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दिल्ली के प्रदूषण का असर जानेगा एम्स, शुरू हुआ अध्ययन
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:15 AM IST
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दिल्ली के प्रदूषण पर शाेध करेगा एम्स
अगले वर्ष मार्च माह तक शोध के परिणाम सामने आएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । हर साल लाखों मरीजों को बीमार कर देने वाले दिल्ली के प्रदूषण पर एम्स के डॉक्टर प्रदूषण सेंसर के जरिये शोध करेंगे। इसकी शुरुआत डॉक्टरों ने कर दी है। एम्स की ओपीडी में हर दिन पहुंच रहे मरीजों को भी अध्ययन में शामिल किया जाएगा। बताया जा रहा है कि अगले वर्ष मार्च माह तक शोध के परिणाम सामने आएंगे। एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. करन मदान ने कहा कि ये प्रदूषण सेंसर हल्के हैं, कमर पर आसानी से पहने जा सकने वाले हैं। ये पूरे दिन आसपास के वायु प्रदूषण पर जरूरी जानकारी संग्रहित करेंगे। आईआईटी-दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन और चेन्नई के श्री रामचंद्र विवि के साथ मिलकर कराये जा रहे अध्ययन के तहत बच्चों को एक सप्ताह के लिए ये सेंसर दिए जाएंगे। डा. मदान ने कहा कि ये उच्च गुणवत्ता वाले सेंसर हमें इस बारे में जानकारी देंगे कि कोई बच्चा स्कूल में, रास्ते में या घर पर कितने वायु प्रदूषण के संपर्क में आता है। इससे हमें उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का पता लगाने में मदद मिलेगी। एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया के अनुसार ये सेंसर एक बच्चे को एक सप्ताह के लिए दिए जाएंगे। उपयुक्त लगा तो ये लंबी अवधि के लिए भी दिए जा सकते हैं।
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अगले वर्ष मार्च माह तक शोध के परिणाम सामने आएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । हर साल लाखों मरीजों को बीमार कर देने वाले दिल्ली के प्रदूषण पर एम्स के डॉक्टर प्रदूषण सेंसर के जरिये शोध करेंगे। इसकी शुरुआत डॉक्टरों ने कर दी है। एम्स की ओपीडी में हर दिन पहुंच रहे मरीजों को भी अध्ययन में शामिल किया जाएगा। बताया जा रहा है कि अगले वर्ष मार्च माह तक शोध के परिणाम सामने आएंगे। एम्स के पल्मोनोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. करन मदान ने कहा कि ये प्रदूषण सेंसर हल्के हैं, कमर पर आसानी से पहने जा सकने वाले हैं। ये पूरे दिन आसपास के वायु प्रदूषण पर जरूरी जानकारी संग्रहित करेंगे। आईआईटी-दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन और चेन्नई के श्री रामचंद्र विवि के साथ मिलकर कराये जा रहे अध्ययन के तहत बच्चों को एक सप्ताह के लिए ये सेंसर दिए जाएंगे। डा. मदान ने कहा कि ये उच्च गुणवत्ता वाले सेंसर हमें इस बारे में जानकारी देंगे कि कोई बच्चा स्कूल में, रास्ते में या घर पर कितने वायु प्रदूषण के संपर्क में आता है। इससे हमें उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का पता लगाने में मदद मिलेगी। एम्स के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया के अनुसार ये सेंसर एक बच्चे को एक सप्ताह के लिए दिए जाएंगे। उपयुक्त लगा तो ये लंबी अवधि के लिए भी दिए जा सकते हैं।