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एंटीबॉयोटिक दवाओं के लिए जारी की गाइडलाइन
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:35 AM IST
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एंटीबायोटिक दवाओं के लिए गाइडलाइन जारी
- केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल में मनाया जा रहा है जागरूकता सप्ताह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूरी दुनिया में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल इतने धड़ल्ले से होता है कि हर पांच से सात साल के भीतर एक एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर बेअसर साबित होने लगता है। इसकी वजह से साल भर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है क्योंकि उनके बैक्टीरिया पर सभी एंटीबायोटिक बेअसर साबित हो जाती हैं। वहीं, दूसरी स्थिति यह है कि पिछले कई वर्षों में एंटीबायोटिक में नए अणु (मॉलिक्यूल) की खोज नहीं हुई है। इसे देखते हुए आरएमएल अस्पताल में एंटीबायोटिक के प्रयोग को लेकर जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसमें शुक्रवार को अस्पताल के लिए एक गाइडलाइन भी जारी की गई।
इस अवसर पर अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. नंदिनी दुग्गल ने बताया कि अभी तक हर विभाग में हर डॉक्टर अपने अनुसार एंटीबायोटिक लिखता है। इससे कई बार प्राथमिक स्तर के एंटीबायोटिक की जगह पर अंतिम स्तर का एंटीबायोटिक दे दिया जाता है, जिससे उसके बाद अन्य सभी एंटीबायोटिक अप्रभावी हो जाते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसे देखते हुए सभी विभागों के अध्ययन और सुझाव से एक गाइडलाइन बनाई गई है। इसमें बताया गया है कि किस विभाग में किस स्तर पर कौन सा एंटीबायोटिक दिया जाना चाहिए।
अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. तनेजा का कहना है कि इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस जागरूकता सप्ताह का नाम अवॉयड एंटीबायोटिक अब्यूज रखा है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. अरविंद ने बताया कि इस सप्ताह में मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक करने के लिए पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, लेक्चर भी कराए गए। इसके साथ ही हाथ धोने के सही तरीका बताया गया।
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- केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल में मनाया जा रहा है जागरूकता सप्ताह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूरी दुनिया में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल इतने धड़ल्ले से होता है कि हर पांच से सात साल के भीतर एक एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर बेअसर साबित होने लगता है। इसकी वजह से साल भर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है क्योंकि उनके बैक्टीरिया पर सभी एंटीबायोटिक बेअसर साबित हो जाती हैं। वहीं, दूसरी स्थिति यह है कि पिछले कई वर्षों में एंटीबायोटिक में नए अणु (मॉलिक्यूल) की खोज नहीं हुई है। इसे देखते हुए आरएमएल अस्पताल में एंटीबायोटिक के प्रयोग को लेकर जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसमें शुक्रवार को अस्पताल के लिए एक गाइडलाइन भी जारी की गई।
इस अवसर पर अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. नंदिनी दुग्गल ने बताया कि अभी तक हर विभाग में हर डॉक्टर अपने अनुसार एंटीबायोटिक लिखता है। इससे कई बार प्राथमिक स्तर के एंटीबायोटिक की जगह पर अंतिम स्तर का एंटीबायोटिक दे दिया जाता है, जिससे उसके बाद अन्य सभी एंटीबायोटिक अप्रभावी हो जाते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसे देखते हुए सभी विभागों के अध्ययन और सुझाव से एक गाइडलाइन बनाई गई है। इसमें बताया गया है कि किस विभाग में किस स्तर पर कौन सा एंटीबायोटिक दिया जाना चाहिए।
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अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. तनेजा का कहना है कि इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस जागरूकता सप्ताह का नाम अवॉयड एंटीबायोटिक अब्यूज रखा है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. अरविंद ने बताया कि इस सप्ताह में मरीजों और उनके परिजनों को जागरूक करने के लिए पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, लेक्चर भी कराए गए। इसके साथ ही हाथ धोने के सही तरीका बताया गया।
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