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भूषण स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर की गिरफ्तारी की चुनौती पर फैसला सुरक्षित
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:04 AM IST
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भूषण स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर की गिरफ्तारी की चुनौती पर फैसला सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भूषण स्टील लिमिटेड के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज सिंघल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पीठ इस मामले में 29 अगस्त को फैसला सुनाएगी।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ न्यायिक हिरासत में अंतरिम राहत देने को लेकर सुनवाई कर रही थी। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बहस के दौरान सीरियस फ्रॉड जांच अधिकारी (एसएफआइओ) ने नीरज सिंघल को अंतरिम राहत देने का विरोध किया। एसएफआइओ ने कहा कि याची राहत दिए जाने के योग्य नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि प्राथमिक तौर पर देखें तो चुनौती याचिका में कुछ गलत नहीं है। पीठ ने कहा कि वह अपना फैसला 29 अगस्त को सुनाएगी।
अभियोजन पक्ष से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर आचार्य ने अंतरिम राहत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर पूर्व में भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी को रिश्वत देने का आरोप है। मामला निचली अदालत में चल रहा है। वहीं, बचाव पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मामले में सीबीआई अदालत ने वर्ष 2014 में जमानत दे दी है। वहीं, एएसजी ने कहा कि आरोपित साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नीरज सिंघल के पिता भी पूर्व में रिश्वत के मामले में आरोपित रह चुके हैं। एसएफआईओ द्वारा की गई गिरफ्तारी का यह पहला मामला है। नीरज सिंघल पर आरोप है कि 80 अलग-अलग फर्मो का उपयोग करते हुए भूषण स्टील के बैंक ऋण से 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भूषण स्टील लिमिटेड के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज सिंघल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। पीठ इस मामले में 29 अगस्त को फैसला सुनाएगी।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ न्यायिक हिरासत में अंतरिम राहत देने को लेकर सुनवाई कर रही थी। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बहस के दौरान सीरियस फ्रॉड जांच अधिकारी (एसएफआइओ) ने नीरज सिंघल को अंतरिम राहत देने का विरोध किया। एसएफआइओ ने कहा कि याची राहत दिए जाने के योग्य नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि प्राथमिक तौर पर देखें तो चुनौती याचिका में कुछ गलत नहीं है। पीठ ने कहा कि वह अपना फैसला 29 अगस्त को सुनाएगी।
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अभियोजन पक्ष से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर आचार्य ने अंतरिम राहत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर पूर्व में भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी को रिश्वत देने का आरोप है। मामला निचली अदालत में चल रहा है। वहीं, बचाव पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मामले में सीबीआई अदालत ने वर्ष 2014 में जमानत दे दी है। वहीं, एएसजी ने कहा कि आरोपित साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नीरज सिंघल के पिता भी पूर्व में रिश्वत के मामले में आरोपित रह चुके हैं। एसएफआईओ द्वारा की गई गिरफ्तारी का यह पहला मामला है। नीरज सिंघल पर आरोप है कि 80 अलग-अलग फर्मो का उपयोग करते हुए भूषण स्टील के बैंक ऋण से 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है।
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