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एनसीआर में CBI रेड: नोएडा-ग्रेनो समेत 47 जगहों पर छापा, बड़े बिल्डरों के नाम; होमबायर्स से धोखाधड़ी का मामला

Wed, 30 Jul 2025 07:35 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 30 Jul 2025 07:35 PM IST
सार

एनसीआर में फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने नोएडा-ग्रेनो समेत 47 जगहों पर छापा मारा है। यह कार्रवाई एक सबवेंशन स्कीम घोटाला मामले में की है।

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CBI raids 47 places including Noida-Greater Noida
अयोध्या में पड़ी सीबीआई रेड। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एनसीआर में घर खरीदारों के साथ ठगी को लेकर बैंकों और रियल एस्टेट कंपनियों के बीच सांठगांठ को लेकर 22 मामले दर्ज किए हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सीबीआई को विभिन्न बिल्डरों और बैंकों के खिलाफ की गई छह प्रारंभिक जांच को प्राथमिकी में तब्दील करने की अनुमति दे दी। जांच के दायरे में एनसीआर के बिल्डर और उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा के विकास प्राधिकरण भी शामिल हैं।

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इनके खिलाफ एफआईआर
जांच एजंसी के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में पूरे एनसीआर में 47 ठिकानों पर छापा मारा गया। छापे के दौरान कुछ डिजिटल साक्ष्य और गैरकानूनी दस्तावेज मिले हैं। सीबीआई की अलग-अलग एफआईआर में जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लि., जयप्रकाश एसोशिएट लि., जेपी इंफ्राटेक लि., अजनारा इंडिया लि., वाटिका लि. सुपरटेक और आइडिया बिल्डरों समेत अन्य कंपनियों के नाम हैं। इसके अलावा एफआईआर में एसबीआई, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनांस लि., पीरामल फाइनांस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कैपिटल हाउसिंग फाइनांस और पीएनबी हाउसिंग फाइनांस जैसे बैंक और वित्तीय संस्थानों के नाम हैं। इस मामले में आर्थिक सहायता योजना के तहत, बैंक स्वीकृत राशि सीधे बिल्डरों के खातों में जमा करते हैं, जिन्हें इस ऋण राशि पर ईएमआई का भुगतान करना होता है जब तक कि फ्लैट घर खरीदारों को नहीं सौंप दिए जाते। बिल्डर जब बैंकों को किस्त का भुगतान नहीं किया तो त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार, बैंकों ने घर खरीदारों से ईएमआई जमा करने को कहा।
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पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, 1,000 से अधिक व्यक्तियों की जांच करने एवं 58 परियोजना स्थलों का दौरा करके मामले को अपने हाथ में लेने के लिए सीबीआई के प्रयासों की सराहना की तथा उसे शीघ्र जांच पूरी करने और मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई द्वारा दर्ज सातवीं प्रारंभिक जांच, जो सुपरटेक लिमिटेड को छोड़कर विभिन्न बिल्डरों की परियोजनाओं से संबंधित है और एनसीआर क्षेत्र से बाहर मुंबई, बंगलूरू, कोलकाता, मोहाली एवं इलाहाबाद में हैं, अब भी जारी है।
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घर खरीदारों ने कब्जा न मिलने के बावजूद ईएमआई भरने का लगाया था आरोप
अदालत 1,200 से अधिक घर खरीदारों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में विभिन्न आवास परियोजनाओं में सब्सिडी योजनाओं के तहत फ्लैट बुक किए थे। उनका आरोप है कि फ्लैटों पर कब्जा न होने के बावजूद बैंकों द्वारा उन पर ईएमआई का भुगतान करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। शीर्ष अदालत ने 29 मार्च को सीबीआई को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, यमुना एक्सप्रेसवे और गाजियाबाद में बिल्डरों और परियोजनाओं के मामलों में पांच प्रारंभिक जांच दर्ज करने की अनुमति दी थी। इसने रियलिटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के खिलाफ एक प्रारंभिक जांच दर्ज करने की अनुमति दी थी, जिसके खिलाफ 799 घर खरीदारों ने आठ अलग-अलग शहरों में परियोजनाओं से जुड़ी 84 अपीलों के माध्यम से शीर्ष अदालत का रुख किया था।


सीबीआई को नियमित मामले दर्ज करने और जांच में आगे बढ़ने को कहा
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों की ओर से संज्ञेय अपराध होने का पता लगाने के लिए मामलों की प्रारंभिक जांच के बाद, आगे की जांच के लिए 22 नियमित मामले दर्ज करना आवश्यक है। पीठ ने सुझावों को स्वीकार करते हुए सीबीआई को नियमित मामले दर्ज करने और कानून के अनुसार आगे बढ़ने को कहा। पीठ ने एनसीआर के बाहर की परियोजनाओं पर सातवीं प्रारंभिक जांच के लिए एजेंसी को छह सप्ताह का समय दिया। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि वह सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट के कुछ हिस्से न्यायमित्र राजीव जैन को आवश्यक समझे जाने पर साझा करें। कोर्ट ने सीबीआई को न्यायमित्र द्वारा दाखिल रिपोर्ट की जांच करने को कहा और इसे आंखें खोलने वाली बताया। इस रिपोर्ट में रेरा सहित विकास प्राधिकरणों के लेन-देन में पारदर्शिता की आवश्यकता और बेईमान बिल्डरों से घर खरीदारों के हितों की रक्षा के उपायों को रेखांकित किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 10 से 15 दिनों में होगी। शीर्ष अदालत ने 29 अप्रैल को सीबीआई को सुपरटेक लिमिटेड सहित एनसीआर के अन्य बिल्डरों के खिलाफ सात प्रारंभिक जांच दर्ज करने का निर्देश दिया था।

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