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ईस्टर्न कॉरिडोर की राह में अटका 550 वर्गमीटर जमीन का टुकड़ा
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बोड़ाकी गांव की इसी जमीन के कारण ईस्टर्न कॉरिडोर का निर्माण रुका है। संवाद
- फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा (नवीन कुमार)। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (डीएफसीसी) के ईस्टर्न कॉरिडोर के निर्माण की राह में अब 550 वर्गमीटर जमीन का टुकड़ा अटक गया है। यह जमीन बोड़ाकी गांव है। यहां के किसान मुआवजे की फाइल नहीं लगा रहे हैं। जमीन नहीं मिलने से प्रोजेक्ट नई डेडलाइन तक पूरा करना मुश्किल होगा। इससे पहले भी जमीन नहीं मिलने के कारण समयसीमा एक साल बढ़ चुकी है। कोलकाता से लुधियाना के बीच डीएफसीसी का ईस्टर्न कॉरिडोर बन रहा है। गौतमबुद्ध नगर में भी कॉरिडोर के हिस्से पर निर्माण चल रहा है। मार्च, 2021 तक निर्माण पूरा होना था, लेकिन 1150 वर्गमीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका। इसमें 550 बोड़ाकी और 300-300 वर्गमीटर भूमि हजरतपुर व रिठौरी गांव में है। इस कारण प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो सका।
इस जमीन पर हाईकोर्ट का यथास्थिति का आदेश था। अक्तूबर में सभी याचिका हाईकोर्ट से निस्तारित हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एसएलपी को खारिज कर दिया था। इसके बाद उम्मीद थी कि जमीन पर जल्द कब्जा मिल जाएगा। जिला प्रशासन ने हजरतपुर की 300 मीटर वर्गमीटर जमीन पर कब्जा दिला दिया। रिठौरी गांव की जमीन का मुआवजा किसानों को दिया जा रहा है। जल्द ही यहां पर डीएफसीसी को कब्जा मिल जाएगा, लेकिन बोड़ाकी गांव की 550 वर्गमीटर जमीन का टुकड़ा अभी फंसा है। डीएफसीसी के अफसरों ने बताया कि गांव के किसान मुआवजा नहीं उठा रहे हैं। किसानों ने फाइल नहीं लगाई है। अगर किसान मुआवजा नहीं उठाते हैं तो फिर जमीन पर पुलिस बल के साथ कब्जा लिया जाएगा।
सात नवंबर तक दिलाना था कब्जा
हाईकोर्ट से याचिका निस्तारित होने के बाद शासन ने प्रशासन को सात नवंबर तक जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया था, लेकिन एक माह बाद बीत जाने के बाद भी डीएफसीसी को कब्जा नहीं मिल सका है। बोड़ाकी गांव की जमीन पर कई मकान बने हैं। उनको हटाना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। डीएफसीसी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर अखिलेश कुमार ने बताया कि तीन गांव में जमीन की अड़चन थी। हजरतपुर में जमीन पर कब्जा मिल गया है। रिठौरी में मुआवजा बांटा जा रहा है। जल्द कब्जा मिल जाएगा। बोड़ाकी में किसान मुआवजा नहीं उठा रहे हैं। ऐसा ही रहा तो फिर पुलिस बल के साथ जमीन पर कब्जा लिया जाएगा।
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इस जमीन पर हाईकोर्ट का यथास्थिति का आदेश था। अक्तूबर में सभी याचिका हाईकोर्ट से निस्तारित हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एसएलपी को खारिज कर दिया था। इसके बाद उम्मीद थी कि जमीन पर जल्द कब्जा मिल जाएगा। जिला प्रशासन ने हजरतपुर की 300 मीटर वर्गमीटर जमीन पर कब्जा दिला दिया। रिठौरी गांव की जमीन का मुआवजा किसानों को दिया जा रहा है। जल्द ही यहां पर डीएफसीसी को कब्जा मिल जाएगा, लेकिन बोड़ाकी गांव की 550 वर्गमीटर जमीन का टुकड़ा अभी फंसा है। डीएफसीसी के अफसरों ने बताया कि गांव के किसान मुआवजा नहीं उठा रहे हैं। किसानों ने फाइल नहीं लगाई है। अगर किसान मुआवजा नहीं उठाते हैं तो फिर जमीन पर पुलिस बल के साथ कब्जा लिया जाएगा।
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सात नवंबर तक दिलाना था कब्जा
हाईकोर्ट से याचिका निस्तारित होने के बाद शासन ने प्रशासन को सात नवंबर तक जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया था, लेकिन एक माह बाद बीत जाने के बाद भी डीएफसीसी को कब्जा नहीं मिल सका है। बोड़ाकी गांव की जमीन पर कई मकान बने हैं। उनको हटाना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। डीएफसीसी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर अखिलेश कुमार ने बताया कि तीन गांव में जमीन की अड़चन थी। हजरतपुर में जमीन पर कब्जा मिल गया है। रिठौरी में मुआवजा बांटा जा रहा है। जल्द कब्जा मिल जाएगा। बोड़ाकी में किसान मुआवजा नहीं उठा रहे हैं। ऐसा ही रहा तो फिर पुलिस बल के साथ जमीन पर कब्जा लिया जाएगा।
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