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हाईकोर्ट बेंच के लिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे अधिवक्ता
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सूरजपुर स्थित जिला न्यायालय परिसर स्थित बार एसोसिएशन में बैठक करते केंद्रीय संघर्ष समिति के पदा
- फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच के लिए वकीलों ने 25 नवंबर को एयरपोर्ट के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है। बुधवार को गौतमबुद्ध नगर बार सभागार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के तत्वावधान में आयोजित बैठक में 27 जिलों के पदाधिकारी और प्रतिनिधियों ने यह निर्णय लिया। एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से चार प्रस्ताव पारित किए गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर 18 नवंबर को सभी जिलों की बार एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रेसवार्ता करेंगे और चारों निर्णय की विस्तृत जानकारी देंगे। वहीं, 25 नवंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकील न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
सभी अधिवक्ता परी चौक के जीरो प्वाइंट पर एकत्रित होंगे। यहां से जेवर में शिलान्यास कार्यक्रम की ओर कूच करेंगे। वहां अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। इसके अलावा निर्णय लिया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों और तहसीलों में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर होर्डिंग लगाए जाएंगे। मांगों और ज्ञापन के संबंध में शासन-प्रशासन को पहले ही अवगत करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में देश की अन्य हाईकोर्ट बेंच का पूरा ब्योरा देकर समझाया जाएगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी आवश्यकता क्यों है। इनमें अन्य प्रदेश और हाईकोर्ट बेंच आदि के संबंध मेें पूरी जानकारी होगी। उन क्षेत्रों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनसंख्या की जानकारी होगी। साथ ही यहां से हाईकोर्ट की दूरी आदि की जानकारी देकर बेंच स्थापित करने की मांग की जाएगी।
जेल में मोबाइल, लैपटॉप प्रयोग पर होगी पांच साल की सजा
प्रदेश सरकार ने जेल में बंदियों द्वारा मोबाइल, लैपटॉप समेत अन्य संचार उपकरणों के उपयोग पर पांच साल की सजा का फैसला सुनाया है। साथ ही इसमें 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। जिला जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि जेल में कोई भी बंदी यदि मोबाइल, ब्लूटूथ, टैबलेट व अन्य तकनीकी उपकरण का प्रयोग करता है तो उसे पांच साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा जेल में आने के दौरान यदि कोई व्यक्ति जाली दस्तावेज प्रस्तुत करता है तो तीन वर्ष की सजा और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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सभी अधिवक्ता परी चौक के जीरो प्वाइंट पर एकत्रित होंगे। यहां से जेवर में शिलान्यास कार्यक्रम की ओर कूच करेंगे। वहां अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपेंगे। इसके अलावा निर्णय लिया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों और तहसीलों में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर होर्डिंग लगाए जाएंगे। मांगों और ज्ञापन के संबंध में शासन-प्रशासन को पहले ही अवगत करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में देश की अन्य हाईकोर्ट बेंच का पूरा ब्योरा देकर समझाया जाएगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसकी आवश्यकता क्यों है। इनमें अन्य प्रदेश और हाईकोर्ट बेंच आदि के संबंध मेें पूरी जानकारी होगी। उन क्षेत्रों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनसंख्या की जानकारी होगी। साथ ही यहां से हाईकोर्ट की दूरी आदि की जानकारी देकर बेंच स्थापित करने की मांग की जाएगी।
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जेल में मोबाइल, लैपटॉप प्रयोग पर होगी पांच साल की सजा
प्रदेश सरकार ने जेल में बंदियों द्वारा मोबाइल, लैपटॉप समेत अन्य संचार उपकरणों के उपयोग पर पांच साल की सजा का फैसला सुनाया है। साथ ही इसमें 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। जिला जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि जेल में कोई भी बंदी यदि मोबाइल, ब्लूटूथ, टैबलेट व अन्य तकनीकी उपकरण का प्रयोग करता है तो उसे पांच साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा जेल में आने के दौरान यदि कोई व्यक्ति जाली दस्तावेज प्रस्तुत करता है तो तीन वर्ष की सजा और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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