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अस्पताल में मरीज के साथ तिमारदार को भी संक्रमण का खतरा

Sun, 05 Aug 2018 10:04 PM IST
Updated Sun, 05 Aug 2018 10:04 PM IST
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अस्पताल में मरीज के साथ तिमारदार को भी संक्रमण का खतरा
अस्पताल में मरीज के साथ तिमारदार को भी संक्रमण का खतरा
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-हर मरीज को भर्ती होने के 48 घंटे बाद ही होने लगता है खतरा
-ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने भी एक रिसर्च में किया है दावा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की हाल ही में आई रिसर्च ने अस्पतालों पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। इस रिसर्च के अनुसार अस्पतालों में एक ऐसे वैक्टीरिया की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है जो इंसान की आंत में रहता है। चूंकि देश के सरकारी और निजी अस्पतालों में भी संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसलिए विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली सहित देश के अन्य अस्पतालों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। इनके मुताबिक अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे बाद मरीज और उसके तिमारदार संक्रमण का शिकार होने लगते हैं। मरीज को बीमारी के अलावा 10 फीसदी संक्रमण भी प्रभावित करता है। रिसर्च कहती है कि अस्पताल में मिलने वाला वैक्टीरिया इंसान की आंत में होता है। इसे एंटरोकोकस फेशियम कहा जाता है। ये कैथेटर, वेंटिलेटर के माध्यम से फैल सकता है। दुनिया भर में अस्पतालों से प्राप्त होने वाले जीवाणु संक्रमण के 10 मामलों में से 1 के लिए एंटरोकॉसी जिम्मेदार है। अस्पतालों में संक्रमण पर जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने और भी कई अहम जानकारियां देते हुए कहा कि अस्पताल जाने वाले मरीज और उसके रिश्तेदारों को इसकी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अस्पताल से मिला संक्रमण भर्ती होने के 48 घंटे बाद होता है। यह मूल स्थिति से संबंधित नहीं है और प्रवेश के समय मरीज या उसके तिमारदार में न तो मौजूद होता है और न ही इनक्यूबेटिंग है। अस्पतालों में सबसे आम नोजोकोमियल नामक संक्रमण है। इसके अलावा अस्पताल में शल्य चिकित्सा घाव संक्रमण, श्वसन संक्रमण, जेनिटोरिनरी संक्रमण और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण भी मरीजों में पहचाने गए हैं।

उन्होंने बताया कि इन संक्रमणों से बचने के लिए प्रत्येक रोगी और उसके रिश्तेदारों को यह जानने की जरूरत है कि प्रत्येक एडमीशन में नए संक्रमण का 10 प्रतिशत जोखिम हो सकता है। इससे बचने के लिए हाथों की स्वच्छता, हाथों में ग्लब्स, साफ-सफाई, कचरे और लिनन को सावधानी से हैंडल करना और रोगी के कमरे में प्रवेश पर डिस्पोजेबल गाउन, दस्ताने और आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें इत्यादि सुझाव दिए जाते हैं।
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