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Noida News: बिल्डरों के दिवालिया प्रक्रिया में जाने से प्राधिकरण के फंसे 4733 करोड़, बनेगी नई रणनीति
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बिल्डरों के दिवालिया प्रक्रिया में जाने से प्राधिकरण के फंसे 4733 करोड़
प्राधिकरण बनाएगा नई रणनीति, दिवालिया समाधान प्रक्रिया में प्राधिकरण के बकाया पैसे पर बाद में होती है बात
किसी भी परियोजना में नहीं मिले पैसे, ऐसी परियोजनाओं को एनसीएलटी में जाने से रोकने की लगाएगा जुगत
सुशील पांडेय
नोएडा। शहर की 15 बिल्डर परियोजनाओं के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में जाने से प्राधिकरण के 4,733 करोड़ रुपये फंस गए हैं। बिल्डरों से बकाये रुपये की वापसी की उम्मीद भी बेहद कम है। एनसीएलटी के आदेशों के तहत बिल्डर परियोजनाओं को उबारने के लिए सारे जतन किए जाते हैं, लेकिन प्राधिकरण के बकाये की वापसी की बात नहीं होती है। सूत्रों की मानें तो ऐसे में अब नई रणनीति के तहत प्राधिकरण की ओर से भविष्य में किसी भी परियोजना के ट्रिब्यूनल में जाने और दिवालिया प्रक्रिया चलाने से रोकने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पैसे की वापसी की उम्मीद बनी रहे।
सूत्रों के मुताबिक, बिल्डरों के एनसीएलटी में जाने से सबसे ज्यादा नुकसान प्राधिकरण का हुआ है। उनका कहना है कि एनसीएलटी की ओर से दिवालिया प्रक्रिया चलाने के बाद 270 दिन का मौका दिया जाता है, ताकि प्रोजेक्ट को उबारा जा सके। इस दौरान प्रोजेक्ट को पूरा करने पर पूरा ध्यान दिया जाता है। एनसीएलटी की ओर से नियुक्त इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से इस मामले में प्रोजेक्ट के समाधान की योजना बनाई जाती है। किसी थर्ड पार्टी को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए लाया जाता है, लेकिन जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो जाता है तब तक के लिए प्राधिकरण के पैसे वापसी को लेकर कोई बात नहीं होती है। ऐसे में प्राधिकरण अपने बकाये पैसे को लेकर चिंतित है।
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नीलामी के दौरान भी सबसे बाद में आएगा नंबर
अगर किसी बिल्डर परियोजना को 270 दिन में भी नहीं उबारा जा सका तो उस परियोजना के संपत्तियों की नीलामी का प्रावधान है। नीलामी के दौरान जो भी पैसे आएंगे, उस पर पहला हक बैंक और वित्तीय संस्थानों का होगा। इसके बाद फ्लैट खरीदारों को पैसे मिलेंगे। बाद में प्राधिकरण सहित मैटेरियल भेजने वाली एजेंसियों का नंबर आएगा। बताया जाता है कि वित्तीय संस्थानों के साथ लेनदेन के बाद इतना पैसा नहीं बचता कि आगे के लोगों तक दिया जा सके। ऐसे में प्राधिकरण के पैसे फंसने के आसार काफी है।
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एनसीएलटी में जाने से रोकने के लिए प्राधिकरण करेगा वार्ता
कई मामलों में बिल्डरों की ओर से जानबूझकर मामले को एनसीएलटी तक लाया जाता है ताकि वह प्राधिकरण की देनदारी से बच सकें। साथ ही फ्लैट खरीदारों को भी पैसे वापस न करना पड़े। ऐसे में अब प्राधिकरण उन परियोजनाओं पर पूरी तरह से नजर रखेगा, जिन परियोजनाओं की हालत ठीक नहीं है और वह भविष्य में एनसीएलटी जा सकते हैं। ऐसे बिल्डरों से आमने-सामने की बातचीत करेगा। इसका मकसद अपने पैसों की वापसी के अलावा फ्लैट खरीदारों को उनका घर दिलाना होगा।
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एनसीएलटी में बिल्डर परियोजनाएं और प्राधिकरण का बकाया (करोड़ रुपये में)
-सेक्टर-143 लॉजिक्स इंफ्राटेक-645.91
-सेक्टर-143 लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स-555.58
-सेक्टर-74 सुपरटेक-676.64
-सेक्टर-74 अजनारा-47.66
-सेक्टर-100 रेडफोर्ट जहांगीर-393.96
-सेक्टर-110 ग्रेनाइट गेट-877
-सेक्टर-119 आईवीआरसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर-221.24
-सेक्टर-143 डोसाइल बिल्डटेक-90.04 करोड़
-सेक्टर-137 शुभकामना-159.24
-सेक्टर-168 थ्रीसी प्रोजेक्ट-479.40
-सेक्टर-135 टुडे होम्स-167.13
-सेक्टर-137 सुपरटेक-121.06
-सेक्टर-143बी जीएसएस प्रोकॉन-69.66
-सेक्टर-168 ऑपुलेंट-90.56
-सेक्टर-107 हशिंदा प्रोजेक्ट-137.82
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प्राधिकरण बनाएगा नई रणनीति, दिवालिया समाधान प्रक्रिया में प्राधिकरण के बकाया पैसे पर बाद में होती है बात
किसी भी परियोजना में नहीं मिले पैसे, ऐसी परियोजनाओं को एनसीएलटी में जाने से रोकने की लगाएगा जुगत
सुशील पांडेय
नोएडा। शहर की 15 बिल्डर परियोजनाओं के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में जाने से प्राधिकरण के 4,733 करोड़ रुपये फंस गए हैं। बिल्डरों से बकाये रुपये की वापसी की उम्मीद भी बेहद कम है। एनसीएलटी के आदेशों के तहत बिल्डर परियोजनाओं को उबारने के लिए सारे जतन किए जाते हैं, लेकिन प्राधिकरण के बकाये की वापसी की बात नहीं होती है। सूत्रों की मानें तो ऐसे में अब नई रणनीति के तहत प्राधिकरण की ओर से भविष्य में किसी भी परियोजना के ट्रिब्यूनल में जाने और दिवालिया प्रक्रिया चलाने से रोकने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पैसे की वापसी की उम्मीद बनी रहे।
सूत्रों के मुताबिक, बिल्डरों के एनसीएलटी में जाने से सबसे ज्यादा नुकसान प्राधिकरण का हुआ है। उनका कहना है कि एनसीएलटी की ओर से दिवालिया प्रक्रिया चलाने के बाद 270 दिन का मौका दिया जाता है, ताकि प्रोजेक्ट को उबारा जा सके। इस दौरान प्रोजेक्ट को पूरा करने पर पूरा ध्यान दिया जाता है। एनसीएलटी की ओर से नियुक्त इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से इस मामले में प्रोजेक्ट के समाधान की योजना बनाई जाती है। किसी थर्ड पार्टी को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए लाया जाता है, लेकिन जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो जाता है तब तक के लिए प्राधिकरण के पैसे वापसी को लेकर कोई बात नहीं होती है। ऐसे में प्राधिकरण अपने बकाये पैसे को लेकर चिंतित है।
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नीलामी के दौरान भी सबसे बाद में आएगा नंबर
अगर किसी बिल्डर परियोजना को 270 दिन में भी नहीं उबारा जा सका तो उस परियोजना के संपत्तियों की नीलामी का प्रावधान है। नीलामी के दौरान जो भी पैसे आएंगे, उस पर पहला हक बैंक और वित्तीय संस्थानों का होगा। इसके बाद फ्लैट खरीदारों को पैसे मिलेंगे। बाद में प्राधिकरण सहित मैटेरियल भेजने वाली एजेंसियों का नंबर आएगा। बताया जाता है कि वित्तीय संस्थानों के साथ लेनदेन के बाद इतना पैसा नहीं बचता कि आगे के लोगों तक दिया जा सके। ऐसे में प्राधिकरण के पैसे फंसने के आसार काफी है।
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एनसीएलटी में जाने से रोकने के लिए प्राधिकरण करेगा वार्ता
कई मामलों में बिल्डरों की ओर से जानबूझकर मामले को एनसीएलटी तक लाया जाता है ताकि वह प्राधिकरण की देनदारी से बच सकें। साथ ही फ्लैट खरीदारों को भी पैसे वापस न करना पड़े। ऐसे में अब प्राधिकरण उन परियोजनाओं पर पूरी तरह से नजर रखेगा, जिन परियोजनाओं की हालत ठीक नहीं है और वह भविष्य में एनसीएलटी जा सकते हैं। ऐसे बिल्डरों से आमने-सामने की बातचीत करेगा। इसका मकसद अपने पैसों की वापसी के अलावा फ्लैट खरीदारों को उनका घर दिलाना होगा।
एनसीएलटी में बिल्डर परियोजनाएं और प्राधिकरण का बकाया (करोड़ रुपये में)
-सेक्टर-143 लॉजिक्स इंफ्राटेक-645.91
-सेक्टर-143 लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स-555.58
-सेक्टर-74 सुपरटेक-676.64
-सेक्टर-74 अजनारा-47.66
-सेक्टर-100 रेडफोर्ट जहांगीर-393.96
-सेक्टर-110 ग्रेनाइट गेट-877
-सेक्टर-119 आईवीआरसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर-221.24
-सेक्टर-143 डोसाइल बिल्डटेक-90.04 करोड़
-सेक्टर-137 शुभकामना-159.24
-सेक्टर-168 थ्रीसी प्रोजेक्ट-479.40
-सेक्टर-135 टुडे होम्स-167.13
-सेक्टर-137 सुपरटेक-121.06
-सेक्टर-143बी जीएसएस प्रोकॉन-69.66
-सेक्टर-168 ऑपुलेंट-90.56
-सेक्टर-107 हशिंदा प्रोजेक्ट-137.82