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Noida News: आध्यात्म को बढ़ावा देने की गोली तैयार करेगा एम्स
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-मन को मजबूत करने में ध्यान-योग कारगर, दवा भी करेगी असर
-मरीजों की रिकवरी होगी तेज, ज्यादा लोगों को मिलेगा फायदा
-हर माह पहले बुधवार को विशेष सत्र आयोजित कर रहा संस्थान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स प्रशासन आध्यात्मिक चिकित्सा को बढ़ावा देेने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए अलग से विभाग का गठन होगा। इसमें योग, ध्यान, मंत्र समेत दूसरी आध्यात्मिक क्रियाएं के सहारे भी मरीज को राहत दिलाने की कोशिश होगी। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी एम्स में अनुशासनात्मक विभाग बनाने के लिए एक रोडमैप की सिफारिश करेगी। इस कमेटी के अध्यक्ष डीन (शैक्षणिक) और डीन (अनुसंधान), डीन (परीक्षा) और एसोसिएट डीन (शैक्षणिक) सदस्य व रजिस्ट्रार (एम्स) सदस्य सचिव होंगे। यह कमेटी मामले की विस्तार से जांच और सभी प्रासंगिक लोगों से परामर्श करने के बाद 31 अक्तूबर तक अपनी सिफारिशें देंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि दवा तन को ठीक कर सकती है। लेकिन मरीज पर दवा का असर तभी बेहतर तरीके से होगा जब मन मजबूत होगा। मन को मजबूत करने में आध्यात्मिक चिकित्सा सबसे कारगर है। इसकी मदद से व्यक्ति को तनाव मुक्त, चिंता मुक्त, फिर से जीने की इच्छा, खुद के प्रति लगाव को बढ़ाया जा सकता है। जो मरीज में ऐसे हार्मोन्स को बढ़ावा देता है जो रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ा देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर जैसे घातक रोग में अक्सर मरीज जीने की इच्छा ही खो देता है और तनाव में आकर दूसरी बीमारियों में फंस जाता है। ऐसे मरीजों में आध्यात्म काफी कारगर साबित हुआ है। मीडिया प्रभारी डॉ. रीमा दादा ने बताया कि विभाग के गठन की दिशा में जल्द काम शुरू कर दिया जाएगा।
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एम्स में हर माह पहले बुधवार को आयोजित होता है सत्र
एम्स में हर माह के पहले बुधवार को आध्यात्म को लेकर सत्र का आयोजन होता है। इस सत्र में मरीजों, डॉक्टरों सहित अन्य लोगों को ध्यान, योग, मंत्र समेत आध्यात्म के दूसरे क्रियाओं के बारे में बताया जाता है। साथ ही अभी तक हुए सत्रों में विभिन्न संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने आध्यात्म के फायदे के बारे में बताया और मरीजों को इससे जुड़ने की अपील की। साथ ही इस दिशा में शोध भी शुरू किया गया है। इस शोध में देखा जा रहा है कि दवा के साथ आध्यात्म से मरीजों में क्या फायदा होता है। शोध में पाया गया है कि जिन्होंने दवा के साथ आध्यात्म का सहारा लिया उनकी रिकवरी काफी तेज हुई।
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प्रत्यारोपण को मिलेगा बढ़ावा
एम्स में प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए विशेष संकाय शुरू करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास के आदेश पर बनाए जा रहे प्रत्यारोपण चिकित्सा, चिकित्सीय शिक्षा, आध्यात्मिक चिकित्सा सहित अन्य विभाग से छात्रों को फायदा होगा। इस बारे में डॉक्टरों ने बताया कि प्रत्यारोपण को लेकर अभी कोई विभाग नहीं था। इस दिशा में प्रयास शुरू होने के बाद न केवल प्रत्यारोपण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रशिक्षित डॉक्टर भी तैयार हो सकेंगे।
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डॉक्टरों ने किया विरोध
एम्स में आध्यात्मिक चिकित्सा संकाय शुरू करने का कुछ डॉक्टरों ने विरोध किया है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे कोर्स शुरू करने से विरोध बढ़ेगा। एम्स में एलोपैथी के साथ योग के संयुक्त इस्तेमाल से इलाज में शोध के लिए पहले से एकीकृत चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र हैं। कुछ समय पहले योग थेरेपी भी शुरू हुई। फिर अलग से विभाग बनाने की क्या जरूरत है।
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-मरीजों की रिकवरी होगी तेज, ज्यादा लोगों को मिलेगा फायदा
-हर माह पहले बुधवार को विशेष सत्र आयोजित कर रहा संस्थान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स प्रशासन आध्यात्मिक चिकित्सा को बढ़ावा देेने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए अलग से विभाग का गठन होगा। इसमें योग, ध्यान, मंत्र समेत दूसरी आध्यात्मिक क्रियाएं के सहारे भी मरीज को राहत दिलाने की कोशिश होगी। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी एम्स में अनुशासनात्मक विभाग बनाने के लिए एक रोडमैप की सिफारिश करेगी। इस कमेटी के अध्यक्ष डीन (शैक्षणिक) और डीन (अनुसंधान), डीन (परीक्षा) और एसोसिएट डीन (शैक्षणिक) सदस्य व रजिस्ट्रार (एम्स) सदस्य सचिव होंगे। यह कमेटी मामले की विस्तार से जांच और सभी प्रासंगिक लोगों से परामर्श करने के बाद 31 अक्तूबर तक अपनी सिफारिशें देंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि दवा तन को ठीक कर सकती है। लेकिन मरीज पर दवा का असर तभी बेहतर तरीके से होगा जब मन मजबूत होगा। मन को मजबूत करने में आध्यात्मिक चिकित्सा सबसे कारगर है। इसकी मदद से व्यक्ति को तनाव मुक्त, चिंता मुक्त, फिर से जीने की इच्छा, खुद के प्रति लगाव को बढ़ाया जा सकता है। जो मरीज में ऐसे हार्मोन्स को बढ़ावा देता है जो रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ा देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर जैसे घातक रोग में अक्सर मरीज जीने की इच्छा ही खो देता है और तनाव में आकर दूसरी बीमारियों में फंस जाता है। ऐसे मरीजों में आध्यात्म काफी कारगर साबित हुआ है। मीडिया प्रभारी डॉ. रीमा दादा ने बताया कि विभाग के गठन की दिशा में जल्द काम शुरू कर दिया जाएगा।
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एम्स में हर माह पहले बुधवार को आयोजित होता है सत्र
एम्स में हर माह के पहले बुधवार को आध्यात्म को लेकर सत्र का आयोजन होता है। इस सत्र में मरीजों, डॉक्टरों सहित अन्य लोगों को ध्यान, योग, मंत्र समेत आध्यात्म के दूसरे क्रियाओं के बारे में बताया जाता है। साथ ही अभी तक हुए सत्रों में विभिन्न संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने आध्यात्म के फायदे के बारे में बताया और मरीजों को इससे जुड़ने की अपील की। साथ ही इस दिशा में शोध भी शुरू किया गया है। इस शोध में देखा जा रहा है कि दवा के साथ आध्यात्म से मरीजों में क्या फायदा होता है। शोध में पाया गया है कि जिन्होंने दवा के साथ आध्यात्म का सहारा लिया उनकी रिकवरी काफी तेज हुई।
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प्रत्यारोपण को मिलेगा बढ़ावा
एम्स में प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए विशेष संकाय शुरू करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। एम्स निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास के आदेश पर बनाए जा रहे प्रत्यारोपण चिकित्सा, चिकित्सीय शिक्षा, आध्यात्मिक चिकित्सा सहित अन्य विभाग से छात्रों को फायदा होगा। इस बारे में डॉक्टरों ने बताया कि प्रत्यारोपण को लेकर अभी कोई विभाग नहीं था। इस दिशा में प्रयास शुरू होने के बाद न केवल प्रत्यारोपण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रशिक्षित डॉक्टर भी तैयार हो सकेंगे।
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डॉक्टरों ने किया विरोध
एम्स में आध्यात्मिक चिकित्सा संकाय शुरू करने का कुछ डॉक्टरों ने विरोध किया है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे कोर्स शुरू करने से विरोध बढ़ेगा। एम्स में एलोपैथी के साथ योग के संयुक्त इस्तेमाल से इलाज में शोध के लिए पहले से एकीकृत चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र हैं। कुछ समय पहले योग थेरेपी भी शुरू हुई। फिर अलग से विभाग बनाने की क्या जरूरत है।