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ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने से पहले एजेंसी करेगी निरीक्षण
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नोएडा। ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी करने से पहले अब निजी एजेंसी निरीक्षण करेगी। इसके बाद ही संबंधित प्राधिकरण की ओर से ओसी जारी किया जाएगा।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के लिए प्राधिकरण अब क्वालीफाइड एनवायरनमेंटल प्रोफेशनल एजेंसी का चयन करेगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी की समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई। उन्होंने महाप्रबंधक नियोजन को एजेंसी चयन की जिम्मेदारी देते हुए कहा कि वह 15 मार्च तक इस कार्य को पूरा कर लें। यह भी स्पष्ट किया कि ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों से प्राप्त जुर्माने से ही इस एजेंसी का भुगतान किया जाएगा।
इसके अलावा बैठक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील न होने पर चार सोसाइटी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं में मामला दर्ज करने के निर्देश सीईओ ने दिए। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से संबंधित कोतवाली में तहरीर दी गई है। समीक्षा बैठक में सामने आया कि चार ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी सेक्टर-76 स्थित स्काईटेक मेट्रॉट, सेक्टर-78 स्थित एसोटेक विंडसर कोर्ट, सेक्टर-75 स्थित गार्डेनिया इंडिया और फ्यूटेक शेल्टर्स में तय समय में एसटीपी की शुरूआत नहीं हो सकी, जबकि 15 फरवरी तक हो जानी चाहिए थी। वहीं, इनमें से एक सोसाइटी सेक्टर-78 स्थित स्काईटेक मेट्रॉट का ओसी निरस्त कर दिया गया है। ऐसे में अब इस सोसाइटी में किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। सोसाइटी में 716 फ्लैट हैं, जिनमें से 445 फ्लैटों की रजिस्ट्री हुई है। संबंधित सोसाइटी के सीवेज का पानी नालों व खाली जमीन पर बहाया जा रहा है। यह पानी सेक्टर-168 में यमुना में जाकर मिल रहा है जिससे यमुना प्रदूषित हो रही है।
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नालों में वेटलैंड बनेंगे
सिंचाई विभाग के मुख्य नाले में मिलने वाले लगभग 30 नालों में प्रोफेसर सीआर बाबू की ओर से प्रस्तुत परामर्श के तहत 6 से 8 मीटर चौड़े नाले में वेटलैंड का निर्माण करने के लिए 15 मार्च तक रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। यह 300-300 मीटर दूरी पर बनेंगे। इसके अलावा पांच एमएलडी के छोटे वेटलैंड भी बनाए जा सकते हैं। इनसे शोधित पानी का सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
28 फरवरी तक लेने होंगे सोसाइटी के नमूने
बीते समय में 55 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के एसटीपी के नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने पर दोबारा नमूने लेने की प्रक्रिया जल खंड व यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुरू की थी। अब तक 40 सोसाइटी से नमूने लिए जा चुके हैं। बाकी बची सोसाइटी के नमूने लेने को सीईओ ने 28 फरवरी तक का समय दिया है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के लिए प्राधिकरण अब क्वालीफाइड एनवायरनमेंटल प्रोफेशनल एजेंसी का चयन करेगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी की समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई। उन्होंने महाप्रबंधक नियोजन को एजेंसी चयन की जिम्मेदारी देते हुए कहा कि वह 15 मार्च तक इस कार्य को पूरा कर लें। यह भी स्पष्ट किया कि ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों से प्राप्त जुर्माने से ही इस एजेंसी का भुगतान किया जाएगा।
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इसके अलावा बैठक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील न होने पर चार सोसाइटी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं में मामला दर्ज करने के निर्देश सीईओ ने दिए। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से संबंधित कोतवाली में तहरीर दी गई है। समीक्षा बैठक में सामने आया कि चार ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी सेक्टर-76 स्थित स्काईटेक मेट्रॉट, सेक्टर-78 स्थित एसोटेक विंडसर कोर्ट, सेक्टर-75 स्थित गार्डेनिया इंडिया और फ्यूटेक शेल्टर्स में तय समय में एसटीपी की शुरूआत नहीं हो सकी, जबकि 15 फरवरी तक हो जानी चाहिए थी। वहीं, इनमें से एक सोसाइटी सेक्टर-78 स्थित स्काईटेक मेट्रॉट का ओसी निरस्त कर दिया गया है। ऐसे में अब इस सोसाइटी में किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। सोसाइटी में 716 फ्लैट हैं, जिनमें से 445 फ्लैटों की रजिस्ट्री हुई है। संबंधित सोसाइटी के सीवेज का पानी नालों व खाली जमीन पर बहाया जा रहा है। यह पानी सेक्टर-168 में यमुना में जाकर मिल रहा है जिससे यमुना प्रदूषित हो रही है।
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नालों में वेटलैंड बनेंगे
सिंचाई विभाग के मुख्य नाले में मिलने वाले लगभग 30 नालों में प्रोफेसर सीआर बाबू की ओर से प्रस्तुत परामर्श के तहत 6 से 8 मीटर चौड़े नाले में वेटलैंड का निर्माण करने के लिए 15 मार्च तक रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। यह 300-300 मीटर दूरी पर बनेंगे। इसके अलावा पांच एमएलडी के छोटे वेटलैंड भी बनाए जा सकते हैं। इनसे शोधित पानी का सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
28 फरवरी तक लेने होंगे सोसाइटी के नमूने
बीते समय में 55 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के एसटीपी के नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने पर दोबारा नमूने लेने की प्रक्रिया जल खंड व यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुरू की थी। अब तक 40 सोसाइटी से नमूने लिए जा चुके हैं। बाकी बची सोसाइटी के नमूने लेने को सीईओ ने 28 फरवरी तक का समय दिया है।