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महिलाएं चाहे तो बदले दे किसी भी प्रत्याशी की तकदीर
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महिलाएं चाहें तो बदल दें किसी भी प्रत्याशी की तकदीर
- गौतमबुद्घ नगर लोकसभा सीट पर पिछली बार महिलाओं ने 55.88 मतदान कर तोड़े सारे रिकॉर्ड
नेहा शर्मा
नोएडा। महिलाएं चाहें तो किसी भी प्रत्याशी की भाग्य विधाता बन सकती हैं, क्योंकि घर का चूल्हा-चौका छोड़ जिले की महिलाएं भी अपने मताधिकार को लेकर जागरूक हो रही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए महिलाओं ने 55.88 फीसदी मतदान किया था। अब देखना होगा कि क्या इस बार भी यह बढ़त बरकरार रहेगी।
जातिगत समीकरण के आधार पर चुनावी अखाड़े में एक-दूसरे को पटखनी देने की तैयारी में जुटे प्रत्याशियों के लिए महिलाओं की अनदेखी भारी पड़ सकती है। कुछ साल पहले तक लोकसभा सीट पर मतदान में आधी आबादी की भागीदारी बेहद कम थी। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने लोकतंत्र के महापर्व पर जमकर उपस्थिति दर्ज कराई। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह बदलाव यूं ही जारी रहा तो बड़े राजनीतिक दलों को इस सीट पर महिला प्रत्याशी उतारना उनकी मजबूरी होगी। जिले में मतदाताओं का आंकड़ा 15 लाख 37 हजार के करीब हो गया है।
2014 से पहले अच्छी नहीं थी स्थिति
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं की अच्छी तादात के बावजूद इनके वोट प्रतिशत में इजाफा नहीं हो पाया। 1971 के लोकसभा चुनाव में 43 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जबकि 2009 में यह आंकड़ा 40 फीसदी पर पहुंच गया। 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने सबसे कम वोट डाले।
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चुनावी बिसात पर अहम महिला वोटर
चुनावी मुद्दों की बिसात पर महिला मतदाताओं को कैसे फिट करना है, यह प्रत्याशी अच्छी तरह जानते हैं। महिला सुरक्षा का मुद्दा तो अहम है ही। साथ ही महिलाओं की रसोई पर महंगाई का मार, साल दर साल महंगी हो रही बच्चों की शिक्षा और गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम जैसे मुद्दों के जरिए महिला वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा मतदान में महिलाओं की भागीदारी
--------------------------
साल वोट प्रतिशत
1971 43
1977 39.94
1980 45
1984 44.95
1989 44.99
1991 45.15
1996 40
1998 45.01
1999 33.65
2004 37.05
2009 40.35
2014 55.88
आज महिलाएं जागरूक हैं। मतदान के लिए उत्साहित रहती हैं। कई जगह दबाव रहता है कि पहले घर का काम करें फिर मतदान करने जाएं। लेकिन वो जाती जरूर हैं। वो प्रत्याशी के समीकरण को बना और बिगाड़ सकती हैं।
- उषा ठाकुर, समाजसेविका
महिलाओं को वोट देने जरूर जाना चाहिए। वैसे वोटिंग को लेकर महिलाएं जागरूक भी हैं। पिछले कुछ सालों में वोटिंग करने वाली महिलाआें का आंकड़ा भी बढ़ा है। ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को वोट करना चाहिए।
- राजेश्वरी त्यागराजन , समाजसेविका
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- गौतमबुद्घ नगर लोकसभा सीट पर पिछली बार महिलाओं ने 55.88 मतदान कर तोड़े सारे रिकॉर्ड
नेहा शर्मा
नोएडा। महिलाएं चाहें तो किसी भी प्रत्याशी की भाग्य विधाता बन सकती हैं, क्योंकि घर का चूल्हा-चौका छोड़ जिले की महिलाएं भी अपने मताधिकार को लेकर जागरूक हो रही हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए महिलाओं ने 55.88 फीसदी मतदान किया था। अब देखना होगा कि क्या इस बार भी यह बढ़त बरकरार रहेगी।
जातिगत समीकरण के आधार पर चुनावी अखाड़े में एक-दूसरे को पटखनी देने की तैयारी में जुटे प्रत्याशियों के लिए महिलाओं की अनदेखी भारी पड़ सकती है। कुछ साल पहले तक लोकसभा सीट पर मतदान में आधी आबादी की भागीदारी बेहद कम थी। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने लोकतंत्र के महापर्व पर जमकर उपस्थिति दर्ज कराई। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह बदलाव यूं ही जारी रहा तो बड़े राजनीतिक दलों को इस सीट पर महिला प्रत्याशी उतारना उनकी मजबूरी होगी। जिले में मतदाताओं का आंकड़ा 15 लाख 37 हजार के करीब हो गया है।
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2014 से पहले अच्छी नहीं थी स्थिति
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं की अच्छी तादात के बावजूद इनके वोट प्रतिशत में इजाफा नहीं हो पाया। 1971 के लोकसभा चुनाव में 43 फीसदी महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था, जबकि 2009 में यह आंकड़ा 40 फीसदी पर पहुंच गया। 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने सबसे कम वोट डाले।
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चुनावी बिसात पर अहम महिला वोटर
चुनावी मुद्दों की बिसात पर महिला मतदाताओं को कैसे फिट करना है, यह प्रत्याशी अच्छी तरह जानते हैं। महिला सुरक्षा का मुद्दा तो अहम है ही। साथ ही महिलाओं की रसोई पर महंगाई का मार, साल दर साल महंगी हो रही बच्चों की शिक्षा और गैस सिलेंडर के बढ़ते दाम जैसे मुद्दों के जरिए महिला वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा मतदान में महिलाओं की भागीदारी
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साल वोट प्रतिशत
1971 43
1977 39.94
1980 45
1984 44.95
1989 44.99
1991 45.15
1996 40
1998 45.01
1999 33.65
2004 37.05
2009 40.35
2014 55.88
आज महिलाएं जागरूक हैं। मतदान के लिए उत्साहित रहती हैं। कई जगह दबाव रहता है कि पहले घर का काम करें फिर मतदान करने जाएं। लेकिन वो जाती जरूर हैं। वो प्रत्याशी के समीकरण को बना और बिगाड़ सकती हैं।
- उषा ठाकुर, समाजसेविका
महिलाओं को वोट देने जरूर जाना चाहिए। वैसे वोटिंग को लेकर महिलाएं जागरूक भी हैं। पिछले कुछ सालों में वोटिंग करने वाली महिलाआें का आंकड़ा भी बढ़ा है। ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को वोट करना चाहिए।
- राजेश्वरी त्यागराजन , समाजसेविका