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पांच सौ डीमैट खाते खुलवाकर 15 करोड़ ठगे
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नोएडा। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने करेंसी में ट्रेडिंग करने के लिए डीमैट खाता खुलवाकर ठगने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी शोएब को मध्यप्रदेश के देवास से गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर यूपी सहित अन्य राज्यों के लोगों के 500 डीमैट खाते खुलवाकर 15 करोड़ रुपये ठग चुका है। पुलिस फरार दो आरोपियों की तलाश कर रही है।
इंदौर में अमदानी सोल्यूशन के नाम से ऑफिस खोलकर शोएब दो साथियों के साथ मिलकर गिरोह चला रहा था। आरोपी करेंसी में ट्रेडिंग करने के लिए डीमैट खाता खुलवाते थे। गिरोह ने गाजियाबाद निवासी अशोक मिश्रा से 15 लाख रुपये ठगे थे। इस मामले की शिकायत की जांच के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शोएब को गिरफ्तार कर लिया। ठगोें ने ट्रेडिंग के लिए मेटा ट्रेडर्स-05 नाम से फर्जी ऐप बनाकर प्ले स्टोर पर अपलोड कर रखा था। ऑफिस में कुछ लड़कों और लड़कियों को भी नौकरी पर रखा हुआ था। आरोपी लोगों को फोन कर स्कीम और डीमैट खातों में पैसा ट्रांसफर कर मोटी कमाई का लालच देते थे।
यूजर आईडी व पासवर्ड पास ही रखते थे
आरोपी अलग-अलग कस्टमर से डीमैट खातों में पैसा मंगवाते थे। एडिमन एक्सिस करने के लिए यूजर आईडी व पासवर्ड पास ही रखते थे। डीमैट खातों में दिखाई देने वाली धनराशि केवल डिजिट के रुप में कस्टमर को बढ़ती हुई दिखाई देती थी, जबकि असल में वह धनराशि बढ़ती नहीं थी। इससे ग्राहक धनराशि बढ़ती देख निवेश करता रहता था। इसके बाद जब ग्राहक खातों में दिख रही धनराशि का लाभ लेना चाहता था तो जीएसटी, कन्वर्जन चार्ज और सेटलमेंट चार्ज के नाम पर विभिन्न बैंकों खातों में और पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते थे।
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इंदौर में अमदानी सोल्यूशन के नाम से ऑफिस खोलकर शोएब दो साथियों के साथ मिलकर गिरोह चला रहा था। आरोपी करेंसी में ट्रेडिंग करने के लिए डीमैट खाता खुलवाते थे। गिरोह ने गाजियाबाद निवासी अशोक मिश्रा से 15 लाख रुपये ठगे थे। इस मामले की शिकायत की जांच के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शोएब को गिरफ्तार कर लिया। ठगोें ने ट्रेडिंग के लिए मेटा ट्रेडर्स-05 नाम से फर्जी ऐप बनाकर प्ले स्टोर पर अपलोड कर रखा था। ऑफिस में कुछ लड़कों और लड़कियों को भी नौकरी पर रखा हुआ था। आरोपी लोगों को फोन कर स्कीम और डीमैट खातों में पैसा ट्रांसफर कर मोटी कमाई का लालच देते थे।
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यूजर आईडी व पासवर्ड पास ही रखते थे
आरोपी अलग-अलग कस्टमर से डीमैट खातों में पैसा मंगवाते थे। एडिमन एक्सिस करने के लिए यूजर आईडी व पासवर्ड पास ही रखते थे। डीमैट खातों में दिखाई देने वाली धनराशि केवल डिजिट के रुप में कस्टमर को बढ़ती हुई दिखाई देती थी, जबकि असल में वह धनराशि बढ़ती नहीं थी। इससे ग्राहक धनराशि बढ़ती देख निवेश करता रहता था। इसके बाद जब ग्राहक खातों में दिख रही धनराशि का लाभ लेना चाहता था तो जीएसटी, कन्वर्जन चार्ज और सेटलमेंट चार्ज के नाम पर विभिन्न बैंकों खातों में और पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते थे।
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