फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Ban on work orders up to five lakhs and tenders up to two crores, list also called

Noida News: पांच लाख तक के वर्क ऑर्डर और दो करोड़ रुपये तक के टेंडर पर रोक, सूची भी तलब

Tue, 09 Dec 2025 03:00 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2025 03:00 AM IST
विज्ञापन
Ban on work orders up to five lakhs and tenders up to two crores, list also called
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने लगाई रोक, अब मंजूरी के बाद ही कोई काम या टेंडर होगा
विज्ञापन

-1 से 5 लाख रुपये तक के काम का वर्क ऑर्डर से डीजीएम स्तर तक होते थे
-दो करोड़ रुपये के टेंडर की मंजूरी एसीईओ स्तर पर दी जाती थी

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने एक से पांच लाख रुपये तक के वर्क ऑर्डर और दो करोड़ रुपये तक के टेंडर जारी करने पर रोक लगा दी है। उन्होंने 2023-24 और 2024-25 में वर्क ऑर्डर से सभी काम की सूची भी तलब की है। अब सीईओ स्तर पर मंजूरी के बाद ही कोई काम या टेंडर होगा।
उल्लेखनीय है कि नोएडा प्राधिकरण में अब तक 1 से 5 लाख रुपये तक के काम का वर्क ऑर्डर से डीजीएम स्तर से जारी होते थे। दो करोड़ रुपये के टेंडर की मंजूरी एसीईओ स्तर पर दी जाती थी। प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम के इस फैसले से माना जा रहा है कि कोई बड़ी अनियमितता प्रकाश में आने या आशंका पर यह रोक लगाई गई है।
विज्ञापन




ये हैं वजह
अधिकारों का दुरुपयोग
-सीईओ के आदेश में लिखा है कि अक्सर देखा गया है कि 1 से 5 लाख के कार्यों को आकस्मिक या आपातकालीन परिस्थितियों में दिखाते हुए बिना ई-टेंडर प्रक्रिया या कोटेशन के कार्यों को करवाकर उनका भुगतान किया जा रहा है। शीर्ष अधिकारियों को उसकी पत्रावली तक नहीं दिखाई जा रही। इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में अधिकारियों की ओर से अपने अधिकारों का दुरुपयोग स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है। फिलहाल नई व्यवस्था तक वरिष्ठ प्रबंधक से लेकर एसीईओ स्तर के स्वीकृति की कोई शक्ति नहीं बची है।
विज्ञापन
विज्ञापन

खूब हो रहे वर्क ऑर्डर
-नोएडा प्राधिकरण में वरिष्ठ प्रबंधक से महाप्रबंधक स्तर तक वित्तीय शक्तियों का वितरण पद के मुताबिक किया गया है। वरिष्ठ प्रबंधक की सीमा पूरे साल में 50 लाख के काम का वर्क ऑर्डर, महाप्रबंधक की सीमा एक करोड़ रुपये है। इस तरह सभी विभागों में तेजी से आकस्मिक या आपातकालीन परिस्थितियों का हवाला देकर वर्क ऑर्डर जारी किए जा रहे थे। सबसे ज्यादा वर्क ऑर्डर जल, विद्युत यांत्रिक विभाग से आ रहे थे। सिविल के भी इंटरलॉकिंग, फुटपाथ, सड़क, पार्क की मरम्मत जैसे काम शामिल हैं।

बड़े काम को टुकड़ों में बांटकर ले रहे थे मंजूरी

-दो करोड़ रुपये तक के काम की मंजूरी सीईओ, समिति से न होने की व्यवस्था से सीईओ की सख्ती और निगरानी को बाईपास करने का नया तरीका इंजीनियर निकाल रहे थे। बड़े काम को टुकड़ों में बांट कर मंजूरी लेना। ऐसा होने पर सीईओ के सवालों का जवाब नहीं देना पड़ता था। दो करोड़ रुपये तक के काम की मंजूरी एसीईओ स्तर से हो जाती थी। एसीईओ के लिए 30 करोड़ रुपये की मंजूरी की सीमा एक साल के लिए तय थी।


------------

सड़कों की मरम्मत पर असर नहीं

सीईओ ने बताया कि यह रोक निगरानी के मकसद से लगाई गई है। सभी वर्क ऑर्डर और एसीईओ स्तर से मंजूरी के बाद हुए काम की सूची मांगी गई है। इनका परीक्षण कराया जाएगा जिसके बाद ही रोक हटाने पर विचार किया जाएगा। सीईओ ने स्पष्ट किया कि इस रोक का असर बारिश में उखड़ी या टूटी सड़कों की मरम्मत पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। सड़कों की मरम्मत को इस रोक से बाहर रखा गया है। इसके पहले फरवरी-2024 में ऐसी रोक प्राधिकरण में लगी थी लेकिन फिर व्यवस्था बहाल हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed