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डीएसएसएसबी की शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा में जातिसूचक सवाल पर दिल्ली सरकार गंभीर
Updated Mon, 15 Oct 2018 05:08 AM IST
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शिक्षक परीक्षा में जातिसूचक
प्रश्न पर दिल्ली सरकार गंभीर
- डीएसएसएसबी की ओर से आयोजित की गई थी प्रतियोगिता
- दिल्ली सरकार के मंत्री ने जताई आपत्ति, मुख्य सचिव से कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डीएसएसएसबी की शिक्षक परीक्षा के प्रश्न पत्र में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिक्षकों की परीक्षा में ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे तो शिक्षक छात्रों को कैसे आदर्श शब्दों का प्रयोग सिखाएंगे? इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस संबंध में वह चीफ सेक्रेटरी से जांच की मांग करेंगे।
दिल्ली सरकार का कहना है कि रविवार को डीएसएसएसबी की शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित हुई। इसमें हिंदी और बोध अनुभाग के प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल के उत्तर में कथित तौर पर जाति विशेष से संबंधित जातिसूचक शब्दों (विकल्पों) का इस्तेमाल किया गया। इस पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि किसी भी भाषा में शब्द-अपशब्द हो सकते हैं, पर उपयोगकर्ता को इस्तेमाल करते समय ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर खेद जताते हुए पूछा है कि क्या यह सच है कि प्रश्न पत्र में किसी जाति विशेष और समुदाय के लेकर पूछे गए प्रश्न हैं? यदि हां तो इसका क्या तात्पर्य है? अगर ऐसा किया जा रहा है कि तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीएसएसएसबी के पास यह विकल्प था कि वह हिंदी की परीक्षा के प्रश्नपत्र में हिंदी साहित्य के वाल्मीकि, तुलसी, सूर, कबीर, रविदास दिनकर, मैथिलीशरण, निराला आदि को लेकर प्रश्न पूछ सकता था, लेकिन जाति आधारित सवाल पूछकर डीएसएसएसबी ने संविधान, हिंदी भाषा और देश की संस्कृति की गरिमा को चोट पहुंचाई है।
एलजी के अधीन है विभाग
उनका कहना है कि सर्विस डिपार्टमेंट अब भी उपराज्यपाल के अधीन है। इसी विभाग के डीएसएसएसबी विभाग की ओर से प्राइमरी टीचर के लिए प्रतियोगिता परीक्षा के प्रश्न संख्या 61 में विवादित सवाल पूछा गया है। मंत्री ने कहा कि सोमवार को वह इस मुद्दे को लेकर चीफ सेक्रेटरी से मिलेंगे। ताकि इस मामले की अंतरिम जांच कराई जा सके।
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प्रश्न पर दिल्ली सरकार गंभीर
- डीएसएसएसबी की ओर से आयोजित की गई थी प्रतियोगिता
- दिल्ली सरकार के मंत्री ने जताई आपत्ति, मुख्य सचिव से कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डीएसएसएसबी की शिक्षक परीक्षा के प्रश्न पत्र में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शिक्षकों की परीक्षा में ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे तो शिक्षक छात्रों को कैसे आदर्श शब्दों का प्रयोग सिखाएंगे? इस तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस संबंध में वह चीफ सेक्रेटरी से जांच की मांग करेंगे।
दिल्ली सरकार का कहना है कि रविवार को डीएसएसएसबी की शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित हुई। इसमें हिंदी और बोध अनुभाग के प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल के उत्तर में कथित तौर पर जाति विशेष से संबंधित जातिसूचक शब्दों (विकल्पों) का इस्तेमाल किया गया। इस पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि किसी भी भाषा में शब्द-अपशब्द हो सकते हैं, पर उपयोगकर्ता को इस्तेमाल करते समय ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे पर खेद जताते हुए पूछा है कि क्या यह सच है कि प्रश्न पत्र में किसी जाति विशेष और समुदाय के लेकर पूछे गए प्रश्न हैं? यदि हां तो इसका क्या तात्पर्य है? अगर ऐसा किया जा रहा है कि तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीएसएसएसबी के पास यह विकल्प था कि वह हिंदी की परीक्षा के प्रश्नपत्र में हिंदी साहित्य के वाल्मीकि, तुलसी, सूर, कबीर, रविदास दिनकर, मैथिलीशरण, निराला आदि को लेकर प्रश्न पूछ सकता था, लेकिन जाति आधारित सवाल पूछकर डीएसएसएसबी ने संविधान, हिंदी भाषा और देश की संस्कृति की गरिमा को चोट पहुंचाई है।
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एलजी के अधीन है विभाग
उनका कहना है कि सर्विस डिपार्टमेंट अब भी उपराज्यपाल के अधीन है। इसी विभाग के डीएसएसएसबी विभाग की ओर से प्राइमरी टीचर के लिए प्रतियोगिता परीक्षा के प्रश्न संख्या 61 में विवादित सवाल पूछा गया है। मंत्री ने कहा कि सोमवार को वह इस मुद्दे को लेकर चीफ सेक्रेटरी से मिलेंगे। ताकि इस मामले की अंतरिम जांच कराई जा सके।
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