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लड़कियां अपने माता-पिता से बात भी नहीं करना चाहती, क्या ये आध्यात्मिक जागृति है?-हाईकोई
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:40 PM IST
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लड़कियां माता-पिता से बात भी नहीं करना चाहती, क्या ये आध्यात्मिक जागृति है : हाईकोर्ट
- वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी स्थित आश्रम के खिलाफ हाईकोर्ट का कड़ा रुख
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फरार बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी स्थित आश्रम में दी जा रही शिक्षा पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। पीठ ने कहा कि जहां बेटी अपने माता-पिता से बात करने से इंकार करे और उनके साथ दुर्व्यवहार करे, क्या यहीं आश्रम की आध्यात्मिक जागृति है, जो आश्रम में रहने वालों को सिखाई गई?
दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य कार्यवाहक न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने गौर किया कि जैसा व्यवहार आश्रम में रहने वाली लड़कियों और महिलाओं ने अपने परिवारों के साथ किया वैसा तो अपराधी भी नहीं करते। पीठ ने कहा कि ये कैसी आध्यात्मिक जागृति की शिक्षा है, जिसमें तुम अपने परिवार, माता-पिता का ही त्याग कर दो। क्या एक बेटी की आध्यात्मिक जागृति यही है कि वह अपने माता-पिता से बात करने से ही इंकार कर दे। पीठ ने कहा कि यहां 15 महिलाओं को लाया गया, जिन्होंने अपने माता-पिता और परिजनों से बेहद बुरे तरीके से बात की।
याचिका में भगौड़े बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी स्थित आश्रम में महिलाओं और लड़कियों को कैद करके रखने का आरोप लगाया गया है। पीठ ने कहा कि हम नहीं चाहते कि किसी आध्यात्मिक आश्रम चलाने वाले के खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी हो, लेकिन कानून से भागने पाले वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ यह नोटिस जारी करना पड़ा। इस पर सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि वह बाबा के खिलाफ वारंट तैयार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुख्ता जानकारियों के अभाव में ऐसा नहीं किया जा सका।
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इस मामले में कोर्ट ने पहले तीन सदस्यों का पैनल बनाया था, जिसमें दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल, वकील राव और अजय वर्मा को आश्रम की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस जांच के दौरान पैनल को पता लगा कि आश्रम में लड़कियों और महिलाओं से उनके परिवारों और माता-पिता के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पत्र और शिकायत लिखवाई जाती थीं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को करनी तय की है।
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- वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी स्थित आश्रम के खिलाफ हाईकोर्ट का कड़ा रुख
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फरार बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी स्थित आश्रम में दी जा रही शिक्षा पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। पीठ ने कहा कि जहां बेटी अपने माता-पिता से बात करने से इंकार करे और उनके साथ दुर्व्यवहार करे, क्या यहीं आश्रम की आध्यात्मिक जागृति है, जो आश्रम में रहने वालों को सिखाई गई?
दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य कार्यवाहक न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने गौर किया कि जैसा व्यवहार आश्रम में रहने वाली लड़कियों और महिलाओं ने अपने परिवारों के साथ किया वैसा तो अपराधी भी नहीं करते। पीठ ने कहा कि ये कैसी आध्यात्मिक जागृति की शिक्षा है, जिसमें तुम अपने परिवार, माता-पिता का ही त्याग कर दो। क्या एक बेटी की आध्यात्मिक जागृति यही है कि वह अपने माता-पिता से बात करने से ही इंकार कर दे। पीठ ने कहा कि यहां 15 महिलाओं को लाया गया, जिन्होंने अपने माता-पिता और परिजनों से बेहद बुरे तरीके से बात की।
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याचिका में भगौड़े बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के रोहिणी स्थित आश्रम में महिलाओं और लड़कियों को कैद करके रखने का आरोप लगाया गया है। पीठ ने कहा कि हम नहीं चाहते कि किसी आध्यात्मिक आश्रम चलाने वाले के खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी हो, लेकिन कानून से भागने पाले वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ यह नोटिस जारी करना पड़ा। इस पर सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि वह बाबा के खिलाफ वारंट तैयार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुख्ता जानकारियों के अभाव में ऐसा नहीं किया जा सका।
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इस मामले में कोर्ट ने पहले तीन सदस्यों का पैनल बनाया था, जिसमें दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल, वकील राव और अजय वर्मा को आश्रम की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस जांच के दौरान पैनल को पता लगा कि आश्रम में लड़कियों और महिलाओं से उनके परिवारों और माता-पिता के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर पत्र और शिकायत लिखवाई जाती थीं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को करनी तय की है।