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अदालत ने सैफी व उमर को हथकड़ी लगाने की अनुमति देने से किया इनकार
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नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली पुलिस के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें दिल्ली दंगों के आरोपियों खालिद सैफी और उमर खालिद को हथकड़ी लगाकर पेश करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने न केवल आवेदन खारिज किया बल्कि संबंधी डीसीपी से ऐसा आवेदन दायर किए जाने पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। मामले की सुनवाई छह मई को तय की गई है।
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि ये आवेदन कड़कड़डूमा लॉकअप प्रभारी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा इस मुद्दे पर विचार करने के बाद दायर किया था।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के समक्ष ये आवेदन सुनवाई के लिए आया। इसमें दोनों आरोपियों को पीछे से दोनों हाथों में हथकड़ियां लगाकर पेश करने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने विशेष लोक अभियोजक मनोज चौधरी से हाई रिस्क कैदी का मतलब पूछा। कोर्ट ने ये भी पूछा कि ये जेल नियमावली, पंजाब पुलिस रूल्स और दिल्ली पुलिस के सर्कुलर में से किसमें परिभाषित है।
इस पर मनोज चौधरी ने कहा कि उन्हें इस आवेदन के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए वे इस मुद्दे पर निर्देश नहीं ले सके। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया उनके समक्ष विचाराधीन मामले में दोनों आरोपी जमानत पर हैं। एक अन्य मामला अन्य जज के समक्ष चल रहा है। कोर्ट ने इस बात को माना कि आरोपियों के इस कोर्ट से जमानत पर होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को रही होगी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यादव ने कहा कि इस आवेदन में ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे विवश होकर पुलिस अधिकारियों को ये आवेदन दायर करना पड़ा। अदालत ने इस मामले में थर्ड बटालियन दिल्ली सशस्त्र पुलिस तथा केस की जांच कर रहे स्पेशल सेल के डीसीपी को ये आवेदन पर स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं जेल अधीक्षक से भी रिपोर्ट तलब की गई है।
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अदालत ने इस बात पर गौर किया कि ये आवेदन कड़कड़डूमा लॉकअप प्रभारी ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा इस मुद्दे पर विचार करने के बाद दायर किया था।
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के समक्ष ये आवेदन सुनवाई के लिए आया। इसमें दोनों आरोपियों को पीछे से दोनों हाथों में हथकड़ियां लगाकर पेश करने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने विशेष लोक अभियोजक मनोज चौधरी से हाई रिस्क कैदी का मतलब पूछा। कोर्ट ने ये भी पूछा कि ये जेल नियमावली, पंजाब पुलिस रूल्स और दिल्ली पुलिस के सर्कुलर में से किसमें परिभाषित है।
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इस पर मनोज चौधरी ने कहा कि उन्हें इस आवेदन के बारे में जानकारी नहीं है। इसलिए वे इस मुद्दे पर निर्देश नहीं ले सके। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया उनके समक्ष विचाराधीन मामले में दोनों आरोपी जमानत पर हैं। एक अन्य मामला अन्य जज के समक्ष चल रहा है। कोर्ट ने इस बात को माना कि आरोपियों के इस कोर्ट से जमानत पर होने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को रही होगी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यादव ने कहा कि इस आवेदन में ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे विवश होकर पुलिस अधिकारियों को ये आवेदन दायर करना पड़ा। अदालत ने इस मामले में थर्ड बटालियन दिल्ली सशस्त्र पुलिस तथा केस की जांच कर रहे स्पेशल सेल के डीसीपी को ये आवेदन पर स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया है। वहीं जेल अधीक्षक से भी रिपोर्ट तलब की गई है।