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कोरोना ने कई बच्चों से छीने माता-पिता, अब तीसरी लहर का खतरा

Thu, 20 May 2021 01:01 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 01:01 AM IST
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Corona snatches parents from many children, now threatens third wave
नोएडा। जिले में कोरोना की दूसरी लहर ने कई मासूमों को अनाथ बना कर दिया है। हाल ही में बाल कल्याण विभाग के पास 9 मामले आए हैं, जिसमें 5 बच्चों ने मां या पिता में से एक और 4 बच्चों ने मां-पिता दोनों को खो दिया है। कुछ बच्चे दादा-दादी और मामा-मांमी के पास रह रहे हैं। अब विभाग का कहना है कि इनकी पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षा विभाग से संपर्क किया जा रहा है। साथ ही, अगर ऐसे बच्चों के लिए सरकार कोई योजना लेकर आती है तो उसका लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा अब तीसरी लहर का खतरा भी मंडराने लगा है। इसे देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं।
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प्रोबेशन अधिकारी अतुल सोनी ने बताया कि कोविड कंट्रोल रूम में 9 कॉल आई है। इसमें चार बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने मां-बाप दोनों को खो दिया है। दो बच्चे नोएडा और दो ग्रेटर नोएडा में रहते हैं। इसमें नोएडा रहने वाले बच्चों की उम्र 11 और 15 साल की है। जबकि ग्रेटर नोएडा में रहने वाले बच्चों की उम्र 7 और 8 साल है। इन बच्चों की दादा-दादी और मामा-मामी देखभाल कर रहे हैं। इसके अलावा 5 बच्चों ने मां या पिता में से एक को खो दिया है। इसमें से एक महिला पति की मौत होने पर दोनों बच्चों को लेकर बिहार चली गई है। एक मां बच्चे को लेकर दिल्ली चली गई हैं।
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इनके पति जिले में काम करते थे। परिवारों से बात की गई है। अगर कोई परिवार गरीब है तो मदद के लिए आवेदन कर सकता है। इन्हें राशन के लिए 2 हजार रुपये और पढ़ाई के लिए 2 हजार रुपये महीना दिया जाएगा। इसके लिए शासन से बजट पास कराया जाएगा। साथ ही, पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षा विभाग से भी संपर्क किया जाएगा। अगर कोई बच्चा पहले से निजी स्कूल में पढ़ता है तो उसका दाखिला उसी स्कूल में आरटीई के तहत करा दिया जाएगा। इसके अलावा सरकार की कोई योजना आती है तो उनका भी लाभ इन बच्चों को दिया जाएगा।
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रेस्क्यू और शेल्टर होम के लिए भी बढ़ी कॉल
एफएक्सबी इंडिया सुरक्षा के प्रोग्राम मैनेजर लाइन ने बताया कि इस दौरान बहुत से बच्चों के मां-पिता पॉजिटिव हो रहे हैं, बच्चे घर में अकेले हैं। ऐसे बच्चों की मदद के लिए पुलिस के साथ मिलकर हेल्पलाइन नंबर 9870395200 जारी किया गया है। इस पर फोन करके 70 से ज्यादा वॉलेटियर जुड़ चुके हैं। हम ऐसे बच्चों की मदद कर रहे हैं। इसके अलावा अप्रैल में रेस्क्यू के लिए 21 कॉल आई थीं और 4 को शेल्टर होम के लिए कॉल आई हैं, जबकि पिछले वर्ष अप्रैल में रेस्क्यू के लिए 8 के लिए कॉल आई थीं। कोरोना संक्रमण की पहली लहर में तक 25 शेल्टर होम के लिए और 196 रेस्क्यू के कॉल आई थी। इस साल अप्रैल तक 9 शेल्टर होम और 124 रेस्क्यू के लिए कॉल आई हैं। ये अधिकतर कॉल ग्रामीण क्षेत्रों से आई हैं। नाबालिग बच्चे फैक्ट्री या घर में काम करते हैं, उनको रेस्क्यू कराने के लिए कॉल आती है। वहीं, शेल्टर के लिए उनकी कॉल आती है, जिनके पास रहने के लिए घर नहीं होता है।
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