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Noida News: फर्जी खतौनी तैयार कर तीन को बना दिया 500 एकड़ जमीन

Tue, 07 Nov 2023 01:24 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Nov 2023 01:24 AM IST
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500 acres of land was given to three by preparing fake documents
हरियाणा-यूपी सीमा विवाद
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फोटो
हेडिंग -तीन एकड़ को बना दिया 500 एकड़ भूमि, जांच में खुला राज
या
हेडिंग - फर्जी खतौनी तैयार कर तीन को बना दिया 500 एकड़ जमीन

ग्रेनो के फलैंदा गांव का मामला, जांच के बाद हरियाणा के किसानों का दावा किया खारिज

दीक्षित अवार्ड के समय खतौनी में दर्ज है हरियाणा की तीन एकड़ जमीन
शून्य होगी फर्जी खतौनी; राजस्व विभाग की भी मिलीभगत, होगी कार्रवाई



नवीन कुमार
ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के फलैंदा गांव में फर्जी खतौनी से 500 एकड़ जमीन हरियाणा की दर्शा दी, जबकि दीक्षित अवार्ड के समय तैयार खतौनी में मात्र तीन एकड़ जमीन हरियाणा की है। जांच के बाद अब प्रशासन ने हरियाणा के किसानों का जमीन पर दावा खारिज कर दिया है। फर्जीवाड़े में तहसील के राजस्व विभाग के अफसरों की भी मिलीभगत पाई गई है, उन पर कार्रवाई होगी। साथ ही फर्जी खतौनी को शून्य किया जाएगा। इस जमीन विवाद को लेकर अब तक पांच लोगों की हत्या और करीब 20 बार खूनी संघर्ष हो चुका है।

वर्ष 1974 में बाढ़ के बाद से उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के बीच जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ था। उस समय दीक्षित अवार्ड से दोनों राज्यों का सीमांकन करते हुए हरियाणा के कुछ गांवों को यूपी और यूपी के कुछ गांवों को हरियाणा में कर दिया गया। गौतमबुद्ध नगर में भी ऐसा हुआ। दीक्षित अवार्ड के समय फलैंदा
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गांव में हरियाणा के सोलड़ा गांव की तीन एकड़ भूमि थी।

इसकी खतौनी हरियाणा से जेवर तहसील में राजस्व रिकॉर्ड में सुरक्षित है, लेकिन कुछ वर्ष पहले हरियाणा और यूपी के भूमाफिया ने फर्जी खतौनी तैयार करा ली। इसमें फलैंदा गांव में सोलड़ा गांव के किसानों की तीन एकड़ के बजाय 500 एकड़ जमीन दस्तावेज में होना दर्शाया गया। फर्जी खतौनी के आधार पर भूमाफिया ने जमीन बेचनी शुरू कर दी। यूपी के किसानों ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की तो जांच बैठा दी गई।
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अफसरों ने बताया कि जेवर तहसील से पुरानी खतौनी का रिकॉर्ड तलब किया तो उसमें हरियाणा की मात्र तीन एकड़ जमीन है। मौके पर जाकर किसानों के बयान दर्ज किए गए। वहां उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क निर्माण कराया है। बिजली और टेलीफोन लाइन पर यूपी की है। मकान भी उत्तर प्रदेश के किसानों के थे। जिसके आधार पर प्रशासन ने हरियाणा के किसानों का जमीन होने का दावा खारिज कर दिया है।

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सर्वे लेखपाल पर मिलीभगत का आरोप
जांच में अधिकारियों ने सर्वे लेखपाल की भूमिका संदिग्ध पाई। उसने हरियाणा के किसानों की जमीन बताकर बैनामा करा दिए। शिकायत होने पर जिलाधिकारी ने लेखपाल को हलके से हटा दिया था। अब जांच में सर्वे लेखपाल के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है। मामले में भूमाफिया और अन्य अफसरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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कई बार हो चुका है खूनी संघर्ष
यूपी-हरियाणा सीमा पर कई बार खूनी संघर्ष हो चुका है। अब तक पांच लोगों की हत्या हो चुकी है और 20 से अधिक बार खूनी संघर्ष हुए हैं। आठ वर्ष पहले गौतमबुद्ध नगर के फेज-दो के गुलावली गांव में हरियाणा और यूपी के किसानों के बीच संघर्ष में एक किसान की मौत हो गई थी, जबकि 15 से अधिक घायल थे। फलैंदा गांव में भी कई बार संघर्ष हो चुका है। एक वर्ष पहले झगड़ा होने के बाद डीएम ने जांच बैठा दी थी। किसानों में फसल काटकर ले जाने का चलन था। यहां पर बाढ़ आती थी तो बहाव कभी गौतमबुद्ध नगर की सीमा में कटाव कर देता था तो कभी हरियाणा क्षेत्र की सीमा में बहाव से जमीन उधर चली जाती थी। इसी कारण यहां पर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

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हरियाणा की फर्जी खतौनी तैयार कर फलैंदा गांव में तीन एकड़ जमीन को 500 एकड़ कर दिया गया। जांच के बाद डीएम को रिपोर्ट सौंप दी है। फर्जी खतौनी को शून्य घोषित किया जाएगा। कुछ प्रशासनिक अफसरों की भी भूमिका संदिग्ध मिली है। उनके खिलाफ उच्च अफसरों को रिपोर्ट दी जाएगी। - भैरपाल सिंह, सहायक अभिलेख अधिकारी, गौतमबुद्ध नगर
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