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आतंकवाद पर हो सकती है पाक से बात-Business
Updated Thu, 11 Jan 2018 08:09 PM IST
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आतंकवाद पर हो सकती है पाक से बात
- पाकिस्तान पर भारत के रुख में आया अचानक बड़ा बदलाव
- दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात की बात भी स्वीकारी की
कहा इस मुलाकात में भी आतंक पर ही केंद्रित रही बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
पाकिस्तान के संदर्भ में भारत के रुख में अचानक बड़ा बदलाव आया है। अब तक आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चलने की नीति पर चल रहे भारत ने आतंकवाद के सवाल पर बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि दोनों देशों में आतंक पर बातचीत निश्चित रूप से आगे बढ़ सकती है।
इसके साथ ही भारत ने पहली बार थाइलैंड में 26 दिसंबर को दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की मुलाकात को भी स्वीकार किया है। गौरतलब है कि इस मुलाकात से ठीक एक दिन पहले पाकिस्तान में आतंकवाद के आरोप में फांसी की सजा पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की उनकी मां और पत्नी से मुलाकात कराई गई थी।
विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘हालांकि हम यह कहते रहे हैं कि बातचीत और आतंक साथ साथ नहीं चल सकते। इसके बावजूद कई ऐसी व्यवस्थाएं हैं जिसके तहत दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। दोनों देशों के डीजीएमओ आपसी बातचीत करते हैं। बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजरों के बीच बातचीत होती है’। इसी प्रक्रिया के तहत दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात हुई थी। हम आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकने की बात करते हैं, मगर आतंक पर बातचीत निश्चित रूप से आगे बढ़ सकती है। कुमार ने एनएसए स्तर की वार्ता के संदर्भ में बताया कि इस दौरान भी बातचीत आतंकवाद पर केंद्रित रही। भारत ने इस बैठक में भी सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके जरिए हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आतंक पूरे क्षेत्र को प्रभावित न करे।
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उफा में नवाज-मोदी ने तय किया था फार्मूला
केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार आई नरमी-गरमी के बीच रूस के उफा शहर में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने एनएसए स्तर पर संपर्क जारी रखने पर सहमति दी थी। यही कारण है कि कूटनीति गरमागरमी के चरम पर पहुंच जाने के बावजूद दोनों देशों के एनएसए लगातार एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं। तनावपूर्ण माहौल के बीच 2015 में भी दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद ही पीएम मोदी अचानक बिना किसी तय कार्यक्रम के लाहौर पहुंच गए थे।
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एनएसए की अगली मुलाकात पर साधी चुप्पी
प्रवक्ता ने एनएसए की मुलाकात की बात तो स्वीकारी मगर अगली मुलाकात पर चुप्पी साध ली। रविश ने कहा कि ऑपरेशनल स्तर की बातचीत के कारण ऐसी मुलाकातें पहले से घोषित नहीं की जाती हैं।
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बनते बनते बिगड़ती रही है बात
भारत-पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता का माहौल बनते-बनते खराब होता रहा है। पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज को न्यौता दे कर स्थिति बदलने के संकेत दिए थे। मगर तभी पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले ने किए-कराए पर पानी फेर दिया। इसके बाद विदेश सचिव स्तर की वार्ता में तत्कालीन पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित की कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत ने पानी फेर दिया। इसके बाद उड़ी आतंकी हमले ने द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती के रास्ते में कांटे बिछा दिए।
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- पाकिस्तान पर भारत के रुख में आया अचानक बड़ा बदलाव
- दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात की बात भी स्वीकारी की
कहा इस मुलाकात में भी आतंक पर ही केंद्रित रही बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
पाकिस्तान के संदर्भ में भारत के रुख में अचानक बड़ा बदलाव आया है। अब तक आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चलने की नीति पर चल रहे भारत ने आतंकवाद के सवाल पर बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि दोनों देशों में आतंक पर बातचीत निश्चित रूप से आगे बढ़ सकती है।
इसके साथ ही भारत ने पहली बार थाइलैंड में 26 दिसंबर को दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की मुलाकात को भी स्वीकार किया है। गौरतलब है कि इस मुलाकात से ठीक एक दिन पहले पाकिस्तान में आतंकवाद के आरोप में फांसी की सजा पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की उनकी मां और पत्नी से मुलाकात कराई गई थी।
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विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘हालांकि हम यह कहते रहे हैं कि बातचीत और आतंक साथ साथ नहीं चल सकते। इसके बावजूद कई ऐसी व्यवस्थाएं हैं जिसके तहत दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। दोनों देशों के डीजीएमओ आपसी बातचीत करते हैं। बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजरों के बीच बातचीत होती है’। इसी प्रक्रिया के तहत दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात हुई थी। हम आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकने की बात करते हैं, मगर आतंक पर बातचीत निश्चित रूप से आगे बढ़ सकती है। कुमार ने एनएसए स्तर की वार्ता के संदर्भ में बताया कि इस दौरान भी बातचीत आतंकवाद पर केंद्रित रही। भारत ने इस बैठक में भी सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके जरिए हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आतंक पूरे क्षेत्र को प्रभावित न करे।
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उफा में नवाज-मोदी ने तय किया था फार्मूला
केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार आई नरमी-गरमी के बीच रूस के उफा शहर में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने एनएसए स्तर पर संपर्क जारी रखने पर सहमति दी थी। यही कारण है कि कूटनीति गरमागरमी के चरम पर पहुंच जाने के बावजूद दोनों देशों के एनएसए लगातार एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं। तनावपूर्ण माहौल के बीच 2015 में भी दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद ही पीएम मोदी अचानक बिना किसी तय कार्यक्रम के लाहौर पहुंच गए थे।
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एनएसए की अगली मुलाकात पर साधी चुप्पी
प्रवक्ता ने एनएसए की मुलाकात की बात तो स्वीकारी मगर अगली मुलाकात पर चुप्पी साध ली। रविश ने कहा कि ऑपरेशनल स्तर की बातचीत के कारण ऐसी मुलाकातें पहले से घोषित नहीं की जाती हैं।
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बनते बनते बिगड़ती रही है बात
भारत-पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता का माहौल बनते-बनते खराब होता रहा है। पीएम मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज को न्यौता दे कर स्थिति बदलने के संकेत दिए थे। मगर तभी पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले ने किए-कराए पर पानी फेर दिया। इसके बाद विदेश सचिव स्तर की वार्ता में तत्कालीन पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित की कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत ने पानी फेर दिया। इसके बाद उड़ी आतंकी हमले ने द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती के रास्ते में कांटे बिछा दिए।
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