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Noida News: सचिवालय तक नहीं पहुंच सके निगम कर्मी, आंदोलन की चेतावनी
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सीएम से मुलाकात न होने पर कर्मचारी निराश, एमसीडी व भाजपा को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
एमसीडी डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) और सीएफडब्ल्यू कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर बुधवार को राजघाट से दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकालने की कोशिश में असफल रहे। पुलिस ने उन्हें राजघाट पर ही रोक दिया और प्रशासनिक बाधाओं के कारण मार्च आगे नहीं बढ़ सका। पुलिस की पहल के बावजूद उनके प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात भी नहीं हो सकी। इस कारण कर्मचारियों में गहरी निराशा और आक्रोश देखा गया। उन्होंने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
धरने पर लौटकर यूनियन और कर्मचारियों ने एमसीडी प्रशासन व भाजपा पर हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित एमसीडी उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। उनकी समस्याओं पर जानबूझकर चुप्पी साध रखी है। डीबीसी और सीएफडब्ल्यू कर्मचारियों की मांगें तीन दशक पुरानी हैं। समान वेतन, मेडिकल लीव, अनुकंपा नियुक्ति और स्थायीकरण जैसी मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए और बैठकें हुईं लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। कर्मचारियों ने कहा कि भाजपा नेता सिर्फ चुनाव के समय उन्हें याद करते हैं जबकि बाकी समय उनके संघर्ष को नजरअंदाज किया जाता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
एमसीडी डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) और सीएफडब्ल्यू कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर बुधवार को राजघाट से दिल्ली सचिवालय तक मार्च निकालने की कोशिश में असफल रहे। पुलिस ने उन्हें राजघाट पर ही रोक दिया और प्रशासनिक बाधाओं के कारण मार्च आगे नहीं बढ़ सका। पुलिस की पहल के बावजूद उनके प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात भी नहीं हो सकी। इस कारण कर्मचारियों में गहरी निराशा और आक्रोश देखा गया। उन्होंने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
धरने पर लौटकर यूनियन और कर्मचारियों ने एमसीडी प्रशासन व भाजपा पर हमलावर रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित एमसीडी उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रही है। उनकी समस्याओं पर जानबूझकर चुप्पी साध रखी है। डीबीसी और सीएफडब्ल्यू कर्मचारियों की मांगें तीन दशक पुरानी हैं। समान वेतन, मेडिकल लीव, अनुकंपा नियुक्ति और स्थायीकरण जैसी मांगों को लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए और बैठकें हुईं लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। कर्मचारियों ने कहा कि भाजपा नेता सिर्फ चुनाव के समय उन्हें याद करते हैं जबकि बाकी समय उनके संघर्ष को नजरअंदाज किया जाता है।
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