{"_id":"5d8925bc8ebc3e0131498f48","slug":"bike-boat-scam-grnoida-news-noi4631617180","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाइक बोट में निवेश कराने के लिए एएसआई ने छोड़ दी थी नौकरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाइक बोट में निवेश कराने के लिए एएसआई ने छोड़ दी थी नौकरी
विज्ञापन
सीआरपीएफ का एएसआई
- फोटो : Grnoida
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाइक बोट में निवेश कराने के लिए एएसआई ने छोड़ दी थी नौकरी
ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट कंपनी में पैसा लगाने वालों में आम आदमी ही नहीं जवान भी शामिल हैं। सोमवार को पंजाब के होशियारपुर से पहुंचे शशिपाल ने बताया कि उन्होंने भी अपने और करीबियों के करीब दो करोड़ रुपये कंपनी में लगाए थे। कमाई होने पर सीआरपीएफ से सेवानिवृत्ति ले ली थी। अब कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे हैं।
शशिपाल ने बताया कि वह सीआरपीएफ में एएसआई पद तैनात थे। 2018 में उन्होंने बाइक बोट कंपनी में निवेश किया था। जब उन्हें किश्त मिलने लगी तो उन्होंने फोर्स के अन्य जवानों, करीबी और रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दी। उनसे भी कंपनी में रुपये लगाने के लिए कहा। शशिपाल ने बताया कि उन्होंने 50 पैरामिलिट्री जवान और 50 से अधिक करीबियों के करीब दो करोड़ रुपये कंपनी में लगा दिए। बताया जा रहा है शशिपाल ने 80 लाख रुपये खुद अपने खाते से कंपनी को ट्रांसफर किए थे। इस काम में लोगों से निवेश कराने के लिए समय अधिक देना पड़ रहा था और आय भी अच्छी खासी हो रही थी। इसे देखते हुए शशिपाल ने अगस्त 2018 में सात साल पहले ही नौकरी से सेवानिवृत्ति ले ली। इसके कुछ माह बाद ही कंपनी ने किश्त देनी बंद कर दी। अब, उनके करीबी निवेशक रुपये वापस करने का दबाव बना रहे हैं।
बाइक बोट के बाद गो-वे में भी फंसे
बाइक बोट और उसकी तर्ज पर चलाई गई गो-वे कंपनी के निवेशक अपना रुपया वापस लेने और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भटक रहे हैं। सोमवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और आसपास के राज्यों से 50 से अधिक निवेशक सूरजपुर स्थित पुलिस कार्यालय पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी व उनकी संपत्ति जब्त करने की मांग की। इनमें कुछ ऐसे भी थे जो बाइक बोट में ठगी का शिकार होने के बावजूद गो-वे कंपनी के जाल में फंस गए थे। उन्होंने दादरी विधायक तेजपाल नागर से भी मदद मांगी। सीओ ग्रेटर नोएडा ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। निवेशकों ने बताया कि गो-वे कंपनी के पदाधिकारी लोनी गाजियाबाद निवासी दंपती अनिल सेन और मीनू सेन ने उनसे दो साल में धन दोगुना करने का लालच देकर निवेश कराया था। आरोपियों ने कुछ माह किश्त दीं। इसके चलते उन्होंने अपने करीबियों व परिचितों का रुपया भी कंपनी में निवेश करा दिया। आरोपियों ने बीटा-2 थाना क्षेत्र में दफ्तर खोला था। लेकिन जून में अचानक दफ्तर बंद कर फरार हो गए। तभी बुलंदशहर के एक निवेशक ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपियों की दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में लोकेशन मिली थी, इसके बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। कंपनी में करीब 17 हजार निवेशकों ने डेढ़ सौ करोड़ से अधिक रुपया निवेश किया है।
विज्ञापन
गो-वे कंपनी के निवेशकों की एफआईआर में अभी तक आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। निवेशकों से आरोपियों के पते, मोबाइल नंबर आदि ले लिए गए हैं। जल्द उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। बाइक बोट मामले में आर्थिक अपराध शाखा की एसआईटी जांच कर रही है।
तनु उपाध्याय, सीओ ग्रेटर नोएडा प्रथम
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट कंपनी में पैसा लगाने वालों में आम आदमी ही नहीं जवान भी शामिल हैं। सोमवार को पंजाब के होशियारपुर से पहुंचे शशिपाल ने बताया कि उन्होंने भी अपने और करीबियों के करीब दो करोड़ रुपये कंपनी में लगाए थे। कमाई होने पर सीआरपीएफ से सेवानिवृत्ति ले ली थी। अब कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे हैं।
शशिपाल ने बताया कि वह सीआरपीएफ में एएसआई पद तैनात थे। 2018 में उन्होंने बाइक बोट कंपनी में निवेश किया था। जब उन्हें किश्त मिलने लगी तो उन्होंने फोर्स के अन्य जवानों, करीबी और रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दी। उनसे भी कंपनी में रुपये लगाने के लिए कहा। शशिपाल ने बताया कि उन्होंने 50 पैरामिलिट्री जवान और 50 से अधिक करीबियों के करीब दो करोड़ रुपये कंपनी में लगा दिए। बताया जा रहा है शशिपाल ने 80 लाख रुपये खुद अपने खाते से कंपनी को ट्रांसफर किए थे। इस काम में लोगों से निवेश कराने के लिए समय अधिक देना पड़ रहा था और आय भी अच्छी खासी हो रही थी। इसे देखते हुए शशिपाल ने अगस्त 2018 में सात साल पहले ही नौकरी से सेवानिवृत्ति ले ली। इसके कुछ माह बाद ही कंपनी ने किश्त देनी बंद कर दी। अब, उनके करीबी निवेशक रुपये वापस करने का दबाव बना रहे हैं।
विज्ञापन
बाइक बोट के बाद गो-वे में भी फंसे
बाइक बोट और उसकी तर्ज पर चलाई गई गो-वे कंपनी के निवेशक अपना रुपया वापस लेने और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भटक रहे हैं। सोमवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और आसपास के राज्यों से 50 से अधिक निवेशक सूरजपुर स्थित पुलिस कार्यालय पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी व उनकी संपत्ति जब्त करने की मांग की। इनमें कुछ ऐसे भी थे जो बाइक बोट में ठगी का शिकार होने के बावजूद गो-वे कंपनी के जाल में फंस गए थे। उन्होंने दादरी विधायक तेजपाल नागर से भी मदद मांगी। सीओ ग्रेटर नोएडा ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। निवेशकों ने बताया कि गो-वे कंपनी के पदाधिकारी लोनी गाजियाबाद निवासी दंपती अनिल सेन और मीनू सेन ने उनसे दो साल में धन दोगुना करने का लालच देकर निवेश कराया था। आरोपियों ने कुछ माह किश्त दीं। इसके चलते उन्होंने अपने करीबियों व परिचितों का रुपया भी कंपनी में निवेश करा दिया। आरोपियों ने बीटा-2 थाना क्षेत्र में दफ्तर खोला था। लेकिन जून में अचानक दफ्तर बंद कर फरार हो गए। तभी बुलंदशहर के एक निवेशक ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपियों की दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में लोकेशन मिली थी, इसके बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। कंपनी में करीब 17 हजार निवेशकों ने डेढ़ सौ करोड़ से अधिक रुपया निवेश किया है।
विज्ञापन
गो-वे कंपनी के निवेशकों की एफआईआर में अभी तक आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। निवेशकों से आरोपियों के पते, मोबाइल नंबर आदि ले लिए गए हैं। जल्द उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। बाइक बोट मामले में आर्थिक अपराध शाखा की एसआईटी जांच कर रही है।
तनु उपाध्याय, सीओ ग्रेटर नोएडा प्रथम