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किसानों की सहमति न मिली तो पनप सकता है असंतोष
Updated Sat, 11 Aug 2018 10:24 PM IST
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जेवर एयरपोर्ट से संबंधित
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हेडिंग: किसानों की सहमति नहीं मिली तो पनपेगा असंतोष
पूर्व में भी मनमाना रवैया अख्तियार करती आईं हैं सरकारें
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा/जेेवर। जेवर में नोएडा एयरपोर्ट के लिए यदि किसानों से सहमति नहीं ली गई तो किसानों में गहरा असंतोष पनप सकता है। पूर्व में भी जिले में घोड़ी बछेड़ा और भट्टा पारसौल जैसे दो कांड हो चुके हैं। जिनमें जनांदोलन से लेकर जनहानि तक हो गई थी।
पिछले दिनों एयरपोर्ट के लिए सामाजिक प्रभाव के आकलन और जेवर के किसानों से सहमति बनाने के लिए प्रशासन की किसानों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही थीं। इसमें शुरुआत से ही किसानों ने चार गुना मुआवजे की मांग रख दी थी। इसके अलावा अन्य मुद्दे भी रखे गए थे। दो सहमति बैठकों में विरोध के बाद किसानों ने अन्य सभी बैठकों का बहिष्कार भी कर दिया था। अब यमुना प्राधिकरण के प्रस्तुतिकरण में बताया गया है कि सरकार अपने उपयोग, अधिकार व नियंत्रण और लोक प्रायोजन के लिए भूमि लेती है तो इसके लिए किसानों की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे में एक ओर जहां किसान संगठन इसका विरोध करेंगे। वहीं, निकट वर्ष में लोकसभा चुनावों के कारण राजनीतिक दल भी आग में रोटियां सेक सकते हैं।
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सरकार बिना सहमति के यदि किसानों की जमीन लेती है तो यह किसानों के साथ घोर अन्याय होगा। सभी किसान एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे।
- भगवान सिंह, पूर्व प्रधान रोही गांव
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किसानों की भूमि यदि सरकार षड्यंत्र कर छीनने का प्रयास करेगी तो किसान इसका विरोध करेंगे। पूर्व में भी सरकार ने भूमि छीनने का प्रयास किया था जिसके बाद भट्टा पारसौल जैसी घटना हुई थी।
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- देवेंद्र भारद्वाज, गांव बनवारीवास
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हेडिंग: किसानों की सहमति नहीं मिली तो पनपेगा असंतोष
पूर्व में भी मनमाना रवैया अख्तियार करती आईं हैं सरकारें
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा/जेेवर। जेवर में नोएडा एयरपोर्ट के लिए यदि किसानों से सहमति नहीं ली गई तो किसानों में गहरा असंतोष पनप सकता है। पूर्व में भी जिले में घोड़ी बछेड़ा और भट्टा पारसौल जैसे दो कांड हो चुके हैं। जिनमें जनांदोलन से लेकर जनहानि तक हो गई थी।
पिछले दिनों एयरपोर्ट के लिए सामाजिक प्रभाव के आकलन और जेवर के किसानों से सहमति बनाने के लिए प्रशासन की किसानों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही थीं। इसमें शुरुआत से ही किसानों ने चार गुना मुआवजे की मांग रख दी थी। इसके अलावा अन्य मुद्दे भी रखे गए थे। दो सहमति बैठकों में विरोध के बाद किसानों ने अन्य सभी बैठकों का बहिष्कार भी कर दिया था। अब यमुना प्राधिकरण के प्रस्तुतिकरण में बताया गया है कि सरकार अपने उपयोग, अधिकार व नियंत्रण और लोक प्रायोजन के लिए भूमि लेती है तो इसके लिए किसानों की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे में एक ओर जहां किसान संगठन इसका विरोध करेंगे। वहीं, निकट वर्ष में लोकसभा चुनावों के कारण राजनीतिक दल भी आग में रोटियां सेक सकते हैं।
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सरकार बिना सहमति के यदि किसानों की जमीन लेती है तो यह किसानों के साथ घोर अन्याय होगा। सभी किसान एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे।
- भगवान सिंह, पूर्व प्रधान रोही गांव
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किसानों की भूमि यदि सरकार षड्यंत्र कर छीनने का प्रयास करेगी तो किसान इसका विरोध करेंगे। पूर्व में भी सरकार ने भूमि छीनने का प्रयास किया था जिसके बाद भट्टा पारसौल जैसी घटना हुई थी।
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- देवेंद्र भारद्वाज, गांव बनवारीवास