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Noida News: अरण्या सोसाइटी के फंड डायवर्जन में फंसा बिल्डर, 100 करोड़ कीं संपत्तियां अटैच
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- ईडी कर रही सेक्टर-119 द अरण्या सोसाइटी को लेकर उन्नति फॉर्च्यून बिल्डर समूह की जांच
- 16 अप्रैल को ईडी ने समूह के प्रमोटर के कई ठिकानों पर छापा मारकर किया था गिरफ्तार
522.9 करोड़ रुपये जुटाए थे बिल्डर ने खरीदारों से
1155 फ्लैट बनाए जाने थे प्रोजेक्ट में
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्नति फॉर्च्यून समूह की 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। ईडी सेक्टर-119 स्थित द अरण्या सोसाइटी में फ्लैट खरीदारों की रकम के डायवर्जन की जांच कर रही है। बिल्डर ने खरीदारों से ली गई रकम का इस्तेमाल निर्माण कार्य में नहीं कर फंड डायवर्ट कर दिए थे।
अब तक की जांच में परियोजना में 126.5 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन की बात सामने आई है। यह फंड डायवर्जन वर्ष 2011 से लेकर वर्ष 2019 के बीच बिल्डर समूह की तरफ से किया गया। इस वजह से मौके पर फ्लैट समेत अन्य निर्माण कार्य अधूरे रहे। यही नहीं बिल्डर ने प्राधिकरण का बकाया भी जमा नहीं किया। इससे प्रोजेक्ट में जो फ्लैट बने उनमें से अधिकतर खरीदारों की रजिस्ट्री भी नहीं हो पाई। अब बिल्डर की संपत्तियां अटैच होने के बाद परियोजना के फ्लैट खरीदारों के लिए हल निकलने की उम्मीद जगी है।
ईडी ने उन्नति फॉर्च्यून ग्रुप के प्रमोटर अनिल मिठास को 16 अप्रैल को कई ठिकानों पर छापा मारने के बाद गिरफ्तार किया था। अनिल मिठास अभी न्यायिक हिरासत में है। ईडी की जांच में इस परियोजना में किया गया फंड डायवर्जन साफ तौर पर उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदारों से 522.9 करोड़ रुपये परियोजना में जुटाए गए। इस राशि में ज्यादातर हिस्सा बिल्डर ने परियोजना में न लगाकर शेयर मार्केट में निवेश किया। इसके अलावा बांड खरीदने, लोन और निर्माण सामग्री के अग्रिम भुगतान, सिक्योरिटी के नाम पर राशि निकाली गई। इससे परियोजना के तहत निधार्रित काम नहीं हो पाए। यूपी रेरा की तरफ से मामले में पहले कराए गए ऑडिट में 107 करोड़ रुपये का डायवर्जन मिला था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय पूर्व में इस बिल्डर समूह की जांच में 25 करोड़ 94 लाख रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया था।
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नोएडा प्राधिकरण का 200 करोड़ रुपये ज्यादा का बकाया
द अरण्या सोसाइटी के 2,594 वर्गमीटर का प्लॉट नोएडा प्राधिकरण से आईवीआरसीएल इंफ्रा एंड प्रोजेक्ट लिमेटेड के नाम पर आवंटित हुआ था। बगैर प्लॉट अपने नाम करवाए करार के आधार पर उन्नति फॉर्च्यून ग्रुप ने यहां पर परियोजना लांच की थी। इस पर दो बार 8 अक्तूबर 2007 व 7 मार्च 2013 में कुल 1155 फ्लैटों व 70 विला का नक्शा पास करवाया गया। विला बनाए गए या नहीं इसकी सूचना प्राधिकरण को नहीं दी गई। जमीन पर 200 करोड़ का बकाया था।
फ्लैट खरीदारों की शिकायत पर हो रही ईडी की जांच
ईडी की द अरण्या सोसाइटी को लेकर जांच फ्लैट खरीदारों की शिकायतों पर हो रही है। खरीदारों ने थाना पुलिस से लेकर आर्थिक अपराध शाखा तक में केस दर्ज कराए थे। फेज-3 थाने में भी केस दर्ज हुआ था। दर्ज कराए गए केस में बिल्डर पर एक फ्लैट अलग-अलग खरीदारों को बेचने के भी आरोप लगाए गए थे। इस शिकायत के मद्देनजर अलग से रिकॉर्ड तैयार कराया जा रहा है। ईडी जांच का दायरा और बढ़ रहा है।
कई परियोजनाओं में चल रही है ईडी और सीबीआई की जांच
ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां नोएडा की गई सोसाइटियों में हुए हेरफेर को खंगाल रही हैं। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में तीन लीड मेंबर बिल्डर समूह के खिलाफ केस दर्ज कर जांच सीबीआई कर रही है। सबवेंशन स्कीम में हुए फ्रॉड में 8 बिल्डरों के खिलाफ 10 परियोजनाओं में सीबीआई एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है। सेक्टर-107 लोटस-300 सोसाइटी में फंड डायवर्जन की जांच लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। स्पोर्ट्स सिटी में फंड डायवर्जन की जांच प्रवर्तन निदेशालय को करने का आदेश हाईकोर्ट का है। फरीदाबाद के बिल्डर डब्ल्यूटीसी और भूटानी ग्रुप पर फरवरी में ईडी ने छापा मारा था। यह जांच अभी जारी है। सुपरटेक बिल्डर की भी ईडी जांच चल रही हैं।
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- 16 अप्रैल को ईडी ने समूह के प्रमोटर के कई ठिकानों पर छापा मारकर किया था गिरफ्तार
522.9 करोड़ रुपये जुटाए थे बिल्डर ने खरीदारों से
1155 फ्लैट बनाए जाने थे प्रोजेक्ट में
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्नति फॉर्च्यून समूह की 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। ईडी सेक्टर-119 स्थित द अरण्या सोसाइटी में फ्लैट खरीदारों की रकम के डायवर्जन की जांच कर रही है। बिल्डर ने खरीदारों से ली गई रकम का इस्तेमाल निर्माण कार्य में नहीं कर फंड डायवर्ट कर दिए थे।
अब तक की जांच में परियोजना में 126.5 करोड़ रुपये का फंड डायवर्जन की बात सामने आई है। यह फंड डायवर्जन वर्ष 2011 से लेकर वर्ष 2019 के बीच बिल्डर समूह की तरफ से किया गया। इस वजह से मौके पर फ्लैट समेत अन्य निर्माण कार्य अधूरे रहे। यही नहीं बिल्डर ने प्राधिकरण का बकाया भी जमा नहीं किया। इससे प्रोजेक्ट में जो फ्लैट बने उनमें से अधिकतर खरीदारों की रजिस्ट्री भी नहीं हो पाई। अब बिल्डर की संपत्तियां अटैच होने के बाद परियोजना के फ्लैट खरीदारों के लिए हल निकलने की उम्मीद जगी है।
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ईडी ने उन्नति फॉर्च्यून ग्रुप के प्रमोटर अनिल मिठास को 16 अप्रैल को कई ठिकानों पर छापा मारने के बाद गिरफ्तार किया था। अनिल मिठास अभी न्यायिक हिरासत में है। ईडी की जांच में इस परियोजना में किया गया फंड डायवर्जन साफ तौर पर उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदारों से 522.9 करोड़ रुपये परियोजना में जुटाए गए। इस राशि में ज्यादातर हिस्सा बिल्डर ने परियोजना में न लगाकर शेयर मार्केट में निवेश किया। इसके अलावा बांड खरीदने, लोन और निर्माण सामग्री के अग्रिम भुगतान, सिक्योरिटी के नाम पर राशि निकाली गई। इससे परियोजना के तहत निधार्रित काम नहीं हो पाए। यूपी रेरा की तरफ से मामले में पहले कराए गए ऑडिट में 107 करोड़ रुपये का डायवर्जन मिला था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय पूर्व में इस बिल्डर समूह की जांच में 25 करोड़ 94 लाख रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया था।
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नोएडा प्राधिकरण का 200 करोड़ रुपये ज्यादा का बकाया
द अरण्या सोसाइटी के 2,594 वर्गमीटर का प्लॉट नोएडा प्राधिकरण से आईवीआरसीएल इंफ्रा एंड प्रोजेक्ट लिमेटेड के नाम पर आवंटित हुआ था। बगैर प्लॉट अपने नाम करवाए करार के आधार पर उन्नति फॉर्च्यून ग्रुप ने यहां पर परियोजना लांच की थी। इस पर दो बार 8 अक्तूबर 2007 व 7 मार्च 2013 में कुल 1155 फ्लैटों व 70 विला का नक्शा पास करवाया गया। विला बनाए गए या नहीं इसकी सूचना प्राधिकरण को नहीं दी गई। जमीन पर 200 करोड़ का बकाया था।
फ्लैट खरीदारों की शिकायत पर हो रही ईडी की जांच
ईडी की द अरण्या सोसाइटी को लेकर जांच फ्लैट खरीदारों की शिकायतों पर हो रही है। खरीदारों ने थाना पुलिस से लेकर आर्थिक अपराध शाखा तक में केस दर्ज कराए थे। फेज-3 थाने में भी केस दर्ज हुआ था। दर्ज कराए गए केस में बिल्डर पर एक फ्लैट अलग-अलग खरीदारों को बेचने के भी आरोप लगाए गए थे। इस शिकायत के मद्देनजर अलग से रिकॉर्ड तैयार कराया जा रहा है। ईडी जांच का दायरा और बढ़ रहा है।
कई परियोजनाओं में चल रही है ईडी और सीबीआई की जांच
ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां नोएडा की गई सोसाइटियों में हुए हेरफेर को खंगाल रही हैं। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में तीन लीड मेंबर बिल्डर समूह के खिलाफ केस दर्ज कर जांच सीबीआई कर रही है। सबवेंशन स्कीम में हुए फ्रॉड में 8 बिल्डरों के खिलाफ 10 परियोजनाओं में सीबीआई एफआईआर दर्ज कर जांच कर रही है। सेक्टर-107 लोटस-300 सोसाइटी में फंड डायवर्जन की जांच लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। स्पोर्ट्स सिटी में फंड डायवर्जन की जांच प्रवर्तन निदेशालय को करने का आदेश हाईकोर्ट का है। फरीदाबाद के बिल्डर डब्ल्यूटीसी और भूटानी ग्रुप पर फरवरी में ईडी ने छापा मारा था। यह जांच अभी जारी है। सुपरटेक बिल्डर की भी ईडी जांच चल रही हैं।