{"_id":"5b59eae14f1c1b52748b7030","slug":"15326194811042-grnoida-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुढ़ावली में नकदी से खरीदी गई 42 हेक्टेयर जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुढ़ावली में नकदी से खरीदी गई 42 हेक्टेयर जमीन
Updated Thu, 26 Jul 2018 09:16 PM IST
विज्ञापन
हाथरस में जमीन घोटाला
------------------------------
हेडिंग: मुढ़ावली में नकद खरीदी गई 42 हेक्टेयर जमीन
जांच पूरी, रिपोर्ट जल्द चेयरमैन को सौंपी जाएगी
मुआवजे के सभी चेक 30 लाख से कम के बने
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। हाथरस के मुढ़ावली में जमीन खरीद घोटाले की जांच पूरी हो गई है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने किसानों से 42 हेक्टेयर जमीन नकदी में ही खरीदी थी। स्टांप विभाग में उसकी रजिस्ट्री भी हो गई और कुछ ही दिनों बाद यमुना प्राधिकरण ने उसे खरीद भी लिया। उसका मुआवजा भी बांट दिया। जानकार मानते हैं कि ऐसा आयकर की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया गया है।
यमुना एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए हाथरस के मुढ़ावली गांव के किसानों से करीब 42 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। जमीन देने वाले किसानों को विकसित एरिया में सात फीसदी भूखंड देना था। इसी की आड़ लेकर 2013 में हाथरस में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई, चूंकि जमीन खरीदने से पहले नियोजन विभाग की रिपोर्ट लगती है। हाथरस में जमीन खरीदने में नियोजन विभाग की रिपोर्ट लगी कि आगरा व मथुरा के किसानों को भी हाथरस में सात फीसदी आवासीय भूखंड दिया जाना है, इसलिए जमीन खरीदना जरूरी है। इसके बाद मास्टर प्लान से बाहर की जमीन भी खरीद ली। यहां भी जमीन खरीदने में अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जो मथुरा में जमीन घोटाले में आरोपी हैं। हाथरस में भी पहले इन लोगों ने किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीद ली। उसके बाद कुछ समय बाद प्राधिकरण ने उसे खरीद लिया। इसमें भी 125 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन खरीदी गई। कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया। नोएडा के सेक्टर 25 निवासी रमेश बंसल ने यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार से बीते साल नवंबर में शिकायत की। इसकी जांच शुरू हुई जो कि अब पूरी हो गई है। जांच में दो बातें प्रमुख रूप से सामने आई है। पहली, यह कि सभी जमीन किसानों को नकद देकर खरीदी गई। दूसरे, प्राधिकरण ने जब इन लोगों से जमीन खरीदा तो 30 लाख रुपये से कम कीमत के ही चेक दिए गए। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि 30 लाख रुपये से अधिक के लेनदेन का ब्योरा आयकर तक जाता है। उससे बचने के लिए 30 लाख रुपये से कम के चेक बनाए गए। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट को जल्द चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार को सौंपी जाएगी। अगले सप्ताह इस मामले में एफआईआर दर्ज हो सकती है।
-----------
स्ट्रीट लाइटों के चोरी होने की होगी जांच
ग्रेटर नोएडा। यीडा के अधीन गांवों कस्बों व सड़कों में लगाई गईं स्ट्रीट लाइट गायब हो गई हैं। इनको प्राधिकरण के ही लोगों ने उतरवाने की आशंका है। इसलिए प्राधिकरण इसकी जांच कराएगा। प्राधिकरण के जीएम प्रोजेक्ट देवेंद्र बालियान इसकी जांच करेंगे और तीन दिन में रिपोर्ट देंगे। यमुना प्राधिकरण ने अपने अधीन गांवों, कस्बों व सड़कों में स्ट्रीट लाइटें लगवाई थीं। अब अधिकतर स्ट्रीट लाइटें गायब हो गई हैं। ये लाइट कहां गईं और क्यों उतरवाई गईं, इसका कोई अता-पता नहीं है। प्राधिकरण ने करीब 4 करोड़ की स्ट्रीट लाइट लगवाई थीं। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने इस मामले की शिकायत यमुना प्राधिकरण से की। प्राधिकरण के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने मामले की जांच जीएम प्रोजेक्ट देवेंद्र बालियान को सौंपी है। उन्होंने तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
------------------------------
हेडिंग: मुढ़ावली में नकद खरीदी गई 42 हेक्टेयर जमीन
जांच पूरी, रिपोर्ट जल्द चेयरमैन को सौंपी जाएगी
मुआवजे के सभी चेक 30 लाख से कम के बने
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। हाथरस के मुढ़ावली में जमीन खरीद घोटाले की जांच पूरी हो गई है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने किसानों से 42 हेक्टेयर जमीन नकदी में ही खरीदी थी। स्टांप विभाग में उसकी रजिस्ट्री भी हो गई और कुछ ही दिनों बाद यमुना प्राधिकरण ने उसे खरीद भी लिया। उसका मुआवजा भी बांट दिया। जानकार मानते हैं कि ऐसा आयकर की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया गया है।
यमुना एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए हाथरस के मुढ़ावली गांव के किसानों से करीब 42 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। जमीन देने वाले किसानों को विकसित एरिया में सात फीसदी भूखंड देना था। इसी की आड़ लेकर 2013 में हाथरस में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई, चूंकि जमीन खरीदने से पहले नियोजन विभाग की रिपोर्ट लगती है। हाथरस में जमीन खरीदने में नियोजन विभाग की रिपोर्ट लगी कि आगरा व मथुरा के किसानों को भी हाथरस में सात फीसदी आवासीय भूखंड दिया जाना है, इसलिए जमीन खरीदना जरूरी है। इसके बाद मास्टर प्लान से बाहर की जमीन भी खरीद ली। यहां भी जमीन खरीदने में अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जो मथुरा में जमीन घोटाले में आरोपी हैं। हाथरस में भी पहले इन लोगों ने किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीद ली। उसके बाद कुछ समय बाद प्राधिकरण ने उसे खरीद लिया। इसमें भी 125 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन खरीदी गई। कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया। नोएडा के सेक्टर 25 निवासी रमेश बंसल ने यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार से बीते साल नवंबर में शिकायत की। इसकी जांच शुरू हुई जो कि अब पूरी हो गई है। जांच में दो बातें प्रमुख रूप से सामने आई है। पहली, यह कि सभी जमीन किसानों को नकद देकर खरीदी गई। दूसरे, प्राधिकरण ने जब इन लोगों से जमीन खरीदा तो 30 लाख रुपये से कम कीमत के ही चेक दिए गए। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि 30 लाख रुपये से अधिक के लेनदेन का ब्योरा आयकर तक जाता है। उससे बचने के लिए 30 लाख रुपये से कम के चेक बनाए गए। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट को जल्द चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार को सौंपी जाएगी। अगले सप्ताह इस मामले में एफआईआर दर्ज हो सकती है।
विज्ञापन
-----------
स्ट्रीट लाइटों के चोरी होने की होगी जांच
ग्रेटर नोएडा। यीडा के अधीन गांवों कस्बों व सड़कों में लगाई गईं स्ट्रीट लाइट गायब हो गई हैं। इनको प्राधिकरण के ही लोगों ने उतरवाने की आशंका है। इसलिए प्राधिकरण इसकी जांच कराएगा। प्राधिकरण के जीएम प्रोजेक्ट देवेंद्र बालियान इसकी जांच करेंगे और तीन दिन में रिपोर्ट देंगे। यमुना प्राधिकरण ने अपने अधीन गांवों, कस्बों व सड़कों में स्ट्रीट लाइटें लगवाई थीं। अब अधिकतर स्ट्रीट लाइटें गायब हो गई हैं। ये लाइट कहां गईं और क्यों उतरवाई गईं, इसका कोई अता-पता नहीं है। प्राधिकरण ने करीब 4 करोड़ की स्ट्रीट लाइट लगवाई थीं। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने इस मामले की शिकायत यमुना प्राधिकरण से की। प्राधिकरण के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने मामले की जांच जीएम प्रोजेक्ट देवेंद्र बालियान को सौंपी है। उन्होंने तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन