{"_id":"5bef1513bdec22695a4bf42b","slug":"15423952069-ashram-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र सरकार के परामर्श को मानने के लिये राज्य नहीं बाध्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र सरकार के परामर्श को मानने के लिये राज्य नहीं बाध्य
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार का परामर्श मानने
के लिए राज्य बाध्य नहीं
- हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट के संबंध में दायर याचिका पर की टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी एडवाजरी (परामर्श) के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने केवल एडवायजरी जारी की थी और राज्य सरकारें इसे मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने पीयूष अहलूवालिया की याचिका खारिज करते हुये कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर अपने विवेक से फैसले ले सकती हैं। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को ई-सिगरेट सहित इस तरह के अन्य इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम के निर्माण, भंडारण, वितरण व बेचे जाने पर प्रतिबंध की सलाह दी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि ई-सिगरेट जैसे वैकल्पिक उत्पादों को लेकर राज्य अपने विवेक से निर्णय कर सकते हैं। याची का कहना था कि पेपर रोल्ड सिगरेट के स्थान पर ई-सिगरेट कम नुकसान करती है और सिगरेट की आदत छोड़ने में काफी कारगर है। याची ने केंद्र सरकार के परामर्श को चुनौती देते हुए कई देशों में हुए अध्ययन का हवाला देते हुए कहा था कि पेपर रोल्ड सिगरेट की तुलना में ई-सिगरेट 95 फीसदी कम नुकसानदेह है।
विज्ञापन
के लिए राज्य बाध्य नहीं
- हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट के संबंध में दायर याचिका पर की टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी एडवाजरी (परामर्श) के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने केवल एडवायजरी जारी की थी और राज्य सरकारें इसे मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने पीयूष अहलूवालिया की याचिका खारिज करते हुये कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर अपने विवेक से फैसले ले सकती हैं। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को ई-सिगरेट सहित इस तरह के अन्य इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम के निर्माण, भंडारण, वितरण व बेचे जाने पर प्रतिबंध की सलाह दी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि ई-सिगरेट जैसे वैकल्पिक उत्पादों को लेकर राज्य अपने विवेक से निर्णय कर सकते हैं। याची का कहना था कि पेपर रोल्ड सिगरेट के स्थान पर ई-सिगरेट कम नुकसान करती है और सिगरेट की आदत छोड़ने में काफी कारगर है। याची ने केंद्र सरकार के परामर्श को चुनौती देते हुए कई देशों में हुए अध्ययन का हवाला देते हुए कहा था कि पेपर रोल्ड सिगरेट की तुलना में ई-सिगरेट 95 फीसदी कम नुकसानदेह है।
विज्ञापन