{"_id":"61fc21938708b9043715b623","slug":"25-lakhs-cheated-from-400-youth-on-the-pretext-of-job-noida-news-noi630309788","type":"story","status":"publish","title_hn":"नौकरी का झांसा देकर 400 युवाओं से 25 लाख ठगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नौकरी का झांसा देकर 400 युवाओं से 25 लाख ठगे
विज्ञापन
नोएडा। बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को मामूरा गांव में छापा मारकर गिरफ्तार किया है। किराये के कमरे में चल रहे फर्जी मिनी कॉल सेंटर से डेढ़ माह में 400 से अधिक युवाओं से आरोपियों ने करीब 25 लाख रुपये ठगे हैं। आरोपी प्रत्येक युवा से दो से सात हजार रुपये लेते थे। आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, तीन मोबाइल, कुछ युवाओं के बॉयोडाटा सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। आरोपियों की पहचान महोबा के छानीकला निवासी मनोज वर्मा, जालौन निवासी संजय और खोड़ा गाजियाबाद निवासी विकास के रूप में हुई है, जबकि विकास चौहान, गोल्डी यादव और शिवानी अभी फरार हैं।
डीसीपी हरीश चंदर के अनुसार, एक व्यक्ति ने सूचना दी थी कि मामूरा गांव स्थित एक पीजी में कुछ लोग फर्जी कॉल सेंटर से नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं को ठग रहे हैं। सूचना के आधार पर एसीपी अब्दुल कादिर और कोतवाल विवेक त्रिवेदी ने यहां छापा मारा तो मनोज, संजय व विकास मिले। पूछताछ में तीनों आरोपियों ने बताया कि मॉनस्टर डॉटकाम वेबसाइट पर बेरोजगार नौकरी पाने के लिए बॉयोडाटा अपलोड करते हैं।
यहां से वे बॉयोडाटा चुरा लेते हैं। इसमें उन्हें नाम, पता और शिक्षा के साथ कंपनी आदि का पता चल जाता था। इसके बाद जिस कंपनी में युवा ने बॉयोडाटा डाला था, उसका कर्मचारी बनकर फोन पर कॉल करते थे। आरोपी बॉयोडाटा मिलने की जानकारी देते थे और डिटेल बताने के बाद युवक को विश्वास में लेते थे। फिर पंजीकरण कराने के लिए दो हजार और कोरोना संक्रमण के कारण ऑनलाइन साक्षात्कार कराने का झांसा देकर पांच हजार रुपये खाते में ट्रांसफर करा लेते थे। इसके बाद नंबर ही ब्लॉक कर देते थे।
विज्ञापन
हर रोज 7 से 10 युवाओं को शिकार बनाते थे
पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर के नाम से जो नंबर आरोपियों ने लिए थे, उन्हीं से कॉल करते थे। आरोपी प्रत्येक युवा से दो से सात हजार रुपये तक ही ठगते थे। हर रोज 7 से 10 युवाओं को आरोपी ठगकर रकम बांट लेते थे। 22 दिसंबर से पीजी का कमरा किराये पर आरोपियों ने ले रखा था।
विज्ञापन
डीसीपी हरीश चंदर के अनुसार, एक व्यक्ति ने सूचना दी थी कि मामूरा गांव स्थित एक पीजी में कुछ लोग फर्जी कॉल सेंटर से नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं को ठग रहे हैं। सूचना के आधार पर एसीपी अब्दुल कादिर और कोतवाल विवेक त्रिवेदी ने यहां छापा मारा तो मनोज, संजय व विकास मिले। पूछताछ में तीनों आरोपियों ने बताया कि मॉनस्टर डॉटकाम वेबसाइट पर बेरोजगार नौकरी पाने के लिए बॉयोडाटा अपलोड करते हैं।
विज्ञापन
यहां से वे बॉयोडाटा चुरा लेते हैं। इसमें उन्हें नाम, पता और शिक्षा के साथ कंपनी आदि का पता चल जाता था। इसके बाद जिस कंपनी में युवा ने बॉयोडाटा डाला था, उसका कर्मचारी बनकर फोन पर कॉल करते थे। आरोपी बॉयोडाटा मिलने की जानकारी देते थे और डिटेल बताने के बाद युवक को विश्वास में लेते थे। फिर पंजीकरण कराने के लिए दो हजार और कोरोना संक्रमण के कारण ऑनलाइन साक्षात्कार कराने का झांसा देकर पांच हजार रुपये खाते में ट्रांसफर करा लेते थे। इसके बाद नंबर ही ब्लॉक कर देते थे।
विज्ञापन
हर रोज 7 से 10 युवाओं को शिकार बनाते थे
पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर के नाम से जो नंबर आरोपियों ने लिए थे, उन्हीं से कॉल करते थे। आरोपी प्रत्येक युवा से दो से सात हजार रुपये तक ही ठगते थे। हर रोज 7 से 10 युवाओं को आरोपी ठगकर रकम बांट लेते थे। 22 दिसंबर से पीजी का कमरा किराये पर आरोपियों ने ले रखा था।