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Noida News: बाहर सुंदर गुलाबी बोर्ड और भीतर खाली डिब्बा, जरूरत पर नहीं मिलता एक भी पैड

Sat, 12 Sep 2026 06:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 06:55 PM IST
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Beautiful pink board outside and empty box inside, not a single pad is available when needed
नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद
-चार स्थानों की पड़ताल में खुली व्यवस्था की पोल, कहीं मशीन खराब तो कहीं पैड ही नहीं
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(फोटो है)
ज्योति कार्की
नोएडा। महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर सुविधाएं देने के लिए शहर में बनाए गए पिंक टॉयलेट में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की व्यवस्था महज मशीनों तक सिमटकर रह गई है। टॉयलेट में पैड निकालने के लिए हजारों रुपये की मशीनें तो लगा दी गईं, लेकिन जरूरत के समय महिलाएं इनका लाभ नहीं उठा पा रही हैं। कहीं मशीन खराब है तो कहीं उसमें सैनिटरी पैड ही उपलब्ध नहीं हैं। कुछ जगह मशीन में पैड होने के बावजूद उन्हें बाहर निकालना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में पीरियड्स के दौरान अचानक जरूरत पड़ने पर महिलाओं को आसपास की दुकानों से पैड खरीदने पड़ रहे हैं।
पिंक टॉयलेट की पड़ताल में सेक्टर-39, 33, 27 और 104 में व्यवस्था की यही तस्वीर सामने आई। सेक्टर-39 के पिंक टॉयलेट में सैनिटरी पैड निकालने की मशीन लगी है, लेकिन उसमें पैड उपलब्ध नहीं हैं। मशीन भी खराब बताई गई। सेक्टर-33 में मशीन तो मौजूद है, लेकिन उसमें पैड नहीं हैं और महिलाओं के मुताबिक यह काम भी नहीं करती। सेक्टर-27 में भी मशीन खराब मिली। वहीं सेक्टर-104 में मशीन ठीक से काम नहीं कर रही है। यहां पहुंची भावना ने बताया कि उन्होंने मशीन को कभी काम करते नहीं देखा। उनका कहना है कि आपात स्थिति में यह सुविधा महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है, लेकिन मशीन खराब होने के कारण उन्हें दोबारा दुकानों का रुख करना पड़ता है।
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सेक्टर-63 स्थित पिंक टॉयलेट में भी स्थिति बेहतर नहीं है। यहां साफ-सफाई संभालने वाली महिला ने बताया कि जरूरत पड़ने पर वह अपने पास से महिलाओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध करा देती हैं।
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मशीनें लगीं, पांच रुपये के सिक्के की अड़चन जस की तस
पिंक टॉयलेट में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के लिए दो तरह की मशीनें लगाई गई हैं। एक डिस्पेंसर मशीन है, जिसमें पांच रुपये का सिक्का डालकर पैड निकालने की व्यवस्था है। दूसरी मशीन इस्तेमाल किए गए पैड के निस्तारण के लिए लगाई गई है। लेकिन दोनों व्यवस्थाओं का अपेक्षित लाभ महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। मशीनें खराब होने, पैड उपलब्ध नहीं होने और संचालन में दिक्कत के कारण सुविधा बेअसर साबित हो रही है।

मशीनें लगाए जाने के बाद ही पांच रुपये के सिक्के को लेकर समस्या सामने आई थी, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हुआ। ऐसे में हजारों रुपये खर्च कर लगाई गई मशीनें कई स्थानों पर बिना उपयोग के पड़ी हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि मशीन लगाने के बाद उनके नियमित रखरखाव, पैड की उपलब्धता और संचालन की निगरानी क्यों नहीं की जा रही है।

नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद

नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद

नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद

नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद

नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद

नोएडा के सेक्टर 27 स्थित पिंक टॉयलेट में खराब मशीन।संवाद

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