएगा और जमीन के स्तर तक इसे भरा जाएगा। इसके लिए कंटेनर के अलावा ट्रकों का इस्तेमाल होगा। टावर गिराने के बाद मौके पर मलबे के ढेर से सरिये काटकर अलग किए जाएंगे। इसमें करीब 10 दिन लगेंगे। इसके अलावा ट्विन टावर के डबल बेसमेंट को मलबे से भरकर समतल किया जाएगा। इसमें करीब 35 हजार टन मलबे के निस्तारण की बात बताई जा रही है। इसके ऊपर मिट्टी आदि डालकर पार्क में बदला जाएगा।
आसपास के पार्कों और पौधों को भी ढका जाएगा
अंतिम ब्लास्ट से पहले आसपास की इमारतों के अलावा पार्कों और पौधों को भी प्लास्टिक शीट आदि से ढका जाएगा। आरडब्ल्यूए का कहना है कि पार्कों को विकसित करने में काफी मेहनत की गई है। अगर इन्हें खुला छोड़ दिया गया तो यह किसी काम के नहीं रहेंगे और सभी पौधे खत्म हो जाएंगे। ऐसे में महत्वपूर्ण पौधों को ढकने की योजना है। ट्विन टावर के आसपास पार्श्वनाथ, एटीएस, एल्डिको, सिल्वर सिटी समेत कई अन्य सोसाइटी हैं। इन सभी में पार्क बने हैं, जिन्हें बचाने की कवायद की जाएगी। इसके लिए खर्च कौन करेगा। इस पर अभी फैसला होना बाकी है। संभव है कि इसकी भरपाई भी बिल्डर से की जाएगी।
300 पिलरों की मरम्मत की जरूरत
एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष यूबीएस तेवतिया ने बताया कि बिल्डर ने पांच वर्ष पहले मरम्मत कराई थी। अब करीब 300 पिलरों की मरम्मत करने की जरूरत है, लेकिन बिल्डर केवल 55 पिलरों की मरम्मत को राजी हुआ है। ऐसे में अंतिम ब्लास्ट के दौरान टावर खतरे की जद में होंगे। निवासियों का कहना है कि बिल्डर ने अवैध तरीके से बेसमेंट में दीवार बना रखी थी इसलिए वहां की मरम्मत नहीं हो पाई। दूसरी ओर पिलरों की हालत का पता नहीं चल रहा था, लेकिन जब पता चला है तो भी बिल्डर काम नहीं करा रहा है।
धूल हटाने के लिए लगेंगी मशीनें
एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज सोसाइटी में जगह-जगह जमी हुई धूल की परतें हटाने के लिए तीन-तीन मशीनें लगेंगी। इसके अलावा आरडब्ल्यूए ने दोनों सोसाइटियों के लिए 50-50 मजदूर भी मांगे हैं, जो सफाई का काम करेंगे। प्राधिकरण में हुई बैठक में आरडब्ल्यूए ने यह मांग रखी।
एपेक्स में विस्फोटक लगाने का काम जारी
सियान टावर में विस्फोटक लगाने का काम पूरा हो चुका है। एपेक्स में अभी काम चल रहा है। एडिफिस इंजीनियरिंग के पदाधिकारियों का कहना है कि एपेक्स टावर के 17 तलों पर विस्फोटक लगाए जा रहे हैं। यहां का काम थोड़ा मुश्किल है और ऊपर से नीचे आने के क्रम में काम का दबाव है। लिहाजा, पहले वाले टावर के मुकाबले इसमें ज्यादा समय लग रहा है।