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Noida News: सेक्टर-51-52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाले स्काईवॉक का 55 प्रतिशत काम पूरा
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सेक्टर-51-52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाले स्काईवॉक का काम 55 फीसदी पूरा
- 31 मार्च की है डेडलाइन, एक्वा लाइन और ब्लू लाइन को जोड़ने की है योजना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। एक्वा लाइन के सेक्टर-51 और ब्लू लाइन के सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाली स्काईवॉक परियोजना का 55 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। 31 मार्च तक इसकी डेडलाइन तय की गई है। इसके बनने से एक्वा और ब्लू लाइन के लाखों यात्रियों को फायदा होगा। सात माह से 420 मीटर लंबे स्काईवॉक बनाने का काम चल रहा है। वहीं इस पर लगाए जाने वाले ट्रेवलेटर की लंबाई 230 मीटर होगी। ट्रेवलेटर के माध्यम से यात्रियों को एक से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने में आसानी होगी। स्काईवॉक में एयरकंडीशनर लगे होंगे।
दरअसल एक्वा और ब्लू लाइन कॉरिडोर के निर्माण के दौरान कॉमन प्लेटफॉर्म के बाबत ध्यान नहीं रखा गया। शुरुआत में की गई अनदेखी का खामियाजा यात्रियों को अब उठाना पड़ रहा है। कॉमन प्लेटफॉर्म नहीं होने से यात्रियों को एक से दूसरे कॉरिडोर तक जाने के लिए निशुल्क ई-रिक्शा की सुविधा मुहैया कराई गई। लेकिन आइकिया के प्रोजेक्ट की वजह से ई-रिक्शा का कॉरिडोर टूट गया। इसके बाद इसके लिए दूसरा रूट बनाया गया। इन सभी मशक्कतों के साथ यात्री सफर करते रहे। लेकिन अब स्काईवॉक बनने से लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी।
25 करोड़ है निर्माण लागत
स्काईवॉक की अनुमानित निर्माण लागत करीब 25 करोड़ है। इसमें सिविल के कार्यों के लिए 10.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्काईवॉक की चौड़ाई 6.3 मीटर है। सेक्टर-51 और 52 मेट्रो के बीच में आइकिया कंपनी का प्लॉट है। जहां निर्माण कार्य जारी है। अगले कुछ वर्षों में कंपनी यहां अपना स्टोर खोलेगी। उस समय इस स्काईवॉक के माध्यम से उक्त स्टोर में जाने की सुविधा भी मिलेगी। इसे इस तरह से बनाया जा रहा है कि दोनों स्टेशनों से उतरने के बाद यात्री सीधे आइकिया के स्टोर में जा सकें।
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लिंक रोड चौड़ीकरण की योजना लेटलतीफी की शिकार
चिल्ला रेगुलेटर से दलित प्रेरणा स्थल से होते हुए महामाया फ्लाईओवर तक लिंक रोड चौड़ीकरण की योजना लेटलतीफी की शिकार है। इस परियोजना के लिए कंसल्टेंट का चयन काफी पहले हो चुका है। लेकिन योजना का काम अधर में है। कंसल्टेंट की ओर से ड्राइंग और रोडमैप नहीं दिया गया है। परियोजना के लिए सेंट्रल वर्ज पतला करने या साइड के पेड़ों को काटने के विकल्प पर काम करना है। लेकिन अब तक रोडमैप तैयार नहीं होने से काम पर असर पड़ रहा है।
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- 31 मार्च की है डेडलाइन, एक्वा लाइन और ब्लू लाइन को जोड़ने की है योजना
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। एक्वा लाइन के सेक्टर-51 और ब्लू लाइन के सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाली स्काईवॉक परियोजना का 55 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। 31 मार्च तक इसकी डेडलाइन तय की गई है। इसके बनने से एक्वा और ब्लू लाइन के लाखों यात्रियों को फायदा होगा। सात माह से 420 मीटर लंबे स्काईवॉक बनाने का काम चल रहा है। वहीं इस पर लगाए जाने वाले ट्रेवलेटर की लंबाई 230 मीटर होगी। ट्रेवलेटर के माध्यम से यात्रियों को एक से दूसरे स्टेशन तक पहुंचने में आसानी होगी। स्काईवॉक में एयरकंडीशनर लगे होंगे।
दरअसल एक्वा और ब्लू लाइन कॉरिडोर के निर्माण के दौरान कॉमन प्लेटफॉर्म के बाबत ध्यान नहीं रखा गया। शुरुआत में की गई अनदेखी का खामियाजा यात्रियों को अब उठाना पड़ रहा है। कॉमन प्लेटफॉर्म नहीं होने से यात्रियों को एक से दूसरे कॉरिडोर तक जाने के लिए निशुल्क ई-रिक्शा की सुविधा मुहैया कराई गई। लेकिन आइकिया के प्रोजेक्ट की वजह से ई-रिक्शा का कॉरिडोर टूट गया। इसके बाद इसके लिए दूसरा रूट बनाया गया। इन सभी मशक्कतों के साथ यात्री सफर करते रहे। लेकिन अब स्काईवॉक बनने से लोगों की परेशानी दूर हो जाएगी।
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25 करोड़ है निर्माण लागत
स्काईवॉक की अनुमानित निर्माण लागत करीब 25 करोड़ है। इसमें सिविल के कार्यों के लिए 10.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्काईवॉक की चौड़ाई 6.3 मीटर है। सेक्टर-51 और 52 मेट्रो के बीच में आइकिया कंपनी का प्लॉट है। जहां निर्माण कार्य जारी है। अगले कुछ वर्षों में कंपनी यहां अपना स्टोर खोलेगी। उस समय इस स्काईवॉक के माध्यम से उक्त स्टोर में जाने की सुविधा भी मिलेगी। इसे इस तरह से बनाया जा रहा है कि दोनों स्टेशनों से उतरने के बाद यात्री सीधे आइकिया के स्टोर में जा सकें।
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लिंक रोड चौड़ीकरण की योजना लेटलतीफी की शिकार
चिल्ला रेगुलेटर से दलित प्रेरणा स्थल से होते हुए महामाया फ्लाईओवर तक लिंक रोड चौड़ीकरण की योजना लेटलतीफी की शिकार है। इस परियोजना के लिए कंसल्टेंट का चयन काफी पहले हो चुका है। लेकिन योजना का काम अधर में है। कंसल्टेंट की ओर से ड्राइंग और रोडमैप नहीं दिया गया है। परियोजना के लिए सेंट्रल वर्ज पतला करने या साइड के पेड़ों को काटने के विकल्प पर काम करना है। लेकिन अब तक रोडमैप तैयार नहीं होने से काम पर असर पड़ रहा है।