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रोहतक के लिए उपयोगी.....
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रोहतक/दिल्ली। देश के पहले एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उत्तर रेलवे को आड़े हाथों लिया है। एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के किनारे ध्वस्तीकरण के बाद मलबा पड़ा है, जिसे हटाया नहीं गया है। इसके साथ ही निर्माण सामग्री भी पड़ी हुई है। पर्यावरणीय नियमों के तहत मलबे का त्वरित निस्तारण होना चाहिए था, जिसमें उत्तरी रेलवे की ओर से लापरवाही बरती गई है।
सीपीसीबी ने उत्तर रेलवे से सख्त लहजे में कहा है कि रोहतक में नए बस अड्डे के पास बन रहे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के किनारे से सात दिनों में निर्माण सामग्री को हटाया जाए। इसके साथ ही ट्रैक के किनारे सुधार करने का निर्देश भी दिया गया है। यह भी आदेश दिया गया है कि मलबे का निस्तारण करने के बाद कार्रवाई की रिपोर्ट और दस्तावेज 10 दिन में उनके कार्यालय पर जमा कराएं। इतना ही नहीं सुझाव दिया है कि भविष्य में किसी भी तरह के कचरे और मलबे की डंपिंग के लिए उचित प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं, जिससे आम जन को पर्यावरण के पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव नहीं झेलने पड़े।
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सीपीसीबी ने उत्तर रेलवे से सख्त लहजे में कहा है कि रोहतक में नए बस अड्डे के पास बन रहे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के किनारे से सात दिनों में निर्माण सामग्री को हटाया जाए। इसके साथ ही ट्रैक के किनारे सुधार करने का निर्देश भी दिया गया है। यह भी आदेश दिया गया है कि मलबे का निस्तारण करने के बाद कार्रवाई की रिपोर्ट और दस्तावेज 10 दिन में उनके कार्यालय पर जमा कराएं। इतना ही नहीं सुझाव दिया है कि भविष्य में किसी भी तरह के कचरे और मलबे की डंपिंग के लिए उचित प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं, जिससे आम जन को पर्यावरण के पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव नहीं झेलने पड़े।
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