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अदालत ने वकील पर लगे फर्जीवाड़े के आरोपों की जंाच का दिया निर्देश

Sun, 23 Aug 2020 01:03 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2020 01:03 AM IST
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court directs police to investigate the forgery allegation against the lawyer
नई दिल्ली। अदालत ने दिल्ली दंगा मामले में एक वकील पर फर्जी दस्तावेज बनाने तथा एक शख्स को झूठी गवाही के लिए उकसाने के आरोपों की आगे जांच का पुलिस को निर्देश दिया है। दिल्ली दंगा मामले में कई आरोपियों तथा पीड़ितों की ओर से पैरवी कर रहे वकील मेहमूद प्राचा पर यह आरोप लगाया है।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि इन आरोपों की जांच अपराध शाखा अथवा स्पेशल सेल से करवाना उचित रहेगा। अदालत ने इस बात पुलिस आयुक्त को उचित आदेश जारी करने के लिए कहा है।
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मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि एक मामले में शिकायतकर्ता इरशाद अली 12 अगस्त को गोकुलपुरी के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश हुआ था। दयालपुर स्थित उसकी दुकान में दंगाइयों ने कथित तौर आगजनी तथा लूटपाट की थी।
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पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच के दौरान अली से उसकी शिकायत में दिए गए आरोपियों दीपक, नवनीत तथा मिंटू के बारे पूछताछ की गई। उसने बताया कि वह आरोपियों के नाम के अलावा उनके बारे में कुछ नहीं जानता। उसने यह बताया कि उसने वीडियो में आरोपियों की पहचान नहीं की थी।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार अली का आरोप है कि उसे वकील मेहमूद प्राचा ने अपने कार्यालय में बुलाया था। प्राचा ने उससे कहा था कि उनके पास उसके जैसा ही एक अन्य मामला है जिसमें चश्मदीद गवाह भी है जिसने 24 व 25 फरवरी को पूरा मामला देखा था। प्राचा ने अली से कहा कि अगर एक अन्य शख्स शरीफ के मामले को भी उसकी शिकायत मिला लिया जाए तो उसका केस मजबूत होगा क्योंकि केस में चश्मदीद गवाह है। अली ने यह भी कहा कि वह कभी न चश्मदीद और न कभी शरीफ से मिला।
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इन मामलों का चश्मदीद गवाह खुद दंगा मामले में आरोप है और फरार है। इसके अलावा जो हलफनामा अली से दिलवाया गया वह उस वकील की मुहर से सत्यापित है जिसकी 2017 में मौत हो चुकी है।
उसकी पत्नी ने बताया कि वकील के मौत के बाद उसकी मुहर से सत्यापित किसी दस्तावेज की उसे जानकारी नहीं है। जिस शख्स की 2017 में मौत हो चुकी है, वह 2020 में हलफनामा कैसे सत्यापित कर सकता है।

इस मामले की प्रारंभिक पड़ताल डीसीपी नॉर्थ ईस्ट के आदेश पर एसीपी गोकुलपुरी तथा एसएचओ थाना दयालपुर ने की थी। इस मामले की जांच अपराध शाखा अथवा स्पेशल सेल से करवाना उचित होगा।
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