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- बिना अनुमति बोरवेल से भू-जल निकालने का आरोप
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:04 PM IST
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गाजियाबाद के खास ध्यानार्थ
गाजियाबाद-हापुड़ की औद्योगिक
इकाइयों के भू-जल दोहन पर रोक
- एनजीटी ने प्राधिकरण से मांगी स्थिति रिपोर्ट, बिना अनुमति बोरवेल से भू-जल निकालने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और हापुड़ जिले में गिरते भू-जल स्तर को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक इकाइयों के बोरवेल के जरिये भू-जल दोहन करने पर रोक लगा दी है। प्रधान पीठ ने केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) से कहा है कि अगले आदेश तक औद्योगिक इकाइयों में भू-जल का दोहन नहीं होना चाहिए। पीठ ने इस मामले में प्राधिकरण को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुशील राघव के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि हाल ही में दिल्ली के भीतर नरेला-बवाना औद्योगिक इकाइयों के भू-जल दोहन पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है। वही आदेश गाजियाबाद और हापुड़ के लिए भी लागू होगा। याची सुशील राघव का आरोप है कि संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां बिना केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण की अनुमति के बोरवेल के जरिये अवैध तरीके से भू-जल का दोहन कर रही हैं, जबकि सीजीडब्ल्यूए को अवैध भू-जल दोहन पर रोक लगाने के लिए कई बार एनजीटी की ओर से आदेश जारी किया जा चुका है। याची का आरोप है कि सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां बिना अनुमति भू-जल दोहन कर रही हैं, जबकि क्षेत्र में पहले से ही भू-जल का स्तर काफी नीचे है।
एनजीटी ने बीते वर्ष 13 सितंबर को अपने विस्तृत आदेश में सीजीडब्ल्यूए को निर्देश दिया था कि वह गाजियाबाद और हापुड़ स्थित सभी ऐसी औद्योगिक इकाइयों की बोरवेल को सील करे, जिन्होंने उससे अनुमति न ली हो या फिर एनजीटी के जरिये 2015 में अनुमति हासिल करने की मोहलत संबंधी आदेश का अनुपालन न किया हो।
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गाजियाबाद-हापुड़ की औद्योगिक
इकाइयों के भू-जल दोहन पर रोक
- एनजीटी ने प्राधिकरण से मांगी स्थिति रिपोर्ट, बिना अनुमति बोरवेल से भू-जल निकालने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और हापुड़ जिले में गिरते भू-जल स्तर को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक इकाइयों के बोरवेल के जरिये भू-जल दोहन करने पर रोक लगा दी है। प्रधान पीठ ने केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) से कहा है कि अगले आदेश तक औद्योगिक इकाइयों में भू-जल का दोहन नहीं होना चाहिए। पीठ ने इस मामले में प्राधिकरण को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुशील राघव के मामले में यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि हाल ही में दिल्ली के भीतर नरेला-बवाना औद्योगिक इकाइयों के भू-जल दोहन पर रोक लगाने का आदेश दिया गया है। वही आदेश गाजियाबाद और हापुड़ के लिए भी लागू होगा। याची सुशील राघव का आरोप है कि संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां बिना केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण की अनुमति के बोरवेल के जरिये अवैध तरीके से भू-जल का दोहन कर रही हैं, जबकि सीजीडब्ल्यूए को अवैध भू-जल दोहन पर रोक लगाने के लिए कई बार एनजीटी की ओर से आदेश जारी किया जा चुका है। याची का आरोप है कि सैकड़ों औद्योगिक इकाइयां बिना अनुमति भू-जल दोहन कर रही हैं, जबकि क्षेत्र में पहले से ही भू-जल का स्तर काफी नीचे है।
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एनजीटी ने बीते वर्ष 13 सितंबर को अपने विस्तृत आदेश में सीजीडब्ल्यूए को निर्देश दिया था कि वह गाजियाबाद और हापुड़ स्थित सभी ऐसी औद्योगिक इकाइयों की बोरवेल को सील करे, जिन्होंने उससे अनुमति न ली हो या फिर एनजीटी के जरिये 2015 में अनुमति हासिल करने की मोहलत संबंधी आदेश का अनुपालन न किया हो।
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