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बृजभूषण की बेटी ने मंच पर पढ़ी शायरी: बोलीं- पहलवान की बेटी हूं, हम लिख देते हैं इतिहास, पीठ पर वार नहीं करते

Sun, 26 Oct 2025 10:17 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: विकास कुमार Updated Sun, 26 Oct 2025 10:17 PM IST
सार

शालिनी बृजभूषण सिंह की इकलौती बेटी हैं। उन्होंने पांच किताबें भी लिखी हैं। उनके पति भाजपा नेता हैं। भाई की जीत पर भी शालिनी ने कविता पढ़ी। शालिनी ने छोटे भाई करण भूषण सिंह की लोकसभा चुनाव में जीत का जिक्र किया।

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Brijbhushan singh daughter shalini singh recited poetry on stage
शालिनी सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बृजभूषण की बेटी बोलीं- पहलवान की बेटी हूं, पहलवान के लिए पढ़ी कविता, बोली भेज देना उन्हें। पहली बार मंच पर शायरी पढ़ी- इतिहास लिखते हैं, पीठ पर वार नहीं करते...बहराइच की कैसरगंज सीट से भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने पहली बार सार्वजनिक मंच से शायरी पढ़ी। शनिवार को नोएडा सेक्टर-121 होम्स 121 सोसाइटी में आयोजित कवि सम्मेलन में मंच पर पहुंचते ही उन्होंने कहा- मैं पहलवान की बेटी हूं। पहली बार मंच पर कविता पाठ कर रही हूं....मैं बिल्कुल नई कवि हूं, यह मेरा पहला कवि-सम्मेलन है। मजाक-मजाक में दोनों भाइयों करण और प्रतीक भूषण को बाहुबली बताया। वहीं कुश्ती संघ के अध्यक्ष सतपाल यादव के लिए उन्होंने कविता पढ़ी हालांकि कहा उन्हें भेज दीजियेगा। 

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फिर कई शायरियां पढ़ीं, जिनकी लाइनें थीं- 
'जब पीठ सटा दी मेरी, तो अब मैं भी धक्का मारूंगा।
बहुत हुआ सम्मान अब मैं भी मुक्का मारूंगा।
जिंदाबाद तेरा भी जिसने यहां तक पहुंचा है, दर्द में ही सही बड़ी हमदर्दी से छोड़ने आया है।
अब रसातल में हूं तो इससे नीचे कहां जाऊंगा, अब मैं भी लडूंगा अब मैं भी वापस आऊंगा।'

शालिनी बृजभूषण सिंह की इकलौती बेटी हैं। उन्होंने पांच किताबें भी लिखी हैं। उनके पति भाजपा नेता हैं। भाई की जीत पर भी शालिनी ने कविता पढ़ी। शालिनी ने छोटे भाई करण भूषण सिंह की लोकसभा चुनाव में जीत का जिक्र किया। कहा- जीत के बाद भाई की एक तस्वीर थी, जिसमें वह चौखट पर मां को गले लगा रहे थे। फिर उन्होंने एक भाई के लिए कविता पढ़ी- 

रणभूमि से लौटकर मां जब मैं तेरे गले लगा, वेदनाएं निष्क्रिय हुईं सब, हर घाव मध्यम लगा। जो हार भी जाता तब भी ऐसे ही गले लगती मां, आंसू खुशी के देखते थे तो जीत कर मैं आया मां।  भाग्य के ललाट पर कर्म का तिलक लगा सकता हूं, तेरे लिए मैं हर युद्ध जीत कर आ सकता हूं।

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कवियों के सम्मान में भी पंक्तियां पढ़ी-
किसी चाकू, किसी खंजर, किसी तलवार से नहीं मारूंगा, यह वादा है मेरा, तेरी तरह पीठ पर वार से नहीं मारूंगा। अभी देख रहा हूं, तुझ में खुदगर्जी कितनी बाकी है। जब मैं मारने पर आऊंगा, किसी हथियार से नहीं मारूंगा। मार दूंगा शब्दों से, तो झेल न पाएगा बाण मेरा; लेखक हूं मैं, कलम के अलावा किसी और औजार से नहीं मारूंगा।

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इसके साथ ही कई और रचनाएं पेश कीं 
एक सल्तनत है लफ्जों की, हम दिखावा नहीं करते।
हम लिख देते हैं इतिहास, हम दावा नहीं करते।
हमने स्याह हरफो छू ली है रूह अपनी, हम मंदिर-मस्जिद, काशी-काबा नहीं करते।
हम आएंगे तूफान बनकर-स्वागत की तैयारी रखना, धधकता विजय-घोष रखना, राजतिलक की थाली रखना।

सास-ससुर हैं बिहार के पूर्व सांसद, नोएडा में पति के साथ रहती हैं
पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने शालिनी सिंह की शादी आरा से पूर्व सांसद स्व. अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते पुत्र विशाल सिंह से की है। विशाल सिंह बिहार के आरा के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। वह भी भाजपा नेता हैं। वह राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) के चेयरमैन भी हैं।


 

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