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ट्विन टावर की ऊंचाई बढ़ाने से खरीदारों को हुआ था नुकसान
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नोएडा। सेक्टर-93ए स्थित एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर की ऊंचाई बढ़ने से एमराल्ड कोर्ट के अन्य फ्लैट खरीदारों को नुकसान हुआ था। यह नुकसान जमीन में अंशधारिता यानी हिस्सेदारी का था। इस मामले में खरीदारों से बिना पूछे ही बिल्डर ने ट्विन टावर की ऊंचाई बढ़ा दी। इससे बाकी फ्लैट खरीदारों की जमीन में अंशधारिता कम हो गई थी।
दरअसल, किसी भी प्रोजेक्ट में जब पहले से तय ऊंचाई के अलावा बाद में और ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है तो पहले के फ्लैट खरीदारों से अनुमति लेनी होती है। अगर खरीदार तैयार नहीं होते तो बिल्डर को यह फैसला बदलना पड़ सकता है, लेकिन ट्विन टावर के मामले में बिल्डर ने पहले के फ्लैट खरीदारों से इस बारे में नहीं पूछा। फ्लैट खरीदारों की यह सबसे बड़ी आपत्ति थी। यही वजह है कि कोर्ट में उनका तर्क सही साबित हुआ और बिल्डर के खिलाफ मामला चला गया।
ऐसे हुआ था नुकसान
सेक्टर-93ए के प्लॉट नंबर-4 में 23 नवंबर 2004 को 48,263 वर्गमीटर जमीन का आवंटन हुआ। इसके बाद 21 जून 2006 को अतिरिक्त 6556.51 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया। इसे एमराल्ड कोर्ट नाम मिला। यहां पहले टावर-1 से 16 के अलावा एक कॉमर्शियल कांप्लेक्स बनाने की योजना बनाई गई थी। बाद में दूसरे और तीसरे रिवाइज्ड प्लान के साथ टावर-17 के अलावा एफएआर खरीदकर टावर की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला कर लिया गया। अब पहले के प्लान के तहत केवल भूतल के साथ 11 तल बनाने की योजना थी।
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लिहाजा, इस प्लान के साथ खरीदारों की अंशधारिता तय हो गई। इसी तरीके से 15 टावरों की रजिस्ट्री भी हुई, लेकिन बाद में दूसरे अन्य टावर बनाने के अलावा ऊंचाई बढ़ाने से खरीदारों की संख्या बढ़ी और पहले के खरीदारों की अंशधारिता घट गई। इस वजह से खरीदारों ने इसका विरोध कर दिया और मामला कोर्ट में चला गया। इसमें निर्माण पर भी सवाल उठाए गए और निर्माण के दौरान नियम तोड़ने के आरोप लगाए गए।
यह होती है अंशधारिता
किसी भी प्रोजेक्ट में जब निर्माण की योजना बनाई जाती है तो पहले से ही यह निर्धारित होता है कि यहां कितने फ्लैट बनेंगे। इस आधार पर जमीन के कुल क्षेत्रफल के अनुपात में कुल फ्लैट खरीदारों की जमीन में भी अंशधारिता निर्धारित होती है यानी उक्त जमीन में भी उनकी हिस्सेदारी होती है। यह रजिस्ट्री के समय अंकित होता है। उदाहरण के तौर पर 50 हजार वर्गमीटर के प्लॉट में 10 टावर और 5,000 फ्लैट बनाने हैं तो सभी फ्लैट खरीदारों का जमीन में हिस्सा 10 वर्गमीटर का होगा। इस जमीन का मूल्य भी निर्धारित किया जाता है। माना यह जाता है कि अगर भविष्य में इमारत को गिराया जाता है तो सभी का जमीन में इतना हिस्सा होगा।
ट्विन टावर गिराने के लिए सोमवार को मंथन
सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर गिराने के मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसमें सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीबीआरआई), कमेटी के पदाधिकारी, आरडब्ल्यूए, प्राधिकरण और बिल्डर के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। बैठक में ट्विन टावर गिराने पर मंथन होगा। बैठक में एक तय योजना को अंतिम रुप देने का काम होगा। ट्विन टावर के बगल में दूसरे अन्य टावर भी हैं। लिहाजा, टावर गिराने के दौरान किसी तरह का हादसा न हो इसलिए इस मामले को बेहद सुरक्षित तरीके से अमलीजामा पहनाने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि सीबीआरआई समेत दूसरी अन्य एजेंसियां और प्राधिकरण इसमें किसी तरह की चूक नहीं चाहते। इस मामले में सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
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दरअसल, किसी भी प्रोजेक्ट में जब पहले से तय ऊंचाई के अलावा बाद में और ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है तो पहले के फ्लैट खरीदारों से अनुमति लेनी होती है। अगर खरीदार तैयार नहीं होते तो बिल्डर को यह फैसला बदलना पड़ सकता है, लेकिन ट्विन टावर के मामले में बिल्डर ने पहले के फ्लैट खरीदारों से इस बारे में नहीं पूछा। फ्लैट खरीदारों की यह सबसे बड़ी आपत्ति थी। यही वजह है कि कोर्ट में उनका तर्क सही साबित हुआ और बिल्डर के खिलाफ मामला चला गया।
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ऐसे हुआ था नुकसान
सेक्टर-93ए के प्लॉट नंबर-4 में 23 नवंबर 2004 को 48,263 वर्गमीटर जमीन का आवंटन हुआ। इसके बाद 21 जून 2006 को अतिरिक्त 6556.51 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया। इसे एमराल्ड कोर्ट नाम मिला। यहां पहले टावर-1 से 16 के अलावा एक कॉमर्शियल कांप्लेक्स बनाने की योजना बनाई गई थी। बाद में दूसरे और तीसरे रिवाइज्ड प्लान के साथ टावर-17 के अलावा एफएआर खरीदकर टावर की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला कर लिया गया। अब पहले के प्लान के तहत केवल भूतल के साथ 11 तल बनाने की योजना थी।
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लिहाजा, इस प्लान के साथ खरीदारों की अंशधारिता तय हो गई। इसी तरीके से 15 टावरों की रजिस्ट्री भी हुई, लेकिन बाद में दूसरे अन्य टावर बनाने के अलावा ऊंचाई बढ़ाने से खरीदारों की संख्या बढ़ी और पहले के खरीदारों की अंशधारिता घट गई। इस वजह से खरीदारों ने इसका विरोध कर दिया और मामला कोर्ट में चला गया। इसमें निर्माण पर भी सवाल उठाए गए और निर्माण के दौरान नियम तोड़ने के आरोप लगाए गए।
यह होती है अंशधारिता
किसी भी प्रोजेक्ट में जब निर्माण की योजना बनाई जाती है तो पहले से ही यह निर्धारित होता है कि यहां कितने फ्लैट बनेंगे। इस आधार पर जमीन के कुल क्षेत्रफल के अनुपात में कुल फ्लैट खरीदारों की जमीन में भी अंशधारिता निर्धारित होती है यानी उक्त जमीन में भी उनकी हिस्सेदारी होती है। यह रजिस्ट्री के समय अंकित होता है। उदाहरण के तौर पर 50 हजार वर्गमीटर के प्लॉट में 10 टावर और 5,000 फ्लैट बनाने हैं तो सभी फ्लैट खरीदारों का जमीन में हिस्सा 10 वर्गमीटर का होगा। इस जमीन का मूल्य भी निर्धारित किया जाता है। माना यह जाता है कि अगर भविष्य में इमारत को गिराया जाता है तो सभी का जमीन में इतना हिस्सा होगा।
ट्विन टावर गिराने के लिए सोमवार को मंथन
सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर गिराने के मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसमें सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीबीआरआई), कमेटी के पदाधिकारी, आरडब्ल्यूए, प्राधिकरण और बिल्डर के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। बैठक में ट्विन टावर गिराने पर मंथन होगा। बैठक में एक तय योजना को अंतिम रुप देने का काम होगा। ट्विन टावर के बगल में दूसरे अन्य टावर भी हैं। लिहाजा, टावर गिराने के दौरान किसी तरह का हादसा न हो इसलिए इस मामले को बेहद सुरक्षित तरीके से अमलीजामा पहनाने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि सीबीआरआई समेत दूसरी अन्य एजेंसियां और प्राधिकरण इसमें किसी तरह की चूक नहीं चाहते। इस मामले में सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।