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Noida News: एक माह में कार्रवाई का मिला आश्वासन, धरना खत्मकर लौटे किसान

Wed, 16 Sep 2026 10:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 10:55 PM IST
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Assurance of action within a month received; farmers call off protest and return.
- तीनों प्राधिकरण के बाहर पूरे दिन बैठै रहे, बोले- मांगे पूरी नहीं हुईं तो अक्तूबर से फिर से होगा धरना
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। एक माह में कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण पर जारी भारतीय किसान यूनियन का धरना खत्म हो गया है। बुधवार रात नौ बजे धरना समाप्त होने का एलान होते ही किसान धरनास्थल से लौट गए। हालांकि लौटने से पहले उन्होंने कहा कि एक माह में मांगें पूरी नहीं हुईं तो 21 अक्तूबर से फिर से तीनों प्राधिकरण कार्यालयों के बाहर अनिश्चतकालिन धरना शुरू कर दिया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि तीनोें प्राधिकरण के लिए अलग-अलग कमेटी बना दी गई है। इन कमेटियों से वार्ता कर अधिकारी किसानों की मांगें पूरी करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान ने 100-100 बीघे जमीन दे दी मगर उन्हें 10 फीसदी प्लाॅट भी नहीं दिए जा रहे। अधिकारी जल्द से जल्द किसानों की मांगें पूरी करें। अब केवल व्यवहार से काम नहीं चलेगा। 16 अक्तूबर को एक माह हो जाएगा। उसके बाद 21 या 22 तारीख को फिर से धरने पर बैठकर सारी मांगें पूरी कराई जाएंगी।
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यह हैं किसानों की मांगें

-भूमि अधिग्रहण बाद किसानों को 10 फीसदी विकसित भूखंड दिया जाए
-आबादी के निस्तारण और लंबित लीज बैक मामला का समाधान किया जाए
-64.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए।

-किसानों के बच्चों को रोजगार दिया जाए।
-पिछले 12 साल से सर्किल रेट नहीं बढ़ाया है, किसानों को बाजार दर पर मुआवजा दिया जाए।

-नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू किया जाए।


रात में रागनी, दिन में नारों से गूंज रहे प्राधिकरण कैंपस
बुधवार शाम किसानों का धरना समाप्त हो गया। इससे पहले मंगलवार रात से लेकर बुधवार देर शाम तक किसान धरनास्थलों पर डटे रहे। धरनास्थल पर दिन चढ़ते ही नारों की गूंज और रात होते ही रागनी की तान सुनाई पड़ रही थी। तीनों प्राधिकरणों के कार्यालय पर यही हाल था। अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे किसान दिनभर नारेबाजी और भाषणों के जरिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे और तो रात में रागनी के माध्यम से अपनी पीड़ा और संघर्ष की कहानी सुना रहे थे। धरना स्थल पर किसानों के ठहरने के लिए टेंट लगाए गए थे। जिनमें रात में सोने के साथ भोजन की भी व्यवस्था की गई थी। दिन भर आंदोलन में भाग लेने के बाद मंगलवार रात में भोजन के बाद रागनी का दौर देर रात तक चलता रहता है। रागनी के माध्यम से किसान अपनी समस्याओं और मांगों को प्रभावी ढंग से सामने रख रहे थे।
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