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3700 बेड, 8000 से ज्यादा सक्रिय मरीज, कहां करें भर्ती
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ग्रेटर नोएडा। लंबे समय से अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत चल रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस कमी को पूरा नहीं कर पा रहा है। कॉल सेंटर प्रबंधकों के अनुसार, जिले के अस्पतालों में कुल 3700 बेड हैं। जबकि, सक्रिय मरीजों की संख्या 8 हजार से भी ज्यादा है। ऐसे में मरीजों को कहां पर भर्ती करें। हर अस्पताल में 400 से 500 वेटिंग चल रही है। हाल यह है कि कुछ मरीज अस्पतालों के बाहर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर खड़े हैं, ताकि बेड खाली होने पर भर्ती हो सकें। वहीं, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग लगातार बेड बढ़ाने का दावा तो कर रहा है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। ऐसे हालत को देखते हुए सोसाइटी में आइसोलेशन वॉर्ड बनने शुरू हो गए हैं। वहां ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को दी जा सके।
रोज 800 के करीब मिल रहे संक्रमित
अब जिले में हर दिन 800 से 900 नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। बृहस्पतिवार को 1478 मरीज मिले थे। ये अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा था। बेड की कमी की वजह से अधिकतर मरीजों होम आइसोलेशन में ही रखा गया था। शुक्रवार को होम आइसोलेशन में रहने वाले कई मरीजों की हालत बिगड़ गई। उन्होंने कई अस्पतालों के चक्कर काटे। कुछ मरीज तो जिम्स के बाहर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर पहुंच गए। इसके बावजूद भी भर्ती नहीं किया जा रहा है। कुछ मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उनको ऑक्सीजन तो लगा दी, लेकिन बेड नहीं होने पर कोविड हेल्प डेस्क पर ही बैठा दिया। तकरीबन सभी अस्पतालों के यही हाल है। शारदा अस्पताल के बाहर जीरो बेड और जीरो ऑक्सीजन का बोर्ड लगा था।
सॉरी मैम मैं कुछ नहीं कर सकती
सॉरी मैम मैं कुछ नहीं कर सकती हूं। आपके पास जिले का पता नहीं है। भर्ती होने के दौरान स्थानीय पता होना जरूरी है। ऐसा कहकर आए दिन कॉल सेंटर से सैकड़ों लोगों को भर्ती करने से मना किया जा रहा है। जबकि, ये लोग कई वर्षों से जिले की इंडस्ट्री और मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे हैं। जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो 20 हजार के करीब इंडस्ट्री और हजारों के करीब मल्टीनेशनल कंपनियां हैं। इसमें करीब 6 से 7 लाख लोग काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग दूसरे जिलों से यहां आकर काम कर रहे हैं। इनके सामने अब बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
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नहीं मिला इलाज तो लौट गए घर
महेंद्र ने बताया कि वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। दोस्त को कोरोना हो गया है। उसने कॉल सेंटर पर फोन किया तो बोला गया कि स्थानीय पता नहीं है, इसलिए भर्ती नहीं कर सकते। मजबूरी में परिवार वाले उसको कानपुर लेकर चले गए। इन हालात को देखकर हम भी घर जाने की योजना बना रहे हैं। कंपनी से अनुमति मांगी है कि वो वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दे।
अस्पताल वालों ने बोला दिया है कि बेड और ऑक्सीजन नहीं है। मरीज को वापस लेकर जाओ। ऑक्सीजन देने के बारे में भी नहीं बताया।
- आकाश, तीमारदार
तीन घंटे से मरीज को लाइन में लेकर खड़ा हूं, लेकिन भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऑक्सीजन लेवल 80 पहुंच गया है। कोई सुनवाई नहीं हो रही।
- संजू श्रीवास्तव, तीमारदार
मरीज का ऑक्सीजन लेवल कम देख सिलिंडर लगा दिया है, लेकिन अभी भर्ती नहीं किया है। मैं दोपहर 12 बजे से यहां बैठकर इंतजार कर रहा हूं।
- अरुण त्यागी, तीमारदार
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रोज 800 के करीब मिल रहे संक्रमित
अब जिले में हर दिन 800 से 900 नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। बृहस्पतिवार को 1478 मरीज मिले थे। ये अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा था। बेड की कमी की वजह से अधिकतर मरीजों होम आइसोलेशन में ही रखा गया था। शुक्रवार को होम आइसोलेशन में रहने वाले कई मरीजों की हालत बिगड़ गई। उन्होंने कई अस्पतालों के चक्कर काटे। कुछ मरीज तो जिम्स के बाहर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर पहुंच गए। इसके बावजूद भी भर्ती नहीं किया जा रहा है। कुछ मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने उनको ऑक्सीजन तो लगा दी, लेकिन बेड नहीं होने पर कोविड हेल्प डेस्क पर ही बैठा दिया। तकरीबन सभी अस्पतालों के यही हाल है। शारदा अस्पताल के बाहर जीरो बेड और जीरो ऑक्सीजन का बोर्ड लगा था।
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सॉरी मैम मैं कुछ नहीं कर सकती
सॉरी मैम मैं कुछ नहीं कर सकती हूं। आपके पास जिले का पता नहीं है। भर्ती होने के दौरान स्थानीय पता होना जरूरी है। ऐसा कहकर आए दिन कॉल सेंटर से सैकड़ों लोगों को भर्ती करने से मना किया जा रहा है। जबकि, ये लोग कई वर्षों से जिले की इंडस्ट्री और मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे हैं। जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो 20 हजार के करीब इंडस्ट्री और हजारों के करीब मल्टीनेशनल कंपनियां हैं। इसमें करीब 6 से 7 लाख लोग काम करते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग दूसरे जिलों से यहां आकर काम कर रहे हैं। इनके सामने अब बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
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नहीं मिला इलाज तो लौट गए घर
महेंद्र ने बताया कि वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। दोस्त को कोरोना हो गया है। उसने कॉल सेंटर पर फोन किया तो बोला गया कि स्थानीय पता नहीं है, इसलिए भर्ती नहीं कर सकते। मजबूरी में परिवार वाले उसको कानपुर लेकर चले गए। इन हालात को देखकर हम भी घर जाने की योजना बना रहे हैं। कंपनी से अनुमति मांगी है कि वो वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दे।
अस्पताल वालों ने बोला दिया है कि बेड और ऑक्सीजन नहीं है। मरीज को वापस लेकर जाओ। ऑक्सीजन देने के बारे में भी नहीं बताया।
- आकाश, तीमारदार
तीन घंटे से मरीज को लाइन में लेकर खड़ा हूं, लेकिन भर्ती नहीं किया जा रहा है। ऑक्सीजन लेवल 80 पहुंच गया है। कोई सुनवाई नहीं हो रही।
- संजू श्रीवास्तव, तीमारदार
मरीज का ऑक्सीजन लेवल कम देख सिलिंडर लगा दिया है, लेकिन अभी भर्ती नहीं किया है। मैं दोपहर 12 बजे से यहां बैठकर इंतजार कर रहा हूं।
- अरुण त्यागी, तीमारदार