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Noida News: डीएपी खाद के संकट से खेतों में बुवाई रुकी, सूखने लगा पलेवा

Sat, 08 Nov 2025 02:28 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 08 Nov 2025 02:28 AM IST
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Crisis of DAP fertilizer stops sowing in fields, starts drying
अतरौली में खाद के लिए लगी किसानों की कतार।  संवाद  - फोटो : samvad
रबी सीजन किसान डीएपी खाद की कमी से जूझ रहे हैं। गेहूं और सरसों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खेतों में पलेवा सूखने लगा है। किसान दिनभर समितियों और केंद्रों पर लाइन में लगकर लौट रहे हैं, जिससे उनमें भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
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खैर तहसील क्षेत्र में लगभग 70,000 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की जाती है, जिसके लिए करीब 8,4000टन डीएपी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा सरसों, मटर व अन्य फसलों के लिए लगभग 1,6000 टन डीएपी की और जरूरत है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में डीएपी का स्टॉक लगभग शून्य है। खैर पूर्वी बहुउद्देशीय समिति पर मात्र 70 कट्टे स्टॉक था किन्तु दक्षिणी बहुउद्देशीय समिति एवं इफको केंद्रों पर पिछले कई दिनों से वितरण नहीं हो रहा है। इफ्को केंद्र पर करीब 10 दिन पूर्व डीएपी वितरित हुई थी, जबकि दक्षिणी समिति पर 1 नवंबर को आखिरी बार किसानों को खाद मिली थी। तब से दोनों केंद्रों पर स्टॉक समाप्त है। हालांकि एनपी और इफ्को ब्रांड की खाद कुछ केंद्रों पर उपलब्ध है, परंतु किसानों का विश्वास एनपी खाद पर नहीं बन पा रहा। अधिकांश किसान डीएपी को ही अपनी प्रमुख आवश्यकता मानते हैं।
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खाद मिलने में देरी से उपज पर भी पड़ेगा असर

सरकारी समितियों पर डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से मिलती है, वहीं खुले बाजार में यही खाद 1700 रुपये प्रति बोरी तक बेची जा रही है। बढ़े हुए दामों के कारण अधिकांश छोटे किसान बाजार से खाद खरीदने में असमर्थ है। डीएपी के अभाव में खेतों में पहले की गई पलेवा (सिंचाई के बाद की मिट्टी की तैयारी) अब सूखने लगी है। कई किसानों ने बताया कि अगर अगले कुछ दिनों में खाद की आपूर्ति नहीं हुई तो बुवाई का समय निकल जाएगा और उपज पर बुरा असर पड़ेगा।
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खैर में 20,000 टन से अधिक डीएपी की तत्काल जरूरत
किसानों का अनुमान है कि क्षेत्र में अब भी लगभग 20,000 टन से अधिक डीएपी की तत्काल आवश्यकता बनी हुई है, जबकि आपूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था अभी तक नहीं दिख रही। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि डीएपी की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित की जाए और वितरण की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसानों को बाजार की ऊंची कीमतों पर निर्भर न रहना पड़े।
अतरौली की सहकारी समितियों पर दस दिन से डीएपी नहीं
अतरौली क्षेत्र में 10 दिनों से किसी भी सहकारी समिति पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। किसान डीएपी के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। किसान नवीन चौधरी, वीरेंद्र सिंह, वीरपाल सिंह ने बताया कि परेवट कर चुके किसानों को तत्काल डीएपी की जरूरत है ताकि वह परेवट सूखने से बुवाई में देरी होगी। पीसीएफ केंद्र पर बृहस्पतिवार व शुक्रवार को खाद वितरण की सूचना पर भीड़ उमड़ पड़ी। अतरौली की उत्तरी व दक्षिणी समिति पर दस दिन से खाद नहीं है। यही हाल मलहपुर, बड़ेसरा, पालीमुकीमुपर समितियों का है।

नहल साेसाइटी पर एक माह से डीएपी नहीं
गांव जगतपुर के बनी सिंह, रामपुर के मुकेश भारती, खेड़िया के रामभान सिंह, खानपुर के पवन चौधरी ने बताया कि इस सोसाइटी से 19 गांव जुड़े हैं। तीन माह में इस सोसाइटी पर 26 सितंबर और 11 अक्टूवर को एक-एक गाड़ी डीएपी मिली थी। इसके बाद आज तक एक भी गाड़ी डीएपी नहीं आई। किसान समिति पर पहुंचते हैं तो सचिव आज कल में खाद की गाड़ी आने की कहकर टाल देते हैं।


-कालाबाजारी से 1700 का डीएपी लाया हूं। अभी चार कट्टे की और आवश्यकता है, समिति पर है नहीं। जगपाल, लक्ष्मण गढ़ी
-पांच दिन से समिति के चक्कर लगा रहा हूं रोज कल के लिए कह देते हैं, मुझे छह कट्टे की आवश्यकता है। श्रीनिवास शर्मा उसरम
-किसान मध्यवर्गी हैं डीएपी का अतिरिक्त मूल्य बड़ी समस्या है जल्द डीएपी उपलब्ध करानी चाहिए। चौधरी प्रवीण सिंह भाकियू नेता
- गेहूं की बुबाई के लिए डीएपी की आवश्यकता है। लेकिन सहकारी समितियाें पर खाद नहीं है।- नरेंद्र चौधरी
- प्रशासन गेहूं के लिए तत्काल डीएपी उपलब्ध कराए। खेतों की परेवट हो चुकी है।- रामवीर सिंह

- अन्य केंद्र पर जाते हैं तो कहा जाता है कि जहां के सदस्य हो वहीं से खाद मिलेगा। समितियों पर खाद नहीं है।- देवेंद्र सिंह

- डीएपी के लिए डिमांड देती है जल्द ही खाद मिलेगा। किसानों को खाद की समस्या नहीं होने दी जाएगी।- कंछी सिंह, सचिव
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