{"_id":"5f10a6948ebc3e63b05e7903","slug":"court-refuses-to-direct-delhi-police-fir-against-ramdev-noida-news-noi5238244174","type":"story","status":"publish","title_hn":"अदालत ने बाबा रामदेव पर एफआईआर का आदेश देने से किया इंकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अदालत ने बाबा रामदेव पर एफआईआर का आदेश देने से किया इंकार
विज्ञापन
नई दिल्ली। अदालत ने योग गुरू बाबा रामदेव पर एफआईआर का आदेश देने से बृहस्पतिवार को इंकार कर दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि इस मामले में पहले से थाना ज्योति नगर जयपुर में एफआईआर दर्ज है। अदालत में याचिका दायर कर कहा गया था कि प्रेस वार्ता में कोरोनिल को कोरोना उपचार की दवा बताकर झूठा प्रचार किया गया। इसलिए बाबा रामदेव तथा अन्य लोगों पर एफआईआर का निर्देश दिया जाए।
पटियाला हाउस अदालत के एमएम सुमित आनंद ने दिल्ली पुलिस की उस स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया जिसमें कहा गया था कि इस मामले में धोखाधड़ी की धाराओं में जयपुर में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच चल रही है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि आयुष मंत्रालय ने कोरोनिल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा के रूप में बिक्री की अनुमति दी थी। इस संबंध में शिकायत होने पर वह मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए।
थाना वसंत विहार पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोनिल को कोरोना की दवा बताकर प्रचारित किया गया था, वह उत्तराखंड के हरिद्वार में हुई थी। इस तरह यह घटना उसके क्षेत्राधिकार से बाहर है। अदालत ने इन तथ्यों पर विचार करने के बाद एफआईआर की मांग खारिज कर दी क्योंकि एक मामले में आरोपी पर कई राज्यों में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती।
विज्ञापन
मामले में शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार आनंद ने दावा किया था कि उन्हें केवल रोग प्रतिरोधी दवा बनाने की अनुमति मिली थी लेकिन बाबा रामदेव ने इसे कोरोना की दवा के रूप में प्रचारित किया था। यह लोगों के साथ धोखा है। इसलिए बाबा रामदेव तथा अन्य लोगों पर धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया जाए।
विज्ञापन
पटियाला हाउस अदालत के एमएम सुमित आनंद ने दिल्ली पुलिस की उस स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया जिसमें कहा गया था कि इस मामले में धोखाधड़ी की धाराओं में जयपुर में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच चल रही है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि आयुष मंत्रालय ने कोरोनिल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा के रूप में बिक्री की अनुमति दी थी। इस संबंध में शिकायत होने पर वह मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए।
विज्ञापन
थाना वसंत विहार पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोनिल को कोरोना की दवा बताकर प्रचारित किया गया था, वह उत्तराखंड के हरिद्वार में हुई थी। इस तरह यह घटना उसके क्षेत्राधिकार से बाहर है। अदालत ने इन तथ्यों पर विचार करने के बाद एफआईआर की मांग खारिज कर दी क्योंकि एक मामले में आरोपी पर कई राज्यों में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती।
विज्ञापन
मामले में शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार आनंद ने दावा किया था कि उन्हें केवल रोग प्रतिरोधी दवा बनाने की अनुमति मिली थी लेकिन बाबा रामदेव ने इसे कोरोना की दवा के रूप में प्रचारित किया था। यह लोगों के साथ धोखा है। इसलिए बाबा रामदेव तथा अन्य लोगों पर धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया जाए।