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बुजुर्ग किसान की हत्या में ग्राम प्रधान समेत 14 नामजद
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गांव नगंला नैनसुख में किसान की हत्या के बाद विलाप करते परिजन। संवाद
- फोटो : Grnoida
दादरी। गांव नंगला नैनसुख में जमीन के विवाद में किसान नन्नू सिंह (60) की हत्या के मामले में बुधवार को ग्राम प्रधान समेत 14 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने सात नामजदों व फरार आरोपियों के तीन परिजनों को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि एक मुकदमा जीतने के बाद से किसान की आरोपियों से रंजिश थी।
दादरी पुलिस के अनुसार, नन्नू से लोग बीमार पशुओं का उपचार कराते थे। पशु को दिखाने के लिए कई बार लोग उन्हें घर भी ले जाते थे। हालांकि, उनके पास कोई डिग्री नहीं थी। मंगलवार को वह खेत पर यूरिया डालने गए थे। इस दौरान उन्हें तीन गोलियां मार दी गई थीं। बेटे राजीव ने गांव के ही ग्राम प्रधान कपिल, धर्मसिंह, सतीश, जगन, रणवीर, जग्गी, राजीव, जगवीर, सुभाष, मानसिंह, वीरपाल, प्रवीन, पदम और पवन को नामजद कराया है।
वहीं, नन्नू के बेटे अमित कुमार ने बताया कि वर्ष 1998 में गांव के दबंगों ने घर तोड़कर रास्ता निकाला था। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हाईकोर्ट में मामला जीतने के बाद से क्षेत्र के दबंग उनसे रंजिश रखने लगे थे। इस कारण उन्होंने पिता को गांव से आठ वर्ष तक बाहर भी रखा था। फिलहाल, तीन वर्ष से वह गांव में ही रहने लगे थे। वह 12वीं पास थे और पशुओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते थे। इस कारण गांववासी पशुओं का उनसे उपचार कराने आते थे। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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दादरी पुलिस के अनुसार, नन्नू से लोग बीमार पशुओं का उपचार कराते थे। पशु को दिखाने के लिए कई बार लोग उन्हें घर भी ले जाते थे। हालांकि, उनके पास कोई डिग्री नहीं थी। मंगलवार को वह खेत पर यूरिया डालने गए थे। इस दौरान उन्हें तीन गोलियां मार दी गई थीं। बेटे राजीव ने गांव के ही ग्राम प्रधान कपिल, धर्मसिंह, सतीश, जगन, रणवीर, जग्गी, राजीव, जगवीर, सुभाष, मानसिंह, वीरपाल, प्रवीन, पदम और पवन को नामजद कराया है।
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वहीं, नन्नू के बेटे अमित कुमार ने बताया कि वर्ष 1998 में गांव के दबंगों ने घर तोड़कर रास्ता निकाला था। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हाईकोर्ट में मामला जीतने के बाद से क्षेत्र के दबंग उनसे रंजिश रखने लगे थे। इस कारण उन्होंने पिता को गांव से आठ वर्ष तक बाहर भी रखा था। फिलहाल, तीन वर्ष से वह गांव में ही रहने लगे थे। वह 12वीं पास थे और पशुओं के बारे में अच्छी जानकारी रखते थे। इस कारण गांववासी पशुओं का उनसे उपचार कराने आते थे। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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