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लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन की राह नहीं आसान

Tue, 13 Nov 2018 05:57 AM IST
Updated Tue, 13 Nov 2018 05:57 AM IST
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लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन की राह नहीं आसान
आशा वर्कर्स के सहारे लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन
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-विभाग को नहीं मिल रहे मेल वर्कर्स, लगभग पांच हजार की है जरूरत
. कई जगह पत्र लिखकर मांगे गए वर्कर्स
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 नवंबर को लेप्रोसी केस डिटेक्शन कैंपेन तो शुरू कर दिया गया, लेकिन अब मेल वर्कर्स की समस्या उनके आड़े आ रही है। आलम यह है कि अब इस कैंपेन के लिए विभाग को मेल वर्कर्स नहीं मिल रहे हैं, जिसके चलते फिलहाल वह आशा वर्कर्स पर ही निर्भर हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक विभाग को लगभग पांच हजार मेल वर्कर्स की जरूरत है जो आशा वर्कर्स के साथ घर-घर में जाकर लेप्रोसी (कुष्ठ) के मरीजों को पहचान करेेंगे। मेल वर्कर्स के लिए कई जगह पत्र भी लिखे गए हैं कि इस प्रोग्राम को ठीक ढंग से चलाने के लिए उन्हें मेल वर्कर्स मुहैया करवाएं जाएं। इतना हीं नहीं आशा वर्कर्स से भी यह कहा जा रहा है कि वह अपने पति या अन्य किसी पुरुष को इस प्रोग्राम से जोड़ने के लिए मदद करें।
इस बारे में स्टेट लेप्रोसी ऑफिसर डॉ. के. एस भघोटिया का कहना है कि आशा वर्कर्स इस प्रोग्राम को चला रही हैं, लेकिन इस काम के लिए मेल वर्कर्स की बेहद जरूरत है, जिसकी फिलहाल कमी चल रही है। पूरी दिल्ली में लेप्रोसी (कुष्ठ) के मरीजों को पहचान करने के लिए हमें पांच हजार मेल वर्कर्स की जरूरत है और इन्हें मुहैया करवाने के लिए कई विभागों में बात की जा रही है। जल्द ही हमें मेल वर्कर्स मिल जाएंगे। उनका कहना है कि प्रोग्राम की शुरुआत 10 नवंबर से हो गई है, लेकिन मुख्य रूप से यह आज शुरू होगा क्योंकि शनिवार और रविवार होने की वजह से वर्कर्स फील्ड में नहीं जा सके।
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स्लम एरिया में है लेप्रोसी के अधिक मरीज
डॉ. भघोटिया का कहना है कि हमारा मुख्य फोकस स्लम एरिया रहेंगे क्योंकि लेप्रोसी के सबसे ज्यादा मरीज स्लम एरिया में ही पाए जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लेप्रोसी छूने से भी फैलती है और यदि यहां पर किसी व्यक्ति को लेप्रोसी होती है तो वह किसी अस्पताल में जाने की बजाय आस-पास के किसी क्लीनिक या कैमिस्ट से दवा ले लेता है, जिससे लेप्रोसी पर रोक नहीं लगती। फिर यह दूसरे व्यक्तियों से मिलते भी रहते हैं। उनका कहना है कि लेप्रोसी की अगर पहली डोज अस्पताल से ले ली जाए तो यह फैलने से रूक जाती है।
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दिल्ली में लेप्रोसी के लगभग दो हजार मरीज
कुछ दिनों पहले स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया था कि दिल्ली में लेप्रोसी दस हजार में से किसी एक व्यक्ति को होती है और इस वक्त दिल्ली में लेप्रोसी के लगभग दो हजार मरीज है। इसके अलावा कई मरीज ऐसे हैं जिन्हें एक बार दवा देने के बाद डिटेक्ट ही नहीं किया जा सकता क्योंकि यह लोग अपने घर का गलत पता और गलत मोबाइल नंबर लिखवा देते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि नॉर्थ ईस्ट, ईस्ट और साउथ ईस्ट में लेप्रोसी का एक भी मरीज नहीं है।
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