फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   90% industries will not give salary

90 फीसदी उद्योग नहीं दे पाएंगे अप्रैल का वेतन

Mon, 13 Apr 2020 11:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2020 11:18 PM IST
विज्ञापन
90% industries will not give salary
90 फीसदी उद्योग नहीं दे पाएंगे अप्रैल का वेतन
विज्ञापन

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने प्रादेशिक स्तर पर कराया सर्वे, 5000 उद्यमियों की जानी गई राय
ऑनलाइन पूछे गए प्रश्नों से वास्तविक स्थिति का आकलन
वेतन के लिए बनाए गए दबाव को 91.16 फीसदी कंपनियों ने अनुचित बताया
---
20 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े उद्योग जिले में स्थापित
10 लाख से ज्यादा श्रमिक जुड़े हैं जिले के उद्योगों से
02 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबार
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। कोरोना महामारी ने औद्योगिक विकास की रफ्तार को थाम कर रख दिया है। जिले के उद्योगों में उत्पादन पूरी तरह से बंद है। औद्योगिक संगठनों ने लॉकडाउन से हुए आर्थिक नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया है। अप्रैल में करीब 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के ऑनलाइन सर्वे के अनुसार लॉकडाउन ने लघु और मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ दी है। सर्वे में प्रदेश के करीब 90 फीसदी उद्यमियों ने अप्रैल का वेतन देने में असमर्थता जाहिर की है, जबकि 90 प्रतिशत से ज्यादा उद्यमियों ने लॉकडाउन पीरियड के दौरान प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को पूरा वेतन देने संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों को अनुचित बताया है।
वास्तविक स्थिति का आंकलन करने के लिए कराए गए इस सर्वे में आईआईए ने प्रदेश के 5000 उद्यमियों से कुछ प्रश्न पूछे, जिनके जवाब से संकेत मिल रहे हैं कि लॉकडाउन लंबा चला तो छोटे उद्योग बड़े संकट में आ जाएंगे और बेरोजगारी के रूप में भी असर दिखाई दे सकता है। सर्वे में 40.98 प्रतिशत उद्यमियों ने माना है कि कोविड-19 से गहराए संकट से उनकी आमदनी पर बड़ा असर पड़ेगा। 48.36 फीसदी का कहना है कि काफी हद तक आमदनी प्रभावित होगी। 44.26 फीसदी का मानना है कि अर्थिक मंदी की वजह से कारोबार में बड़ी गिरावट आएगी, जबकि 51.64 का मानना है कि काफी हद तक कारोबार पर असर पड़ेगा। 66.39 फीसदी उद्यमियों का मानना है कि ईपीएफ योजना में दी गई छूट का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा, जबकि 33.61 फीसदी ने रजामंदी जताई है।
विज्ञापन

प्राइवेट कंपनियों पर लॉकडाउन पीरियड में कर्मचारियों का वेतन देने को लेकर बनाए गए दबाव को 91.16 फीसदी कंपनियों ने अनुचित बताया है, जबकि 9.84 फीसदी उद्यमी इसके पक्ष में दिखाई दिए। सरकार बैंकिंग सेक्टर को उद्योगों का मददगार बनने की बात कह रही है, लेकिन 75.41 फीसदी उद्यमियों ने बैंकों से किसी प्रकार की मदद नहीं मिलने का हवाला सर्वे में दिया है, जबकि 24.59 फीसदी ने वर्किंग कैपिटल की जरूरत को पूरा करने में बैंकों के योगदान की बात कही है। सर्वे में एक बड़ा पहलू सामने आया है, जिसमें 60.66 फीसदी उद्यमियों का मानना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद स्थिति से उबरने के लिए उद्योगों को कर्मचारियों का सहारा नहीं मिलेगा। 81.15 फीसदी उद्यमियों का मानना है कि लॉकडाउन के असर से निपटने में सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है, जबकि 18.85 फीसदी पक्ष में हैं। अप्रैल के लॉकडाउन पीरियड बंदी का सामना कर रहे 89.34 फीसदी उद्योगों ने वेतन देने में असमर्थता जताई है, जबकि महज 10.66 फीसदी ही वेतन के पक्ष में दिखे।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
5000 करोड़ के नुकसान का आकलन
लॉकडाउन के कारण बंद उद्योगों से करीब 5000 करोड़ के नुकसान का आकलन लगाया जा रहा है। नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन के मुताबिक यदि पूरे अप्रैल उद्योग बंद रहे तो नुकसान का ग्राफ दोगुना यानी 10,000 करोड़ तक बढ़ने की संभावना है। हालांकि, औद्योगिक संगठनों की तरफ से नुकसान का सही आंकलन करने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। राज्य और केंद्रीय जीएसटी के रूप में जिले को हर महीने करीब 1000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। इस आधार पर भी उद्योग-व्यापार को 4500 से 5000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है।
---
ईएसआई के मद से वेतन दे सरकार
औद्योगिक संगठनों के मुताबिक, कोरोना महामारी ने देश में मेडिकल इमरजेंसी के हालात बना दिए हैं। कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ देने के लिए हर महीने जिले से 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ईएसआई के मद में जमा होती है। एनईए के कोषाध्यक्ष शरदचंद्र जैन ने बताया कि ईएसआईसी के मद में 84,000 करोड़ रुपये पड़े हैं। लॉकडाउन की अवधि के दौरान इस रकम का इस्तेमाल सरकार को कर्मचारियों के वेतन के लिए करना चाहिए। जिले में करीब 4.5 लाख ईएसआई कार्ड धारक हैं।
---
सरकार एमएसएमई सेक्टर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की व्यवस्था करे। कर्मचारियों का वेतन कर्मचारी राज्य बीमा निगम की ओर से अस्वस्थता लाभ के अंतर्गत सीधा उनके खाते में जाए। - कुलमणि गुप्ता, चेयरमैन-आईआईए नोएडा चैप्टर
---
होली के बाद से ही उद्योगों में उत्पादन ठप है। जो कुछ जमा पूंजी थी वो कर्मचारियों को मार्च का वेतन देने में खत्म हो गई। अप्रैल का वेतन सरकार अपने माध्यम से करे। इसका भार उद्यमियों पर न डाला जाए। ईएसआईसी भी इसका जरिया हो सकता है। - एसपी शर्मा, राष्ट्रीय सचिव-आईआईए

---
लॉकडाउन खुलने के समय हमारे पास काम करने के नाम पर नगदी के रूप में कुछ नहीं होगा। सरकार को उद्योगों की मांग पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया तो रोजगार देने वाले ही खुद बड़ी संख्या में बेरोजगार हो जाएंगे। - विपिन मल्हन, अध्यक्ष-एनईए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed