{"_id":"266772c18e1a1e94646f4cdc59532dcf","slug":"noida-police-will-work-on-old-system","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुराने ढर्रे पर काम करेगी नोएडा पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुराने ढर्रे पर काम करेगी नोएडा पुलिस
अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 28 Feb 2014 04:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रेटर नोएडा में बदमाशों के आतंक के सामने बौनी साबित हुई पुलिस ने अब कसरत शुरू कर दी है।
विज्ञापन
फिर से पुराने ढर्रे को तैयार करने और हरेक थाने में दो-तीन अतिरिक्त कर्मी की टीम बनाने की तैयार की है। पुलिस ने बीट कांस्टेबल को फिर से सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। वह बताएगा कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन बदमाश सक्रिय हैं। साथ ही वारदात पर उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
आए दिन हो रही हत्या, डकैती और लूट की घटना से आम लोग आजिज आ चुके हैं। वहीं बदमाशों ने पुलिस की नाक में भी दम कर रखा है। बड़ी वारदातों ने पुलिस को झकझोर दिया है और अब वह पुराने ढर्रे पर काम करने का मन बना रही है। एसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि आपराधिक घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने फिर से सिपाही पर जिम्मेदारी तय करने की ठानी है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: NOC देने के 16 साल बाद भेजा वसूली नोटिस
एसपी ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वह प्रत्येक सिपाही को उसकी बीट की जिम्मेदारी दे। जिससे वह पता लगाएगा कि उसके इलाके में कौन-कौन बदमाश हैं। आपराधिक घटनाओं के दौरान उनकी लोकेशन क्या है।
विज्ञापन
जल्द ही थाना प्रभारियों को मोबाइल कंपनियों में रजिस्ट्रेशन कराकर पासवर्ड दे दिया जाएगा। एसपी ने बताया कि पिछले कुछ समय में हुई लूटपाट की घटनाओं का खुलासा करने के लिए मौजूदा समय में चार टीमें गठित की गई हैं। जबकि क्राइम ब्रांच की टीम बदमाशों की धर पकड़ के लिए अलग से लगी है।
दिन में भी नहीं सुरक्षित
करीब छह माह से ग्रेटर नोएडा में बदमाशों ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। आए दिन हत्या, डकैती, लूटपाट और छिनैती जैसी घटनाओं के चलते लोग रात तो रात दिन में भी सुरक्षित नहीं हैं। बाइकर्स दिन दहाडे़ लूट की घटनाओं को अंजाम देते हैं और रात में कंपनियों की गाड़ियों को शिकार बनाते हैं। सुरक्षा के नाम पर पीसीआर सड़कों पर घूमती है, लेकिन ट्रक और अन्य वाहनों से वसूली करती है।